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पाचनतंत्र की तंदुरुस्ती से जुड़ी है सेहत की राह

07:49 AM Jun 12, 2024 IST
पाचनतंत्र की तंदुरुस्ती से जुड़ी है सेहत की राह
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अरुण नैथानी
शरीर में गैस बनने का सीधा संबंध पाचनतंत्र से है। सही मायनों में यह पाचनतंत्र की व्याधि है। हम शरीर की प्रकृति अच्छी तरह समझ नहीं पाते। जब खाना शरीर की प्रकृति के अनुकूल नहीं होता तो पचता नहीं है और गैस बनाएगा। खाना चाहे बाहर पड़ा हो या भीतर, गैस बनाएगा। हमें इसे ठीक करने के लिये शरीर की पाचन क्रिया पर ध्यान देना होगा। यह हमारे पाचनतंत्र की तंदुरुस्ती पर निर्भर करता है। अच्छी सैर, योग व एक्सरसाइज नियमित करनी होगी ताकि पाचनतंत्र जाम न हो। शरीर सक्रिय व फुर्तीला रहे।

शरीर व ऋतु के अनुकूल भोजन

दूसरी अप्रोच होती है खाने की। हमें जानकारी होनी चाहिए कि हमारा शरीर किस खाने के साथ सुविधाजनक रहता है। हर एक खाना प्रत्येक व्यक्ति को सूट नहीं करता। ध्यान दें कि मौसम के हिसाब से कौन सा पचता है। योग-आयुर्वेद ऋतुचर्या के अनुरूप खाने के बारे में बताते हैं। गर्मियों में भोजन हलका हो व उसमें पानी की मात्रा ज्यादा हो तो वह जल्दी पच जाएगा। नेचर भी आजकल उसी ढंग से फल-सब्जी देती है। तरबूज-खरबूज व खीरा में पानी की मात्रा ज्यादा होती है व ये जल्दी पच जाते हैं। सर्दी में हैवी चल जाता है, क्योंकि सर्दी का सामना करना होता है। शारीरिक सक्रियता के साथ खाने की मात्रा व खाने का गुण भी देखना चाहिए।

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उम्र बढ़ने के साथ समस्या

निस्संदेह, अपच व गैस पर उम्र का असर बिल्कुल होता है। छोटी उम्र में पाचन कुदरती तेज होता है। सब कुछ पच जाता है। जैसे ही उम्र 30 से 40 तक पहुंचती है, पाचनतंत्र वीक होने लगता है। उसके हिसाब से खाना हलका लेना चाहिए। लेकिन जो लोग शारीरिक रूप से सक्रिय रहते हैं, योग, व्यायाम व सैर करते हैं वे पचास साल तक पाचन ठीक रख सकते हैं।

काम की प्रवृत्ति का असर

दरअसल, ज्यादा लंबे समय तक बैठे रहने से भी गैस की समस्या पैदा होती है क्योंकि हमारा पाचन तंत्र शिथिल हो जाता है। वैसे तो नौ से पांच के ऑफिस टाइम में बैठे रहने वालों को भी दिक्कत होती है। लेकिन अब बहुराष्ट्रीय कंपनियों में बारह-बारह घंटे की शिफ्ट होती हैं। आगे झुककर रहने से पेट दबा रहता है। इससे पाचन तंत्र मद्धम व निष्क्रिय हो जाता है। ऐसे में रोज आधा घंटे का योग-आसन, जिम या व्यायाम करें। अपनी पाचन प्रणाली को तंदुरुस्त बनाएं। खाने के प्रति सचेत रहें। कई बार हम प्रकृति द्वारा दिये खाने को भी किचन में हैवी बना देते हैं। पाचन प्रणाली को मजबूत करें ।

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खाने में परहेज

हमारी खानपान की आदतों में कुछ खाने रात में प्रकृति के हिसाब से गैसवर्धक हैं। मसलन काबली चना, राजमा,गोभी आदि गैस बनाते हैं। भारत में आम गृहिणियों को खाने के संस्कार का पता होता है कि फूलगोभी ज्यादा गैस बनाती है। उनको इस ढंग से लें कि कम से कम गैस बने। उसके साथ तरी वाली चीजें ज्यादा लें। जो गैस की प्रभावशीलता कम करें। फिर भी हमें अपने शरीर की समझ होनी चाहिए कि कौन सा खाना गैस बढ़ाता है।

सूरज की रोशनी और पाचन

दरअसल, जीवन शैली में बदलाव के कारण कई पेशे ऐसे हैं जिसमें देर रात तक काम करना पड़ता है। वैसे भी रात को पाचन प्रणाली सुस्त हो जाती है। हमारा शरीर ऐसा बना है कि उसे रात में भरपूर नींद चाहिए होती है । वैसे तब खाना अच्छा पचता है जब आसमान में सूरज होता है। हमारी जठाराग्नि तभी तेज होती है। रात को यह मद्धम हो जाती है।

रात की बड़ी बात

जितना जल्दी हो सके रात का खाना खा लें। वहीं जितना कम हो बेहतर है। कम से कम सोने से तीन घंटे पहले रात में भोजन ले लें। पेय पदार्थों में सूप ज्यादा अच्छा रहता है। ये गैस नहीं बनाते। हमारी खाने की लिस्ट दिमाग में होनी चाहिए कि क्या-क्या खाने हल्के हैं। आपके शरीर के अनुभव दाल, खीरा व घिया लेने को कहते हैं। ये नेचर में हल्की हैं। हैवी चीजों पर ध्यान दें। चपाती पचने में दिक्कत करती है। रात के खाने में न हो। आदत हो तो एक-आध लें। मैदे वाली चीज नहीं लें।

वात, पित्त व कफ असंतुलन

दरअसल गैस की समस्या वात प्रकृति ज्यादा होने से पैदा होती है। खास दिनों व मौसम में वात बढ़ जाता है। व्यक्ति की प्रकृति भी वात वाली होती है। इन दिनों वात प्रकृति को कम करने का प्रयास करें।

बाजार में चूर्ण

दावा किया जाता है कि बाजार में बिकने वाले चूर्ण पाचन तंत्र को सक्रिय करते हैं। वैसे घरेलू चूर्ण भी उपयोगी होते हैं। उनमें अदरक, अमचूर, जीरा, अजवाइन आदि पाचन क्रिया को एक्टिव करते हैं। ये विशेषज्ञ से पूछें कि इन्हें कब लेना हैं यानी खाने से पहले, बीच या बाद में लेना है।

गैस नियंत्रण में सहायक योगासन

दरअसल, कई आसन इसमें बेहद उपयोगी होते हैं। पवनमुक्त आसन, भुजंग आसन, सेतुबंध आसन, ब्रिज पोज़, बाल आसन, मार्जरी आसन, अधोमुख श्वानासन, त्रिकोणासन, पश्चिमोत्तान आसन पेट के अंगों को गतिशील करते हैं। ये आसन गैस, सूजन और कब्ज के लिए एक बेहतरीन थैरेपी के रूप में पेट की मालिश करते हैं। लेकिन ये आसन किसी योग्य गुरु, प्रशिक्षक की देखरेख में ही किये जाने चाहिए।

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