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टीआरपी की भेड़चाल से हुआ अन्याय

04:00 AM Mar 29, 2025 IST

किसी लड़की की किसी से दोस्ती हो और वह लड़का आत्महत्या कर ले, तो जब तक प्रमाण लड़की के खिलाफ न हों मीडिया को इस तरह शिकारी की भूमिका निभानी नहीं चाहिए कि लड़की का जीवन ही बर्बाद हो जाए। न्याय की बात टीआरपी को एक किनारे रखकर की जाए तो बेहतर है।

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क्षमा शर्मा

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के केस में सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की है। यानी इस मामले को अब बंद कर दिया गया है। आपको याद होगा कि सुशांत ने आत्महत्या की थी और उनके घर वालों ने फिल्मों में पहचान बनाने आई और सुशांत की मित्र रिया चक्रवर्ती को भी अभियुक्त बनाया था। उसे सत्ताईस दिन जेल में भी रहना पड़ा था। जबकि सीबीआई को रिया के खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिले। यह हमारी व्यवस्था की सफलता है कि उन्होंने एक निरपराध लड़की को कम से कम अपराध मुक्त किया। वरना तो पता नहीं इस लड़की और उसके परिवार का क्या होता। पच्चीस साल की एक लड़की ने इस मामले का सामना कैसे किया होगा, यह सोचने की बात है।
इस लड़की पर आरोप क्या लगे थे, इसे अपराधी बना दिया गया था। चार-चार एजेंसियां इसके पीछे लगी थीं। रिया के घर के बाहर मीडिया का भारी जमावड़ा कई दिनों तक लगा रहा। हर कोई ऊंची से ऊंची आवाज में उसे अपराधी साबित करने पर तुला था। आरोप लगने भर से उसे अपराधी मान लिया गया था। चैनल्स के लोग बाहर खड़े किस-किस तरह के अपशब्द बोल रहे थे। अरे रिया बाहर निकल। कहां छिपी है। सुशांत को खा गई। उसके पैसे के लिए उसे मार डाला। बहुत-सी तो ऐसी बातें जो लिखी भी नहीं जा सकतीं। लेकिन सरेआम बोलने वालों को कोई शर्म नहीं आ रही थी। यह देखकर भी हैरत होती है कि कोई भी स्त्रीवादी उस समय रिया के समर्थन में नहीं बोला था। न ही कोई उसकी मदद के लिए सामने आया था। महिला आयोग भी चुप्पी साधे रहे थे। क्या रिया लड़की नहीं थी। उसके कोई अधिकार भी नहीं थे।
रिया के पिता जो सेना में डाक्टर रहे हैं, उन्होंने उस वक्त कहा भी था कि एक मध्यवर्गीय परिवार को नष्ट कर दिया गया है। उसकी मां बीमार पड़ गई थीं। उस बहुमंजिली सोसायटी में रहने वाले अड़ोसी-पड़ोसी की नजरों में उसका सम्मान नष्ट कर दिया गया था। रही-सही कसर इन आरोपों ने भी पूरी कर दी थी कि सुशांत को हाल ही में पंद्रह करोड़ रुपये मिले थे। शायद रिया ने वे भी हड़प लिए। उस पर ड्रग सप्लाई करने के भी आरोप लगाए गए थे।
चारों तरफ से इतने हमले हो रहे थे। जो फिल्में रिया ने साइन की थीं, उनसे उसे निकाल दिया गया था। वह जैसे इस निर्मम दुनिया का सामना करने के लिए अकेली थी। अकेली ही उसे उन सभी आरोपों का सामना करना पड़ रहा था जिनके लिए वह जिम्मेदार भी नहीं थी। बाद में यह भी पता चला था कि सुशांत ने जो पंद्रह करोड़ रुपये मिलने की बात अपने घर वालों को बताई थी, वे रुपये कभी उसके अकाउंट में आए ही नहीं थे। कई चैनलों ने हफ्तों तक इस मामले को तूल दिया था और बहुत हल्ला मचाया था। सुशांत की पूर्व महिला मित्र भी मीडिया में आकर रात-दिन बयान दे रही थी कि वह आत्महत्या तो कर ही नहीं सकता। वह इतना कमजोर लड़का नहीं था। हालांकि, यह बात भी सामने आई थी कि सुशांत को गहरा अवसाद था। इसकी वजह यह भी बताई गई थी कि चूंकि वह फिल्मी बैकग्राउंड से नहीं है, इसलिए अच्छा काम करने के बावजूद, रोल्स में उसे प्राथमिकता नहीं मिलती है। सुशांत की मृत्यु ने बिहार के लोगों को भी उद्वेलित किया था। वे इसे अपने सम्मान का मामला मानने लगे थे।
