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बेहतर क्रेडिट स्कोर से खुशहाली का कनेक्शन

06:39 AM Jun 23, 2024 IST
बेहतर क्रेडिट स्कोर से खुशहाली का कनेक्शन
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शैलेंद्र सिंह
क्रेडिट स्कोर एक तीन अंकों की संख्या है, लेकिन ये तीन अंक आज हमारी खुशहाली का पैमाना बन चुके हैं। दरअसल क्रेडिट स्कोर के इन तीन अंकों से ही तय होता है कि आपको क्रेडिट कार्ड या कई दूसरी तरह के ऋण मिलेंगे या नहीं मिलेंगे, और अगर मिलेंगे तो आपसे उसके लिए ब्याज दर क्या ली जायेगी। अगर आपका क्रेडिट स्कोर कम है या खराब है, तो आपको अव्वल तो ऋण नहीं मिलेगा और अगर मिलेगा तो उसके लिए दूसरे लोगों के मुकाबले ज्यादा ब्याज दर ली जायेगी। इसलिए कह सकते हैं कि आज खुशहाल लाइफस्टाइल का दरवाजा बेहतर क्रेडिट स्कोर की कुंजी से ही खुलता है।
ताकि जरूरत में सहज हो कर्ज लेना
हम चाहे निम्न वर्ग के हों, मध्यवर्ग के हों या उच्च मध्यवर्ग के - बिना बाजार से ऋण लिए हमारी जिंदगी सहजता से नहीं चलती। कभी न कभी उधार या ऋण के दरवाजे से होकर गुजरना ही पड़ता है। चाहे बच्चों को पढ़ाना हो, घर बनाना हो, कार खरीदनी हो, घर सजाना हो, बिजनेस करना हो या कुछ भी ऐसा काम जिसमें एक ठीक-ठाक पूंजी की जरूरत होती है, वह पूंजी अब हमें आसानी से ऋण के जरिये महज कुछ शर्तों पर उपलब्ध हो जाती है। लेकिन यह सुविधा उन्हीं के लिए बहुत सहज उपलब्ध है, जिनका क्रेडिट स्कोर अच्छा होता है। बैंक और वित्तीय कंपनियों की नजर में जो अच्छे उधार लेने वाले हैं यानी समय पर किस्त चुकाते हैं, बिना मतलब बाधा नहीं खड़ी करते, ऋण चुकाने में आनाकानी नहीं करते, जल्दी से जल्दी कर्ज चुकाने की कोशिश में रहते हैं और न दे पाने पर बहाना नहीं बनाते। ऐसे ही लोगों को बैंक मान-मनौव्वल करके भी कर्ज देना चाहते हैं।
क्रेडिट स्कोर की जानें अहमियत
बेहतर क्रेडिट स्कोर का सारा जादू इसी में है। इसी सुविधा के कारण आज यह हमारे लाइफस्टाइल को सीधे-सीधे प्रभावित करता है। हालांकि भारत में अनुमानतः 11 करोड़ से ज्यादा लोग हर महीने ईएमआई देते हैं, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में ऋण लेने के बावजूद और ऋण की दुनिया से सीधे-सीधे जुड़े होने पर भी बहुत से लोग नहीं जानते कि आखिर एक बेहतर क्रेडिट स्कोर हमारी जिंदगी को किस तरह प्रभावित करता है? ऐसे में हर किसी को बेहतर क्रेडिट स्कोर या गुड सिबिल स्कोर के बारे में जानना ही चाहिए।
बेहतर क्रेडिट स्कोर माने कितना?
