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मतदाताओं की खामोशी से राजनीतिक दलों में बेचैनी

11:34 AM May 01, 2024 IST
मतदाताओं की खामोशी से राजनीतिक दलों में बेचैनी
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रमेश सरोए/हप्र
करनाल, 30 अप्रैल
हरियाणा की सबसे हॉट संसदीय सीट करनाल पर रोचक मुकाबला बनता जा रहा है। यहां से भाजपा उम्मीदवार और पूर्व सीएम मनोहर लाल के चुनावी रण में आते ही इस सीट पर पूरे प्रदेश ही नहीं, आसपास के राज्यों के लोगों की भी नज़रें लग गईं। कांग्रेस ने युवा कार्ड चलते हुए यूथ कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं इनेलो के समर्थन से एनसीपी नेता वीरेंद्र मराठा चुनावी रण में उतर चुके हैं।
मराठा के मैदान में आने के बाद करनाल में त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार बन गए हैं। मनोहर लाल को ‘हेवीवेट’ माना जा रहा है। साथ ही, करीब साढ़े नौ वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे मनोहर लाल की साफ-सुथरी ‘इमेज’ को भाजपा सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट मान रही है। चुनावी माहौल किस ओर रुख कर ले, इस बारे में कोई भी स्पष्ट रूप से कह पाने की स्थिति में नहीं है। जहां सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा होने से पहले तक भाजपा, कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा था। वहीं अब मतदाताओं के बीच परिवर्तन दिखाई देने लगा है।
भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को लोकसभा प्रत्याशी घोषित कर सीट पर 2014 ओर 2019 की तरह ही तगड़ी दावेदारी पेश की है। 2014 के विधानसभा चुनावों में जब मनोहर लाल प्रत्याशी बनकर आए तो करनाल के लोगों के लिए वे बिल्कुल नया चेहरा थे। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी नजदीकी का आभास जल्द ही इलाके के लोगों को हो गया। इसका यह फायदा यह हुआ कि करनाल करीब साढ़े नौ वर्षों तक सीएम सिटी बना रहा।
करनाल को सीएम सिटी बनाए रखने के लिए ही करनाल हलके में होने वाले उपचुनाव में सीएम नायब सिंह सैनी को चुनाव लड़वाया जा रहा है। हालांकि लोगों के बीच लोकल बनाम बाहरी का मुद्दा भी चर्चाओं में बना हुआ है। भाजपा के 10 सालों की कथित एंटी-इन्कमबेंसी का फायदा कांग्रेस उठाने की फिराक में है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के नेताओं को एकजुट करना है। दिव्यांश बुद्धिराजा को टिकट मिलने के बाद इस एरिया में कांग्रेसियों की गुटबाजी साफ देखने को मिल रही है।
बुद्धिराजा के कार्यक्रमों से कई वरिष्ठ नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दूरी बनाई हुई है। वहीं इलाके के मतदाताओं की खामोशी ने तीनों ही राजनीतिक दलों के नेताओं में बेचैनी बढ़ा दी है। वोटर खुलकर कुछ भी नहीं बोल रहे हैं। सबसे अधिक चिंता साइलेंट वोटर की ही चुनावों में रहती है। भाजपा सीट को 2014 और 2019 में मिली जीत को बरकरार रखने के साथ-साथ देश में सबसे ज्यादा मार्जन से जीतने के लिए राजनीतिक समीकरणों के साथ धुंआधार चुनावी प्रचार कर रही है।
कांग्रेस ने हार का दाग मिटाने को युवा चेहरे पर लगाया दांव
कांग्रेस पार्टी ने पिछले 2 चुनावों में भाजपा के हाथों मिल रही करारी शिकस्त का दाग मिटाने के लिए युवा चेहरे पर दांव लगाया है। एनसीपी नेता मराठा वीरेंद्र वर्मा सीट पर बदले राजनीतिक समीकरणों को अपने पक्ष में देख रहे हैं। इसकी वजह से सीट पर जीत का मजबूती से दावा ठोका हैं। मराठा वीरेंद्र ने इंडिया गठबंधन के तहत भी करनाल से चुनाव लड़ने की कोशिश की थी लेकिन कांग्रेस ने उन्हें टिकट देने की बजाय दिव्यांशु पर विश्वास जताया। मराठा वीरेंद्र की इस बेल्ट में अच्छी पकड़ मानी जाती है।

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