जो भी हो, इस पूरे मामले में पांच साल पहले मीडिया के एक वर्ग ने रिया को खलनायिका साबित कर दिया था। इस तरह के मीडिया ट्रायल का सामना इससे पहले शायद किसी युवा अभिनेत्री ने नहीं किया था। एक लड़की का अच्छा भला करिअर, उसकी प्रतिष्ठा, सब बर्बाद कर दी गई थी। सिर्फ रिया ही क्यों, उसके पूरे परिवार ने इस दौरान क्या-क्या नहीं झेला होगा। वैसे भी भारतीय समाज में तो लड़की पर एक उंगली उठी नहीं कि वह खलनायिका बनी नहीं। फिर उसे कहीं से कोई माफी नहीं मिलती। उंगली उठाने वाला चाहे संसार का सबसे बड़ा अपराधी ही क्यों न हो, मगर क्योंकि वह उंगली लड़की की तरफ उठी है, तो उसे अपराधी मान ही लिया जाएगा। वैसे भी आरोपी को अपराधी बनाना और लगातार मीडिया बैशिंग तथाकथित स्वतंत्र चैनल्स का बड़ा भारी शौक भी है। बाद में जिसको लगातार अपराधी बनाया गया, उसे अदालत ने बरी भी कर दिया तो चैनल्स कभी शर्मिंदा नहीं होते। न ही अपने किए पर पश्चाताप करते हैं या माफी मांगते हैं।
जिस फिल्म इंडस्ट्री में कोई किसी का सगा नहीं, वहां भला रिया को बचाने आता भी कौन। उसने पूरी लड़ाई अपने परिवार के साथ अकेले ही लड़ी। और इसके लिए उसकी तारीफ की जानी चाहिए।
अक्सर नेगेटिव पब्लिसिटी के बारे में कहा जाता है कि वह रातोरात आपको घर-घर में लोकप्रिय कर देती है। लोग बात तो भूल जाते हैं मगर चेहरे को याद रखते हैं। एक बार मशहूर अभिनेत्री और फिल्मकार महेश भट्ट की बेटी पूजा भट्ट ने कहा था कि कोशिश करनी चाहिए कि ज्यादा से ज्यादा नेगेटिव पब्लिसिटी हो। इससे किसी हीरो-हीरोइन को स्थापित होने में मदद मिलती है। पूजा भट्ट शायद बिना किसी मुसीबत के नेगेटिव पब्लिसिटी को झेल सकती थीं, क्योंकि वह महेश भट्ट की बेटी थीं। फिल्मी बैकग्राउंड से होने का लाभ भी था। लेकिन रिया जैसी साधारण लड़कियों के लिए तो हत्या जैसे अपराध के मामले में आरोपी बना दिया जाना एक बहुत बड़ी मुसीबत की तरह था। रही-सही कसर मीडिया ने पूरी कर दी थी।
उस समय भी इस लेखिका ने अपने इसी अखबार में लिखा था कि यदि रिया पर कोई आरोप साबित नहीं हुआ, तो क्या वे लोग, जो रात-दिन उसे अपराधी साबित कर रहे हैं, माफी मांगेंगे। हुआ भी यही। सीबीआई ने केस बंद कर दिया। रिया के खिलाफ कोई आरोप साबित तक नहीं हुआ। तब भी उसने बार-बार कहा था कि न वह घटनास्थल पर मौजूद थी, न ही कई दिनों से सुशांत से उसकी बातचीत हुई थी। लेकिन उस समय तो सारे ज्ञानी यही कह रहे थे कि पकड़े जाने पर हर अपराधी अपने को निर्दोष ही बताता है।
कहने का अर्थ यह कि आज रिया आरोपमुक्त हो चुकी है। हालांकि हाल ही में सुशांत राजपूत की मैनेजर दिशा सालियान की आत्महत्या के मामले में उनके पिता ने मुम्बई हाईकोर्ट में अपील दायर की है। जिसमें मांग की गई है कि उनकी बेटी के मामले पर फिर से विचार किया जाए। इसमें उन्होंने रिया चक्रवर्ती का नाम भी लिया है। लेकिन लगता है कि इस मामले में भी रिया निर्दोष ही साबित होगी। बहुत झेल लिया इस लड़की ने। अब तो उसे मुक्ति दो। किसी लड़की की किसी से दोस्ती हो और वह लड़का आत्महत्या कर ले, तो जब तक प्रमाण लड़की के खिलाफ न हों मीडिया को इस तरह शिकारी की भूमिका निभानी नहीं चाहिए कि लड़की का जीवन ही बर्बाद हो जाए। न्याय की बात टीआरपी को एक किनारे रखकर की जाए तो बेहतर है।

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लेखिका वरिष्ठ पत्रकार हैं।

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