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एनालिटिकल स्किल से कामयाबी की इबारत

07:00 AM Jul 04, 2024 IST
एनालिटिकल स्किल से कामयाबी की इबारत
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कीर्तिशेखर
सिविल सेवा यानी यूपीएससी देश की सबसे कठिन परीक्षा है, जिसे पास करने के लिए हमें बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन इसे पास करने वालों से पूछिये तो वह आपको बताएंगे कि सिर्फ कड़ी मेहनत से सब कुछ नहीं होता। अगर हममें कड़ी मेहनत के साथ चीजों के विश्लेषण की क्षमता या कुशलता नहीं है, तो सिर्फ दिन रात मेहनत करके आप न तो कोई सफलता हासिल कर सकते हैं और न ही जीवन में महत्वपूर्ण परीक्षाएं पास कर सकते हैं। इसलिए शुरू से ही हमें अपने अंदर विश्लेषण की क्षमता पैदा करनी चाहिए, जिससे जिंदगी की तमाम परीक्षाएं आसानी से पास कर सकें।

टेढ़े-मेढ़े सवाल

सिविल सेवा में जो सवाल पूछे जाते हैं, वो सीधे-सीधे कभी नहीं पूछे जाते। यहां सवाल इस तरह घुमा-फिराकर पूछे जाते हैं कि आपमें पढ़े हुए को अच्छी तरह से विश्लेषित करने की क्षमता अगर नहीं है, तो जरूरी नहीं है कि आप सफल ही हों। इसलिए अगर आप यूपीएससी क्रैक करने के सपने देख रहे हैं तो अपने एनालिटिकल स्किल को बढ़ाइये। क्योंकि यह हमारे अंदर की विश्लेषात्मक क्षमता ही होती है, जो हमें विभिन्न समस्याओं के समाधान खोजने और उनके संबंध में ठोस निर्णय तक पहुंचने में मदद करती है। सिविल सेवा परीक्षाओं में सवालों का फॉर्मेट ऐसा होता है कि अगर आपमें चीजों के विश्लेषण की क्षमता है तो आप आसानी से सवालों के जवाब क्रैक कर लेंगे।

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गॉड गिफ्ट नहीं है एनालिटिकल स्किल

हममें से किसी के पास जन्म से एनालिटिकल स्किल नहीं होती। हमारी जिस माहौल में परवरिश हुई होती है, ये वहीं से आती हैं। इसलिए अगर बचपन से ही हमें जानकारियों के साथ उनके विश्लेषण का भी अभ्यास कराया जाए तो हम सिर्फ सिविल सर्विसेज में ही नहीं जीवन की हर परीक्षा में बहुत आसानी से पास हो सकते हैं। अपने कैरियर में ज्यादातर सफल लोग इसे खुद से अपने में विकसित करते हैं या यह काम हमारे आसपास का वातावरण करता है।

फैक्ट याद रखें

भले सामान्य बातचीत में कहा जाता हो कि आंकड़ों की बाजीगरी में न पड़ें, लेकिन व्यावहारिक सच्चाई यही है कि किसी बात में वजन तभी आता है, जब हमारी उस बात में जरूरी तथ्य या फैक्ट हों। हमारी किसी बात को सामने वाला तभी सहजता से मान या स्वीकार लेता है, जब हम जो बात कहना चाहते हैं, उसके पक्ष में कई प्रभावशाली तथ्य या फैक्ट रखें। चाहे स्कूल, कॉलेज में पढ़ाई का दौर हो या कैरियर के लिए परीक्षाओं का सिलसिला हो अथवा प्रमोशन पाने की बात- हर कदम में तथ्य या फैक्ट हमारे बहुत काम आते हैं। जब हम पढ़ाई के दौरान सवालों के जवाब तथ्यपूर्ण ढंग से लिखते हैं या पूछे जाने पर उन्हें तथ्यपूर्ण तरीके से बताते हैं तो परीक्षा लेने वाले या प्रश्न पूछने वाले पर हमारा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और हम परीक्षा पास कर लेते हैं। यही बात कार्यस्थल पर लागू होती है कि जब हम किसी समस्या का विश्लेषण तथ्यों के आधार पर कर रहे होते हैं तो ज्यादा स्वीकार्य और प्रभावशाली तरीके से हम कह पाते हैं। इन सब बातों के लिए जरूरी है कि हमारे पास अपनी कही बात के पक्ष में तर्क या फैक्ट होने चाहिए। इसलिए अपनी विश्लेषण क्षमता को बढ़ाने के लिए हर बात को तथ्यात्मक तरीके से कहें और हर मामले के तथ्यों को याद रखने की कोशिश करें।

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समीक्षा करना

चाहे हम कोई किताब पढ़ें, कोई समस्या सुनें, कोई लक्ष्य निर्धारित करें, सबके लिए जरूरी होता है कि हम अपने उद्देश्य को पाने के लिए पहले लक्ष्य की ईमानदारी से समीक्षा करें। अगर हम किसी किताब को पढ़ने के बाद उसकी एक समीक्षा नहीं करते तो वह किताब हमारे जहन में कभी नहीं रहेगी। जरूरी नहीं कि हम ये समीक्षा, तभी करें, जब हमें ऐसा करने के लिए कहा जाए। सच्चाई तो यह है कि हमें हर समय उन सभी सवालों की समीक्षा करते रहना चाहिए, जिनसे हमें गुजरना होता है। अगर हम बचपन से ही समीक्षा करने की कला सीख जाएं तो हम अपने पढ़े हुए, सुने हुए को या अपने देखे हुए की अच्छी तरह से समीक्षा कर सकते हैं।

हमारी सोच का एक फॉर्मेट हो

यह इसलिए जरूरी है, क्योंकि किसी भी बात को हम अपने दिमाग में तभी रख सकते हैं जब उसका एक निश्चित फॉर्मेट हो। दरअसल हमारा दिमाग किसी चीज को किसी फॉर्मेट में ही रिसीव करता है और उसे किसी फॉर्मेट में ही अपने पास संरक्षित रखता है व फॉर्मेट में ही रिलीज भी करता है। सिर्फ परीक्षाओं में ही नहीं, हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में भी चीजों को किसी फॉर्मेट में नहीं समझेंगे या लोगों को किसी फॉर्मेट में नहीं समझाएंगे तो हमें मुश्किल होगी। जब हम चीजों को एक फॉर्मेट में स्वीकार करने की अपने अंदर कला विकसित कर लेते हैं, तो हमारी विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ जाती है जो हमारे बहुत काम आती है। -इ.रि.सें.

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