पति का धर्म
श्रीअरविंद आश्रम में श्रीमां के दर्शन व उनसे मार्गदर्शन लेने के लिये श्रद्धालुओं का हुजूम पांडिचेरी में लगा रहता था। एक बार एक सुशिक्षित बंगाली सज्जन श्रीमां से मिलने आए। बातचीत में उन्होंने शिकायत की कि मैं अपनी पत्नी के असभ्य व्यवहार से परेशान हूं। श्रीमां ने उनसे पूछा, ‘तुम्हारे विवाह को कितने साल हो गए हैं?’ व्यक्ति बोला, ‘करीब बीस वर्ष।’श्रीमां ने पूछा इन दो दशकों में क्या तुमने उन्हें सभ्य बनाने के प्रयास किए? तुमने घर चलाने, बच्चों की शिक्षा, सुख-सुविधाओं पर खूब खर्च किया होगा। बताना कि क्या तुमने एक प्रतिशत धन भी उसे सभ्य और शिक्षित बनाने में व्यय किया? यदि तुम ऐसा करते तो निश्चय ही उसके असभ्य रहने की शिकायत तुम नहीं करते। श्रीमां ने कहा कि स्त्री केवल बच्चे पैदा करने, खाना बनाने की मशीन नहीं है। उसने आपके बच्चों को पढ़ा-लिखाकर सभ्य बनाया है। हमें उसकी गरिमा का सम्मान करना चाहिए।
प्रस्तुति : डॉ. मधुसूदन शर्मा