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यह लोकतंत्र की हत्या : सुप्रीम कोर्ट

08:09 AM Feb 06, 2024 IST
यह लोकतंत्र की हत्या   सुप्रीम कोर्ट
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सीजेआई बोले- स्पष्ट है कि रिटर्निंग अफसर ने मतपत्रों से छेड़छाड़ की, इस व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल से कहा- अपने रिटर्निंग अधिकारी को बतायें कि सुप्रीम कोर्ट उस पर नजर रख रहा है।

सत्य प्रकाश/एस अग्निहोत्री
नयी दिल्ली/मनीमाजरा (चंडीगढ़), 5 फरवरी
चंडीगढ़ मेयर चुनाव में पीठासीन अधिकारी द्वारा मतपत्रों से कथित छेड़छाड़ किये जाने को सुप्रीम कोर्ट ने ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है। भारत के चीफ जस्टिस (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने सोमवार को चुनावी कार्यवाही का एक वीडियो देखने के बाद पीठासीन अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई। उनका प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पीठ ने कहा, ‘कृपया अपने रिटर्निंग अफसर को बताएं कि सुप्रीम कोर्ट उस पर नजर रख रहा है। हम इस तरह लोकतंत्र की हत्या नहीं होने देंगे।... चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता देश में स्थिरता की सबसे बड़ी ताकत है। जो कुछ हुआ उससे हम स्तब्ध हैं... क्या यह एक रिटर्निंग अधिकारी का व्यवहार है? वह कैमरे की ओर देखता है और मतपत्र से छेड़छाड़ करता है। जाहिर है, जहां (मतपत्र पर) नीचे क्रॉस है, वह उसे ट्रे में रख देता है। जब क्रॉस ऊपर की तरफ होता है; वह आदमी मतपत्र से छेड़छाड़ करता है और फिर कैमरे की ओर देखता है कि कौन उसे देख रहा है।... इस व्यक्ति पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए।’ इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने पीठासीन अधिकारी को अपने आचरण पर स्पष्टीकरण देने के लिए 19 फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया।
आम आदमी पार्टी के पार्षद कुलदीप कुमार की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए शीर्ष अदालत ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से मतपत्र, वीडियोग्राफी और अन्य सामग्री सहित चुनाव प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड तलब किया। अदालत ने चंडीगढ़ के उपायुक्त को पूरा रिकॉर्ड सोमवार शाम 5 बजे तक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सौंपने का निर्देश दिया। इसके साथ ही खंडपीठ ने चंडीगढ़ नगर निगम की 7 फरवरी को होने वाली बैठक पर रोक लगा दी।
सॉलिसिटर जनरल मेहता ने दलील दी कि वीडियो में केवल एकतरफा तस्वीर है। उन्होंने आग्रह किया कि अदालत को पूरा रिकॉर्ड देखने के बाद व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिये।
भाजपा ने कम पार्षद होने के बावजूद 30 जनवरी को मेयर चुनाव में कांग्रेस-आप गठजोड़ के खिलाफ जीत हासिल की थी। भाजपा के मनोज सोनकर ने आप के कुलदीप कुमार को हराया था। नतीजों में कहा गया था कि सोनकर को 16 और कुलदीप को 12 वोट मिले हैं, जबकि 8 वोट अवैध घोषित कर दिए गये थे। आप और कांग्रेस का आरोप है कि पीठासीन अधिकारी अनिल मसीह ने उनके 8 मतपत्रों को खुद छेड़छाड़ करके रद्द कर दिया।

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अंतरिम आदेश देने में विफल रहा हाईकोर्ट

मेयर चुनाव को लेकर आप और भाजपा के बीच राजनीतिक लड़ाई बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी। आप पार्षद कुलदीप कुमार ने चुनाव परिणामों पर रोक लगाने से इनकार करने के हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। कुलदीप कुमार ने कहा है कि यह चुनावी विवाद का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक कार्यालय के दुरुपयोग का मामला है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बुधवार को आप को तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए चंडीगढ़ प्रशासन को नोटिस जारी कर 3 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया, हमारा मानना ​​​​है कि चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता की रक्षा के लिए एक उचित अंतरिम आदेश की आवश्यकता थी, जिसे पारित करने में हाईकोर्ट विफल रहा है।

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