Local Body Elections: दिग्गज नेता लड़ सकते हैं मेयर,चेयरमैन का चुनाव
चंडीगढ़, 9 दिसंबर/दिनेश भारद्वाज : हरियाणा की सत्तारूढ़ भाजपा अब शहरी स्थानीय निकाय चुनावों (Local Body Elections) की तैयारियों में जुट चुकी है। अंदरखाने सभी तैयारियां की जा रही हैं। सीएमओ (मुख्यमंत्री कार्यालय) के अधिकारी भी इस काम में जुटे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों पर शहरों में विकास योजनाओं का प्रारुप तैयार किया जा रहा है। वे शहर एजेंडे में टॉप पर रहेंगे, जिनके चुनाव होने हैं।
Local Body Elections-8 नगर निगम, 4 नगर परिषद और 22 नगर पालिकाओं में
8 नगर निगमों के अलावा चार नगर परिषद और 22 नगर पालिकाओं का कार्यकाल पूरा हो चुका है। इन चुनावों में हो रही देरी का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है। हाईकोर्ट के नोटिस के बाद सरकार की ओर से जवाब में आश्वासन दिया गया कि 4 फरवरी तक निकायों के चुनाव सम्पन्न करवा लिए जाएंगे।
प्रबल संभावना है कि जनवरी के आखिरी या फरवरी के पहले सप्ताह में ये चुनाव हो सकते हैं। इसके लिए जनवरी में ही कार्यक्रम भी जारी किया जा सकता है। विधानसभा के बजट सत्र से पहले-पहले सरकार शहरों में ‘स्थानीय सरकार’बनाने के पक्ष में है।
भाजपा स्थानीय निकाय प्रकोष्ठ पदाधिकारियों की सूची जारी
निगम में मेयर तथा परिषद व पालिका में चेयरमैन के होंगे डायरेक्ट चुनाव
इसके अलावा ( besides) नगर निगम में मेयर तथा नगर परिषद व नगर पालिकाओं में चेयरमैन के डायरेक्ट चुनाव होंगे। मनोहर सरकार के समय ही नियमों में बदलाव करके डायरेक्ट चुनाव शुरू करवाए गए थे। भाजपा निकाय के चुनाव पार्टी सिम्बल पर लड़ती है। वहीं प्रमुख विपक्षी दल –कांग्रेस केवल नगर निगम में ही सिम्बल पर अपने उम्मीदवार उतारती है। नगर परिषद और नगर पालिका के चुनावों में कांग्रेस सिम्बल पर चुनाव नहीं लड़ती।
मजबूत चेहरों पर खेलेगी दांव
पिछले दिनों पंचकूला में दो दिनों तक हुई मैराथन बैठकों में मुख्यमंत्री व संगठन के वरिष्ठ नेता इन चुनावों के लिए रणनीति भी तय कर चुके हैं। भाजपा ने निगमों में मेयर तथा नगर परिषद और नगर पालिका में चेयरमैन पद के उम्मीदवारों को लेकर अभी से काम शुरू कर दिया है। मजबूत चेहरों पर मंथन भी शुरू हो चुका है। माना जा रहा है कि मेयर और चेयरमैन पद के लिए वरिष्ठ नेताओं को भी चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है।
विस चुनाव में टिकट के दावेदार Local Body Elections में अहम
सूत्रों का कहना है कि निगमों में मेयर पद के लिए ऐसे नेताओं को भी चुनाव लड़वाया जा सकता है, जो विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। नगर निगम में मेयर के पद को प्रोटोकॉल में विधायक व सांसद से भी ऊपर रखा जाता है। ऐसे में विधानसभा चुनाव में टिकट वे वंचित रहने वाले नेताओं की भी नजर अब नगर निगम पर लगी है। विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा के कई वार्ड पार्षदों ने खुलकर कांग्रेस का साथ दिया था।
कांग्रेस की मदद करने वाले पार्षदों को इस बार टिकट नहीं देगी भाजपा
माना जा रहा है (meanwhile) कि इस बार ऐसे पार्षदों की टिकट भाजपा काट सकती है। हालांकि इनमें से कई पार्षद ऐसे भी हैं, जो भाजपा की लगातार तीसरी बार सरकार बनने के बाद वापस लौट भी आए हैं।
