Chaitra Navratri 2025 : नवरात्रि व्रत रखा है , नींबू मत काटो... ऐसा क्यों कहती है दादी-नानी ?
चंडीगढ़, 2 अप्रैल (ट्रिन्यू)
Chaitra Navratri 2025 : नवरात्रि हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो विशेष रूप से देवी दुर्गा की पूजा के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान लोग व्रत रखते हैं और देवी की उपासना में दिन-रात एक करते हैं। इस अवसर पर कुछ विशेष नियमों का पालन किया जाता है, जिनमें से एक है कि "नींबू मत काटो" ... दादी-नानी अक्सर यही सलाह देती हैं, लेकिन इसका क्या कारण है? आइए, इस बारे में जानते हैं
नींबू का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में नींबू का विशेष महत्व है। यह फल ताजगी और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। साथ ही, यह पूजा-पाठ में भी इस्तेमाल किया जाता है। विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान, जब देवी दुर्गा की पूजा होती है। मंदिरों में भी नींबू को पूजा में चढ़ाया जाता है और घरों में भी इसे घर की रक्षा और शुद्धता के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
मां दुर्गा हो जाती हैं नाराज
हिंदू धर्म में ऐसा भी माना जाता है कि नवरात्रि के दौरान नींबू काटने से मां दुर्गा रुष्ट हो सकती हैं। खासकर जो लोग व्रत रखते हैं, उन्हें नींबू काटने की सख्त मनाही होती है। माना जाता है कि इस दौरान नींबू काटना बलि देने के बराबर होता है और इससे घर में तामसिक शक्तियों का प्रभाव पड़ सकता है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस दौरान नींबू काटने से उस व्यक्ति के जीवन में नकारात्मकता आ सकती है।
नींबू का काटना और उसकी धार्मिक महत्ता
जब दादी-नानी यह कहती हैं कि "नींबू मत काटो," तो इसका मतलब यह होता है कि नींबू के कटने से उसकी शुद्धता और शक्ति में कमी आ सकती है। यह मान्यता है कि नींबू को काटने से वह फल अपवित्र हो जाता है और उसके प्रभाव में भी कमी आ जाती है।
क्या कहते हैं वैज्ञानिक?
वहीं, अब अगर हम इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो नींबू को काटने पर उसमें उपस्थित रसायनिक तत्वों और पोषक तत्वों में बदलाव आ सकता है। हालांकि यह धार्मिक दृष्टिकोण से ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं है। हो सकता है कि दादी-नानी इसे किसी धार्मिक परंपरा के साथ जोड़कर देखती हों, ताकि हर कार्य अधिक शुद्धता और श्रद्धा से किया जाए।
डिस्केलमनर: यह लेख/खबर धार्मिक व सामाजिक मान्यता पर आधारित है। dainiktribneonline.com इस तरह की बात की पुष्टि नहीं करता है।