Gyan ki Baatein : नवरात्रि में लहसुन-प्याज खाने के लिए क्यों मना करती हैं दादी-नानी?
चंडीगढ़, 31 मार्च (ट्रिन्यू)
Gyan ki Baatein : नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान भक्त विशेष रूप से उपवास रखते हैं और धार्मिक अनुशासन का पालन करते हैं। नवरात्रि के दिनों में दादी-नानी अक्सर लहसुन और प्याज खाने से मना करती हैं। इसके पीछे कुछ धार्मिक, सांस्कृतिक और आयुर्वेदिक कारण हैं, जिन्हें समझना जरूरी है...
नवरात्रि में क्यों नहीं खाना चाहिए लहसुन प्याज?
नवरात्रि में देवी दुर्गा की उपासना की जाती है, जो शक्ति की देवी हैं। लहसुन और प्याज जैसे तामसिक आहार माने जाते हैं। तामसिक आहार मनुष्य की मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है और उसे आलसी, क्रोधी और अशांत बना सकता है। यही वजह है कि नवरात्रि में भक्तों को सात्विक आहार लेने को कहा जाता है।
क्या कहता है आयुर्वेदिक?
आयुर्वेद में लहसुन और प्याज को तामसिक आहार माना गया है क्योंकि इनका सेवन करने से शरीर में गर्मी, जलन और उत्तेजना बढ़ सकती है। नवरात्रि जैसे समय में जब शरीर को शांति और ताजगी की आवश्यकता होती है इसलिए इस दौरान फल, दही, दूध, और साबूदाना जैसे हल्के और शुद्ध आहार का सेवन करने की सलाह दी जाती है।
राहु-केतु से जुड़ी कहानी
पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान अमृत के अलावा कुछ ऐसे जीव भी उत्पन्न हुए, जो अमृत के पात्र नहीं थे। इन में से दो मुख्य पात्र थे राहु और केतु, जो एक समय में देवताओं के साथ थे लेकिन बाद में वे राक्षसों के साथ मिल गए थे।
जब अमृत का वितरण हो रहा था, तब राहु और केतु ने छल करने की कोशिश की और देवताओं से अमृत प्राप्त करने के लिए देवताओं के रूप में खुद को बदल लिया। भगवान विष्णु ने अपनी चतुराई से इन्हें पहचान लिया और राहु को काटकर अलग कर दिया। राहु का सिर अमृत पीने से पहले ही काट दिया गया और केतु का धड़ अमृत से वंचित रहा। इस कारण राहु और केतु का अस्तित्व अधूरा रह गया और वे आकाश में अपनी काली छाया छोड़ते रहते हैं।
कथाओं के अनुसार, जहां उनका रक्त गिरा वहीं लहसुन-प्याज की उत्पत्ति हुई इसलिए व्रत के दौरान इनका सेवन वर्जित माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि लहसुन और प्याज खाने से राहु और केतु के प्रभाव को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि ये दोनों ही तामसी गुणों वाले होते हैं। ज्योतिषशास्त्र और आयुर्वेद में कहा जाता है कि व्रत के दौरान इनका सेवन नहीं करना चाहिए।
डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।