नये चेहरों पर लग सकता है दांव
सूत्रों का कहना है कि इस बार निकाय के चुनावों में भी भाजपा नये चेहरों पर दांव लगा सकती है। विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने कई मौजूदा विधायकों के टिकट काटकर नये चेहरों को मौका दिया था। पार्टी का यह फार्मूला कामयाब भी रहा। ऐसे में इसे नगर निगम, नगर परिषद और नगर पालिका के चुनावों में भी लागू किया जा सकता है। उन पार्षदों की लिस्ट जिलों के वरिष्ठ नेताओं द्वारा तैयार की जा रही है, जिन्होंने विधानसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ काम किया था।
चुनाव आयोग जुटा Local Body Elections की तैयारियों में
हरियाणा चुनाव आयोग भी निकाय चुनाव की तैयारियों में जुट चुका है। हालांकि इन निकायों में से कई ऐसे हैं, जिनका कार्यकाल पूरा हुए एक साल से भी अधिक समय हो चुका है। लेकिन किसी न किसी वजह से चुनाव लटकते ही जा रहे थे। अब अगले साल के जनवरी या फरवरी माह में चुनाव करवाए जाने की प्रबल संभावना है।
चुनाव आयोग की ओर से (firstly) हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी पंकज अग्रवाल को पत्र लिखकर मतदाता सूचियों की डिटेल मांगी जा चुकी है।
इसलिए सरकार भी जल्द चुनाव के मूड़ में
विधानसभा चुनावों से पहले (at this point) दस वर्षों के कार्यकाल की वजह से सरकार के खिलाफ एंटी-इन्कमबेंसी देखने को मिल रही थी। माना जा रहा है कि इसी वजह से चुनावों में देरी भी हुई। अब 48 विधायकों के साथ पूर्ण बहुमत से भाजपा तीसरी बार सत्ता में आ चुकी है। सरकार इस पॉजिटिव माहौल का फायदा उठा…उठाना चाहेगी।
ऐसे में आयोग को चुनावों की तैयारियों करने के लिए अंदरखाने कहा जा चुका है। सरकार को लगता है कि विधानसभा चुनाव में मिली जीत का फायदा अब निकाय चुनावों में भी मिलेगा।
शहरों में पकड़ और भी बढ़ी
इस बार के विधानसभा चुनावों में भाजपा ( BJP HARYANA) जहां शहरी सीटों पर अपनी पकड़ और मजबूत की है। वहीं पार्टी ग्रामीण इलाकों में भी मजबूत होकर उभरी है। ओल्ड भिवानी जिला की छह में से पांच तथा सोनीपत जिला की छह में से चार और जींद की पांच में से चार सीटों पर जीत हासिल करके भाजपा ने स्पष्ट कर दिया है कि वह गांवों में भी अपना प्रभाव बना चुकी है।
भाजपा को आमतौर पर शहरी पार्टी माना जाता रहा है। लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों ने यह भी संकेत दे दिए हैं कि दस वर्षों की सरकार के दौरान भाजपा ने गांवों में अपने पैर पसारे हैं।
इन निकायों में होने हैं Local Body Elections
प्रदेश में कुल 11 नगर निगम हैं। इनमें से आठ निगमों - गुरुग्राम, फरीदाबाद, मानेसर, हिसार, करनाल, रोहतक, पानीपत व यमुनानगर में चुनाव होने हैं। अंबाला सिटी, पंचकूला और सोनीपत नगर निगम का कार्यकाल 2026 में पूरा होगा। इसी तरह चार नगर परिषदों - अंबाला सदर, पटौदी मंडी, थानेसर और सिरसा में चुनाव होंगे।
जिन 22 नगर पालिकाओं के चुनाव लंबित हैं, उनमें बराड़ा, बवानीखेड़ा, लोहारू, सिवानी, फरुर्खनगर, जाखल मंडी, नारनौंद, बेरी, जुलाना, कलायत, सीवन, पुंडरी, इंद्री, नीलोखेड़ी, अटेली मंडी, कनीना, तावड़ू, हथीन, कलानौर, कालांवाली, खरखौदा व रादौर शामिल हैं।