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मानव तस्करी पर अंकुश

04:00 AM Mar 28, 2025 IST
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हरियाणा विधानसभा के मौजूदा सत्र में कई महत्वपूर्ण विधायी पहल हुई हैं, जो एक लोककल्याणकारी सरकार की प्राथमिकताएं सुनिश्चित करती हैं। इसमें किसानों को नकली इनपुट से सुरक्षा कवच देना भी सराहनीय कदम रहा है। वहीं हाल ही में सुनहरे भविष्य की आकांक्षा लेकर विदेश जाने वाले युवाओं की हितरक्षा में उठाये गए कदम निश्चय ही सराहनीय हैं। हरियाणा के मौजूदा विधानसभा सत्र में हरियाणा ट्रैवल एजेंट पंजीकरण और विनियमन विधेयक, 2025 पारित किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम है, जो वक्त की सख्त जरूरत भी थी। ट्रैवल एजेंसियों के पंजीकरण को अनिवार्य करना और उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान उम्मीद जगाता है कि अब विदेश जाने वाले लोगों के साथ होने वाली धोखाधड़ी पर अंकुश लग सकेगा। इस कानून का उल्लंघन करने पर सात साल की कैद और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। निश्चित रूप से सरकार ने अपने नागरिकों को धोखे और मानव तस्करी से बचाने के लिये एक आवश्यक कदम उठाया है। लगातार होने वाले आव्रजन घोटालों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि के मद्देनजर, इस कानून की लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी। लेकिन जहां सख्त कानून का सही ढंग से क्रियान्वयन इस दिशा में सफलता सुनिश्चित करेगा, वहीं इसके लिये जन जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत है। साथ ही प्रभावी प्रवर्तन के साथ ही यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि लोग अनधिकृत एजेंटों के चक्रव्यूह में न फंसें। वास्तव में यह विधेयक एक महत्वपूर्ण कदम तो है, लेकिन इसे बेरोजगारी को दूर करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा भी होना चाहिए। यदि हम राज्य के युवाओं के लिये अपने देश में बेहतर रोजगार के अवसर पैदा कर सकें तो युवाओं को फिर अपने सपने पूरे करने के लिये विदेश जाने की जरूरत ही नहीं होगी। निस्संदेह, कोई भी व्यक्ति अपना घर-परिवार, अपना धार्मिक-सांस्कृतिक परिवेश छोड़कर परदेश नहीं जाना चाहता। लेकिन जब आकांक्षाओं के अनुरूप रोजगार के अवसर नहीं मिलते तो ही वह मजबूरी में विदेश जाने की लालसा रखता है।
यह एक निर्विवाद सत्य है कि बेहतर रोजगार की स्थितियां हमारे शैक्षिक वातावरण पर भी निर्भर करती हैं। यदि हम परंपरागत शिक्षा से इतर रोजगार व कौशल विकास की शिक्षा को अपनी प्राथमिकता बनाएं तो स्थिति बदल सकती है। इसके लिये जरूरी है कि राज्य में रोजगारपरक शिक्षा के अनुकूल वातावरण बनाया जाए। इस दिशा में गंभीर प्रयासों की सख्त जरूरत है। उम्मीद की जा रही थी कि विधानसभा सत्र में राज्य में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिये उत्साहजनक पहल की जाएगी। इस मुद्दे को प्राथमिकताओं में शामिल करके इस बार गंभीर बहस होगी। दरअसल, हाल के दिनों में कई स्कूलों के भवनों की स्थिति व सुरक्षा आदि को लेकर अभिभावक चिंता जताते रहे हैं। हर अभिभावक चाहता है कि सरकारी स्कूलों में बेहतर साफ-सफाई, शौचालयों और पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध रहें। दरअसल, देखने में आया है कि कई ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में छात्रों की संख्या जितनी अधिकता में है, उस अनुपात में शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान तो खींचा, लेकिन अन्य राजनीतिक मुद्दों में उलझाव के चलते शिक्षा के मुद्दे पर वैसे गंभीर बहस नहीं हो पायी , जैसी अपेक्षित थी। वैसे सरकार की तरफ से इस बाबत प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बजट आवंटन और भविष्य में सुधार का आश्वासन तो दिया गया, लेकिन इन वायदों का हकीकत में बदलना भी उतना ही जरूरी है। ये नौकरशाही का भी दायित्व बनता है कि छात्र सुरक्षित परिस्थितियों में अध्यापन करें। निस्संदेह, नौकरशाही की अक्षमताएं प्रगति के मार्ग में बाधा बनती हैं। जरूरत इस बात की भी है कि हमारी शिक्षा वक्त की जरूरतों के साथ जुड़ी हो। ताकि छात्र विदेशों में रोजगार तलाशने की बजाय अपने रोजगार खुद सृजित कर सकें। यह तभी संभव है जब हमारी शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन होगा। शिक्षा व्यवस्था छात्र छात्राओं की मौलिक प्रतिभा का न केवल विकास करे, बल्कि उसका संवर्धन भी करे। भारत युवाओं का देश है। युवाओं की क्षमताओं व योग्यता का न्यायसंगत उपयोग होना चाहिए।

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