बेहतर क्रेडिट स्कोर के फायदे ये हैं कि ऐसे लोगों को बैंक और वित्तीय संस्थान आसानी से ऋण देते हैं, दूसरों के बजाय सस्ती दरों पर देते हैं, सिर्फ इसलिए कि बैंक ऐसे लोगों को ईमानदार कर्ज लेने वाले मानते हैं। यानी ईमानदारी का सबूत भी है क्रेडिट स्कोर। सवाल है कि आखिर बेहतर क्रेडिट स्कोर या बेहतर सिबिल स्कोर कैसे बनाएं? इसके लिए पहले यह जान लें कि अच्छा क्रेडिट स्कोर कितना होता है? वास्तव में क्रेडिट स्कोर 300 से 900 अंकों के बीच की संख्या होती है। इस संख्या में अगर आपका क्रेडिट स्कोर 700 है तो यह अच्छा माना जाता है। 700 से ऊपर है तो और अच्छा माना जाता है और अगर 800 या उसके पार है तब तो बहुत अच्छा। आपका जितना अच्छा क्रेडिट स्कोर होगा, बैंक आपको उतने ही कम ब्याज दर पर कर्ज देने का प्रस्ताव देंगे और जितना कम क्रेडिट स्कोर होगा, आपको उतनी ही ज्यादा ब्याज दरों पर कर्ज मिलेगा।
ब्याज दरों व शर्तों में भी अंतर
अगर आपका क्रेडिट स्कोर उच्चतम श्रेणी यानी 760 से 850 के बीच में है तो आपसे ऋणदाता अधिकतम 3.307 प्रतिशत ब्याज ले सकता है। मतलब यह कि आरबीआई के रेपो रेट से आपको 3.307 प्रतिशत और ब्याज दर देनी होगी। मान लीजिए रेपो रेट 3.5 प्रतिशत है तो आपको बैंक कुल 6.3 प्रतिशत की ब्याज दर पर ऋण दे देंगे। लेकिन जिसका स्कोर सिर्फ 300 से 500 के बीच होता है, उन्हें अव्वल तो ऋण नहीं मिलता, बहुत मुश्किल से अगर मिलता भी है, तो काफी महंगी दरों पर मिलता है। दरअसल खराब क्रेडिट स्कोर से कई तरह की परेशानियां होती हैं। बैंकों से कर्ज बहुत मुश्किल से व ज्यादा ब्याज दर पर मिलता है, बेहतर कमाई के बावजूद कर्ज मंजूर करने के पहले बैंक प्री-अप्रूव्ड प्रोसेस से गुजरते हैं, इससे कई बार मंजूर हुआ ऋण मिलना भी मुश्किल हो जाता है। लोन आवेदन खारिज होने की आशंका बनी रहती है और अंत में लोन मिलता भी है तो वह बड़ी प्रतिकूल शर्तों पर।
स्कोर बेहतर करने के उपाय
सवाल है कि अगर हमारा क्रेडिट स्कोर कम है या खराब है, तो उसे बेहतर करने के लिए क्या काम या उपाय करें? बता दें कि भारत में चार क्रेडिट ब्यूरो मिलकर किसी का क्रेडिट स्कोर तैयार करते हैं, जो किसी भी व्यक्ति के पुनर्भुगतान, ऋण की उपयोगिता, कर्ज लेने के पैटर्न और कर्ज लेने की हिस्ट्री को कसौटी बनाते हैं। अगर हमारा क्रेडिट स्कोर कम है तो इसे बेहतर करने के लिए अपने क्रेडिट कार्ड का बिल समय से भरें। कोई मासिक लोन की किस्त चल रही है तो उसे न सिर्फ नियमित रूप से दें बल्कि समय पर दें। ऐसा न करने पर क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां आपके क्रेडिट स्कोर को कम कर देती हैं। जब आप लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करते हैं तो बैंक या अन्य वित्तीय संस्थान क्रेडिट ब्यूरो से आपकी क्रेडिट योग्यता के बारे में पूछताछ करते हैं और क्रेडिट ब्यूरो आपके बारे में मिलने वाली प्रत्येक नकारात्मक बात के लिए आपकी क्रेडिट हैसियत यानी स्कोर को कुछ अंक कम कर देते हैं।
बार-बार लोन लेने से भी बचें
यह भी कि क्रेडिट स्कोर बेहतर बनाये रखने के लिए लोन से जुड़े आवेदन बार-बार न करें। क्रेडिट कार्ड का केवल उचित इस्तेमाल ही करें। ज्यादा और गैरजरूरी इस्तेमाल साबित करता है कि आपकी आदत बेपरवाह खर्च करने की है। अगर लोन चुकाने में असमर्थ हैं तो सेटलमेंट या समझौता कभी न करें, इससे वित्तीय बोझ तो कम हो जाता है, तात्कालिक तौर पर आपको राहत मिल जाती है, लेकिन इससे क्रेडिट स्कोर बहुत लंबे समय तक प्रभावित रहता है। अगर आपने लोन का सेटलमेंट किया है तो भविष्य में किसी भी तरह का कर्ज लेने में काफी मुश्किलें अा सकती हैं। कई बार बैंक या दूसरे वित्तीय संस्थान क्रेडिट ब्यूरो को जानकारी नहीं भेजते या गलत भेज देते हैं। क्रेडिट स्कोर प्रभावित न हो ऐसे में अपने क्रेडिट स्कोर पर नियमित नजर रखें।
-इ.रि.सें.

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