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नकली पर नकेल

04:00 AM Mar 22, 2025 IST
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लंबे समय से हरियाणा के किसान घटिया बीज व कीटनाशक बाजार में बेचे जाने के आरोप लगाते रहे हैं। जिसके चलते उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। एक तो इस बाबत बने कानून सख्त नहीं थे। वहीं निगरानी करने वाले तंत्र की काहिली भी मिलावटी कृषि इनपुट बेचने वालों के हौसले बुलंद कर रही थी। इस दिशा में हरियाणा सरकार ने सार्थक पहल की है। हरियाणा सरकार ने बीज अधिनियम, 1966 और कीटनाशक अधिनियम, 1968 में संशोधन करके नकली उत्पाद बेचने वाले अपराधी तत्वों पर नकेल कसने की कोशिश की है। निश्चय ही घटिया कृषि उत्पादों को रोकने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। दरअसल, नकली बीजों और घटिया कीटनाशकों के कारण किसानों को भारी नुकसान होने की रिपोर्ट बार-बार आ रही थी। जिसके आलोक में यह कदम सरकार ने उठाया है। इस सार्थक पहल में कड़े प्रावधानों के जरिये ऐसे अपराध को संज्ञेय और गैर जमानती बनाया गया है। यदि कोई व्यक्ति बार-बार ऐसा अपराध करता पाया जाता है तो उसके लिये सजा को कड़ा किया गया है। उल्लेखनीय है कि कई बार ऐसी करतूत करने वालों के लिये तीन साल की कैद और पांच लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि पुराने कानून में सिर्फ पांच सौ रुपये से कम का जुर्माना निर्धारित था। जिसके चलते अपराधियों में किसी तरह का कानून का डर नहीं रह गया था। जिसके चलते कानून ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने में सक्षम नजर नहीं आ रहा था। उल्लेखनीय है कि सख्त कानून के अभाव और नियामक तंत्र की कोताही के चलते लंबे समय से किसान ठगी के बाजार का खामियाजा भुगत रहे थे। हाल का एक चौंकाने वाला मामला टोहाना में प्रकाश में आया, जिसमें नकली कीटनाशकों के छिड़काव के चलते 60 एकड़ के खेतों में खड़ी धान की फसल नष्ट हो गई थी।
इस प्रकार के नुकसान के स्तर से पता चलता है कि धांधली किस स्तर पर की जा रही है। वहीं दूसरी ओर सिरसा में भी ऐसा ही मामला प्रकाश में आया था, जहां किसानों को बिना उचित लेबलिंग के नकली उत्पाद बेचकर धोखा दिया गया। ये घटनाएं इस बात की आवश्यकता बता रही थी कि सरकार इस दिशा में तत्काल हस्तक्षेप करे। निश्चित रूप से नकली उत्पादों की बिक्री से किसानों को होने वाला नुकसान चौंकाने वाला है। वहीं दूसरी ओर किसानों द्वारा लाखों रुपये नुकसान होने पर जब रिपोर्ट दर्ज करायी जाती थी तो अकसर अपराधी मामूली दंड के साथ बच निकलते थे। उनकी धांधली की गतिविधियां फिर दूसरी जगह शुरू हो जाती थी। यही वजह थी कि पीड़ित किसानों को पर्याप्त मुआवजा या कोई अन्य सहारा नहीं मिल पाता था। लेकिन इसके साथ यह भी स्पष्ट है कि सिर्फ सख्त कानूनी प्रावधान ही इस तरह की मिलावटी कीटनाशकों व बीजों की बिक्री पर रोक लगाने में सक्षम होंगे, इस बात में संदेह हैं। इसके लिए जरूरी है कि औचक निरीक्षण और बेहतर शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए। साथ ही कृषि विभाग के अधिकारियों की भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। न्यायपालिका को भी इन नकली कृषि इनपुट बेचने वाले अपराधियों के मामले में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करनी चाहिए। तभी ऐसे अपराधियों को कानून की खामियों का फायदा उठाने से रोका जा सकता है। वहीं दूसरी ओर किसानों को जागरूक करने के लिये पूरे हरियाणा में मुहिम चलाने की जरूरत है। दरअसल, यह भी एक हकीकत है कि बाजार में विश्वसनीय विकल्पों की कमी के कारण कई किसान अभी भी फर्जी विक्रेताओं के झांसे में आ जाते हैं। राज्य सरकार के बजट में हर जिले में बीज परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। जो कि एक स्वागत योग्य कदम है। इसके अलावा कृषि उत्पाद बेचने वाले डीलरों को लेकर भी सतर्कता बरतने की जरूरत है। इसमें सख्त लाइसेंसिंग नियम मददगार हो सकते हैं। निश्चित रूप से नकली बीजों और कीटनाशकों पर कार्रवाई सिर्फ कानून तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। इस पहल से देश को खाद्यान्न उपलब्ध कराने वाले किसान को वास्तविक सुरक्षा देना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

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