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जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती अंगारकी विनायक चतुर्थी

11:23 AM Jul 08, 2024 IST
जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती अंगारकी विनायक चतुर्थी
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भगवान गणेश ज्ञान, गुण और ज्ञान के अवतार हैं जो स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और खुशी प्रदान करते हैं। इस शुभ दिन पर शुद्ध अंतर्मन और आत्मा से प्रार्थना करने से साधक की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।

राजेंद्र कुमार शर्मा
एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्नहर्ता, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष या गणपति, भालचंद्र, गजानन आदि-आदि नाम दिए गए हैं महादेव पुत्र भगवान श्री गणेश जी को। उनकी विशेषताओं के कारण ये नाम दिए गए हैं, जो सकारात्मकता से भरे हुए हैं और इन नामों के स्मरण मात्र से ही व्यक्ति का रोम-रोम सकारात्मकता से भर उठता है। इसी सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में व्यक्ति के सभी प्रयास स्वत: ही सफल हो जाते है। ईश्वर वंदना के पीछे का पराविज्ञान भी यही कहता है।
हिंदू धर्म में महादेव पुत्र, ज्ञान के देवता, सदैव कल्याणकारी भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। कोई भी पवित्र और शुभ अनुष्ठान गणपति जी को मनाने के बिना शुरू नहीं किया जाता। ऐसी मान्यता है कि किसी भी शुभ कार्य का शुभारंभ यदि विघ्नहर्ता भगवान गणेश जी की पूजा-अर्चना से किया जाता है तो वह कार्य अवश्य ही सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।
संकष्टी और विनायक चतुर्थी :
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, संकष्टी और विनायक चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित एक शुभ त्योहार है। ‘संकष्टी’ एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है मुक्ति या कठिन और बुरे समय से मुक्ति और संस्कृत के अनुसार, ‘विनायक’ शब्द का अर्थ है, नेतृत्व के सभी गुणों से संपन्न। कृष्ण पक्ष में आने वाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी और शुक्ल पक्ष में आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं।
संकष्टी चतुर्थी का व्रत विघ्नों से मुक्ति के लिए किया जाता है और विनायक चतुर्थी का व्रत भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए किया जाता है। संकष्टी चतुर्थी संकटहरा (संकट हरने वाली) चतुर्थी है तथा विनायक चतुर्थी, वरद विनायक (वरदान देने वाली) चतुर्थी के रूप में प्रसिद्ध है।
विशेष है विनायक चतुर्थी
आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 9 जुलाई को प्रातः काल होगा और इसका समापन अगले दिन 10 जुलाई को प्रातः होगा। यह चतुर्थी शुक्ल पक्ष में आ रही है अर्थात‍् यह विनायक चतुर्थी है, जो मंगलवार को आ रही है। ऐसे में विनायक चतुर्थी को ‘अंगारकी विनायक चतुर्थी’ के योग बन रहे हैं। इस दिन की शुभता इसलिए भी और बढ़ जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने अपने पुत्र गणेश को सभी देवताओं में श्रेष्ठ घोषित किया था। उन्हे गणपति और विनायक की उपाधि प्राप्त हुई।
अंगारकी विनायक चतुर्थी का महत्व
भगवान गणेश ज्ञान, गुण और ज्ञान के अवतार हैं जो स्वास्थ्य, सुख समृद्धि और खुशी प्रदान करते हैं। इस शुभ दिन पर शुद्ध अंतर्मन और आत्मा से प्रार्थना करने से साधक की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं।
मान्यता है कि, विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना करने और व्रत रखने से भगवान गणेश की कृपा और आशीर्वाद प्राप्त होता है और साधक के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है। साथ ही साधक को जीवन मे आने वाले विघ्न, कष्टों और संकटों से मुक्ति मिल जाती है। यह व्रत साधक के जीवन की सभी बाधाओं को हटा कर, सफलता प्रदान करता है।
उपवास और अनुष्ठान
भक्त प्रातः काल स्नानादि से निवृत्त होकर, श्रद्धा और भक्ति के साथ सुबह से शाम तक उपवास रखते हैं। अनुष्ठान की शुरुआत गणेश मंत्र के जाप और व्रत कथा को पढ़ने-सुनने से होती है। गणेश पूजन के बाद, चंद्र देव के दर्शन किए जाते हैं। भगवान गणेश जी को उनकी पसंद का मोदक और लड्डू का प्रसाद चढ़ाया जाता है। गणपति बप्पा से सर्वमंगल, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा जाता है।

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