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आपकी राय

06:41 AM Jan 13, 2024 IST
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उ.प्र. की राजनीति

उ.प्र. की राजनीतिक उठापटक एक बार फिर देश की राजनीति केंद्र में आ गई है। सपा, बसपा, भाजपा एवं कांग्रेस की जोर-आजमाइश देखने को मिल रही है। भाजपा ने 2019 के चुनाव में 64 सीटे जीती थीं। इंडिया गठबंधन भी पूरी ताकत से चुनाव लड़ने का मन बना चुका है। लेकिन सबसे बड़ा पेच 80 सीटों पर फंसा हुआ है। बहुजन समाज पार्टी ने इस बार अकेले चुनाव लड़ने का फैसला कर लिया है। हालांकि कांग्रेस के प्रयास जारी है कि इंडिया गठबंधन में बसपा भी शामिल हो। यदि बीएसपी अकेले चुनाव लड़ती है तो इंडिया गठबंधन के हाथ बाजी नहीं लगने वाली है।
वीरेंद्र कुमार जाटव, दिल्ली

तीर्थाटन से आय

पर्यटक अब गोवा से अधिक बनारस जा रहे हैं। उज्जैन महाकाल लोक बनने के बाद धार्मिक पर्यटकों ने प्रतिदिन लाखों की संख्या में आना शुरू कर दिया है। इससे तीर्थ का महत्व तो बढ़ा ही है वहां के रोजगार में भी वृद्धि हुई है। ऐसे ही अयोध्या में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। निश्चित रूप से आस्था के ऐसे स्थान पर्यटन की दृष्टि से रोजगार और राज्य की आर्थिकी को मजबूती प्रदान करते हैं।
विभूति बुपक्या, खाचरोद, म.प्र.

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इंदौर से सीखें

इंदौर इस वर्ष भी स्वच्छता अभियान में नंबर एक पर रहा। चंडीगढ़ ने दसवीं रैंक हासिल की, जो पिछले वर्ष की तुलना में एक रैंक अच्छी रही। इंदौर में डोर टू डोर कचरा उठाना, वेस्ट सेग्रीगेशन और वेस्ट मैनेजमेंट ने उसे नंबर एक स्थान पर जगह बनाने दी। चंडीगढ़ में इन व्यवस्थाओं के अभाव से कभी ‘सिटी ब्यूटीफुल’ कहा जाने वाला शहर आज कचरे के निपटान की समस्या से जूझ रहा है।
अभिलाषा गुप्ता, मोहाली

लोहड़ी की सार्थकता

उत्तर भारत का प्रसिद्ध त्योहार लोहड़ी हमें बुराई और बुरे कामों की राह पर न जाने का संदेश देता है। समय और आधुनिकता की भागमभाग से त्योहारों का रंग कुछ फीका हुआ है। मगर यह जरूरी है कि युवा और भावी पीढ़ी को हरेक त्योहार के महत्व को समझाया जाए, ताकि हमारा कोई भी त्योहार विलुप्त न हो।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर

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