Punjab Colonel Assault Case : सेना ने निष्पक्ष जांच का किया आह्वान; पंजाब डीजीपी ने कहा- करते हैं सम्मान
चंडीगढ़, 25 मार्च (भाषा)
Punjab Colonel Assault Case : सेना ने कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ के साथ मारपीट मामले में दोषियों को दंडित करने के लिए पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से निष्पक्ष जांच का मंगलवार को आह्वान किया। कर्नल ने पार्किंग विवाद को लेकर पंजाब पुलिस के 12 कर्मियों पर उनके और बेटे के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है।
निष्पक्ष और ईमानदार जांच की आवश्यकता पर जोर
उन्होंने याचिका में आरोप लगाया कि पंजाब पुलिस के तहत निष्पक्ष जांच असंभव है। कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ ने सोमवार को हाइकोर्ट में एक याचिका दायर करके मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने का अनुरोध किया। सेना के पश्चिमी कमान मुख्यालय चंडीमंदिर के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल मोहित वाधवा ने पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के साथ कहा कि हम दोषियों को दंडित करने और व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए पारदर्शी व समयबद्ध तरीके से निष्पक्ष और ईमानदार जांच की आवश्यकता पर जोर देते हैं।
लेफ्टिनेंट जनरल वाधवा ने कहा कि दोषी पुलिसकर्मियों को समय पर और अनुकरणीय तरीके से दंडित किया जाना चाहिए, ताकि इस घटना से माहौल खराब न हो। पंजाब पुलिस तथा सेवारत एवं सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के बीच लंबे समय से जारी सौहार्द पर असर न पड़े। मैं सभी को आश्वस्त करना चाहूंगा कि भारतीय सेना इस मामले को तार्किक परिणाम तक ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
डीजीपी यादव ने कहा कि पंजाब पुलिस भारतीय सेना के प्रति अपना सम्मान दोहराती है। सैन्य अधिकारियों की गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। सेवारत सैन्य अधिकारी के साथ मारपीट करने वाले किसी भी व्यक्ति के साथ कानून के अनुसार सख्ती से निपटा जाएगा। जांच तेजी से पूरी की जाएगी, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।
पंजाब पुलिस ने पिछले सप्ताह कर्नल बाठ के बयान के आधार पर एक नई प्राथमिकी दर्ज की थी। ‘‘निष्पक्ष और त्वरित तरीके से'' जांच करने के लिए एक उच्च-स्तरीय विशेष जांच दल का गठन किया गया है। सभी 12 कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है। कर्नल बाठ ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि उन पर और उनके बेटे पर 13 और 14 मार्च की दरमियानी रात को पटियाला में "क्रूरतापूर्वक" हमला किया गया।