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07:44 AM May 17, 2024 IST
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पीओके की बदहाली

बुनियादी जरूरत की कमी की पीड़ा भुगत रहे गुलाम कश्मीर में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। हिंसा पर उतरे लोग अगर पाकिस्तान से आजादी के नारे लगा रहे हैं तो इसका एक बड़ा कारण कश्मीर घाटी में लोकतंत्र की बयार के साथ ही हालात तेजी से अनुकूल होना है। धारा 370 हटाने के बाद घाटी में बदलाव आया उसे दुनिया ने देखा है। लोग अपेक्षाकृत स्वतंत्र, सुरक्षित और शांतिपूर्वक जीवन जी रहे हैं। गुलाम कश्मीर के लोग जिस तरह आटे और बिजली के लिए तरस रहे हैं उससे हालातों की गंभीरता समझी जा सकती है। अब समय आ गया है वहां के लोगों की मदद करने का।
अमृतलाल मारू, इंदौर, म.प्र.

सेहत से खिलवाड़

पंद्रह मई के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘पौष्टिकता के भ्रम’ बाजार में बिकने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों में पौष्टिकता के नाम पर निर्धारित मापदंडों से अधिक शुगर, वसा तथा कैलोरी मिलने का तथा भ्रामक प्रचार का भंडाफोड़ करने वाला था। विक्रेता डिब्बाबंद पेय तथा खाद्य पदार्थ के डिब्बों पर ऐसी जगह और इस तरह जानकारी लिखवाते हैं कि आम आदमी को इसका पता भी न चल सके। यह सारा धंधा उन्हीं लोगों की सांठगांठ से होता है जिन पर इसे रोकने की जिम्मेदारी होती है। यह सरासर लापरवाही तथा लोगों की सेहत से खिलवाड़ है।
शामलाल कौशल, रोहतक

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परिवार संवारिए

हर वर्ष पंद्रह मई को अंतर्राष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। परिवार का क्या महत्व है, इसकी अहमियत हमारे देश में बहुत ज्यादा है। अफसोस की बात है कि आज भारत में परिवार टूट रहे, हैं। भौतिकतावाद और आधुनिकता की अंधी दौड़ में इंसानी रिश्तों में मिठास कम होती जा रही है। परिवारों के टूटने से देश में कई समस्याओं का भी जन्म हुआ है। देश के भावी बच्चों में संस्कारों की कमी का कारण टूटते परिवार ही हैं।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर

संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशनार्थ लेख इस ईमेल पर भेजें :- dtmagzine@tribunemail.com

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