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मानव के अस्तित्व से जुड़ा बेजुबानों का संरक्षण

07:27 AM Oct 04, 2023 IST
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योगेश कुमार गोयल

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पशुओं के कल्याण मानकों में सुधार को लेकर दुनियाभर में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 4 अक्तूबर को ‘विश्व पशु कल्याण दिवस’ मनाया जाता है। यह एक ऐसी वैश्विक पहल है, जिसका प्रमुख उद्देश्य पशु कल्याण के लिए बेहतर मानक सुनिश्चित करना है। विश्व पशु दिवस पहली बार सिनोलॉजिस्ट हेनरिक जिमर्मन की पहल पर जर्मनी के बर्लिन में 24 मार्च, 1925 को पशु कल्याण के बारे में जागरूकता फैलाने के मकसद से मनाया गया था। पशुओं की लुप्तप्राय प्रजातियों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए इटली के फ्लोरेंस में 1931 में आयोजित पारिस्थितिकी विदों के सम्मेलन में विश्व पशु दिवस मनाने के लिए प्रतिवर्ष 4 अक्तूबर को ही चुना गया था। यह कार्यक्रम सेंट फ्रांसिस ऑफ़ असीसी के पर्व के साथ रखा गया था। वर्ष 2003 में पहली विश्व पशु दिवस वेबसाइट यूके स्थित पशु कल्याण चैरिटी नेचर वॉच फाउंडेशन द्वारा लांच की गई थी। इस दिन को पशु प्रेमी दिवस के रूप में भी जाना जाता है क्योंकि यह पशु अधिकारों को बढ़ावा देने वाले व्यक्तियों एवं संगठनों का समर्थन करके जानवरों के प्रति प्यार, देखभाल और सुरक्षा को प्रोत्साहित करता है।
दरअसल, पशु मानव जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो न केवल हमारी जिंदगी को समृद्ध बनाते हैं बल्कि हमें बेहतर इंसान भी बनाते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में सभी जानवर पारिस्थितिकीय संतुलन, पर्यावरण की रक्षा करने और मानव स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में भी समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मनुष्य और पशु न केवल एक-दूसरे पर निर्भर हैं बल्कि एक-दूसरे के पूरक भी हैं। सही मायनों में दोनों का अस्तित्व ही खुशहाली का प्रतीक है और यदि जंगल से किसी एक जीव की प्रजाति भी लुप्त होती है तो उसका असर सम्पूर्ण पर्यावरण पर पड़ता है।
विश्व पशु दिवस विश्वभर में कल्याण मानकों के मिशन के साथ जानवरों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक ऐसा सामाजिक आन्दोलन है, जो प्रतिवर्ष एक निर्धारित थीम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष इस दिवस का विषय है ‘ग्रेट ऑर स्मॉल, लव दैम ऑल’ यानी पशु चाहे छोटे हों या बड़े, हम उन सभी से प्यार करें।
भारत में करीब 70 फीसदी आबादी कृषि तथा कृषि संबंधी व्यवसायों पर निर्भर है। प्राचीन काल से ही पशुपालन और कृषि व्यवसायों का आपस में गहरा संबंध रहा है। गरीब परिवारों के लिए तो पशुधन ग्रामीण मुद्राएं हैं, जो खासकर गरीब परिवारों के लिए बीमा विकल्प के रूप में भी कार्य करता है। दरअसल, यह उनके लिए ऐसी सम्पत्ति है, जिसे संकट के समय बेचा जा सकता है। यही कारण है पालतू पशुओं को ‘पशुधन’ कहा जाता है।
मानव और पशुओं के आपसी संबंध मानव जीवन के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि पशुओं का मानवीय समाज में विभिन्न रूपों में योगदान होता है। पशुओं के साथ रहने से हमें स्वाभाविक संवेदनशीलता, प्यार, सहयोग और उन्नति का अनुभव होता है। बहुत से पशु-पक्षी तो ऐसे हैं, जो यदि धरती पर नहीं हों तो पृथ्वी पर मनुष्य का जीना ही मुश्किल हो जाएगा। गाय, भैंस, बैल, गधे, घोड़े से लेकर कुत्ते-बिल्ली तक सभी पशु किसी न किसी रूप में मनुष्यों के सहायक हैं। इसी तरह पक्षी व कीट भी हैं। गिलहरी को प्राकृतिक माली कहा जाता है। ऊदबिलाव तालाबों तथा बांधों में जमीन की नमी एवं हरियाली बनाए रखकर वेटलैंड का निर्माण करते हुए कार्बन डाइऑक्साइड का पर्याप्त भंडारण करते हैं। चमगादड़ एक प्राकृतिक कीटनाशक जीव माना गया है, जो खेती-बाड़ी के लिए हानिकारक एक हजार से भी ज्यादा कीड़े-मकोड़े खा जाता है, मच्छरों को नहीं पनपने देता और इस प्रकार कृषि, उसमें उपयोगी जानवरों तथा दुधारू पशुओं की बीमारियों से रक्षा करता है।
हाथी और गैंडे कीचड़ में रहकर दूसरे जानवरों के पीने के लिए किनारे पर पानी का इंतजाम करते हैं। हाथी जमीन को उपजाऊ बना सकता है जबकि गैंडा कीचड़ में रहकर मिट्टी की अदला-बदली का काम करता है और प्रतिदिन करीब पचास किलो वनस्पति की खुराक होने से यह जंगल में कूड़ा-कर्कट नहीं होने देता। उसके शरीर पर फसल के लिए हानिकारक कीड़े जमा हो जाते हैं, जो पक्षियों का भोजन बनते हैं और इस प्रकार गैंडे प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।
मानव जाति को यह समझना होगा कि पशुओं का जीवन किसी भी तरह से हमारे जीवन से कम कीमती नहीं है। जैव विविधता के जनक के नाम से विख्यात हार्वर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व जीव विज्ञानी और पुलित्जर पुरस्कार विजेता ईओ विल्सन के अनुसार पृथ्वी पर प्रत्येक प्रजाति अत्यधिक देखभाल एवं प्रतिभा के साथ बनाई गई उत्कृष्ट कृति है। वन्यजीव फोटोग्राफर और ‘जॉय ऑफ बीयर्स’ सहित कुछ पुस्तकों की लेखिका सिल्विया डोल्सन कहती हैं कि हमारी ही तरह जानवर भी प्यार, खुशी, डर और दर्द महसूस करते हैं लेकिन वे बोले गए शब्द की प्रतिक्रिया नहीं दे पाते। हमारा दायित्व है कि हम उनकी ओर से बोलें और सुनिश्चित करें कि उनकी भलाई, जीवन का सम्मान एवं सुरक्षा हो। इसके लिए प्रकृति और पशुओं के साथ अपने संबंधों में मनुष्य को सभ्य बनाना आवश्यक है।

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