निगुलसरी खतरनाक चट्टानों को हटाने का काम शुरू
शिमला, 30 अगस्त (निस)
हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में निगुलसरी के पास बीते 12 अगस्त को हुए भूस्खलन हादसे के बाद हिन्दुस्तान-तिब्बत मार्ग वाहनों की आवाजाही के लिए लगातार खतरनाक बना हुआ है। निगुलसरी में रह-रहकर पहाड़ से चट्टानें गिर रही हैं। ऐसे में इस स्थल को फिर से सुरक्षित बनाने के लिए किन्नौर जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। इसके तहत आज निगुलसरी में भूस्खलन स्थल के ऊपर खतरनाक तरीके से लटकी चट्टानों को गिराने का काम शुरू किया गया है। इस कार्य के चलते आज दिन भर हिन्दुस्तान-तिब्बत मार्ग पर वाहनों के पहिये थमे रहे। किन्नौर के उपायुक्त आबिद हुसैन सादिक के अनुसार पहाड़ पर खतरनाक तरीके से मौजूद चट्टानों को हटाने का कम राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को सौंपा गया है और ये काम अधिशासी अभियंता की देख-रेख में किया जा रहा है। इस कार्य के पहले दिन एनएच की टीम ने मौके पर पहुंचकर खतरनाक चट्टानों का जायजा लिया और इसे गिराने का काम शुरू कर दिया है। इसके चलते आज रात भी हिन्दुस्तान-तिब्बत मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को बंद रखा गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। पहाड़ पर मौजूद सभी खतरनाक चट्टानों को अभी पूरी तरह से नहीं हटाया जा सका है। ऐसे में इस कार्य के लिए फिर से एनएच को वाहनों की आवाजाही के लिए बंद किया जा सकता है।
गौरतलब है कि निगुलसरी में हुए इस भूस्खलन हादसे में अब तक 28 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं जबकि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी भी तीन लोग लापता हैं। घटनास्थल पर अभी भी रह-रहकर चट्टानें गिर रही है जिससे इस मार्ग पर यात्रा करने वालों को जान का जोखिम बना हुआ है। किन्नौर जिला प्रशासन ने इस हादसे के बाद जिले में हो रही भूस्खलन की घटनाओं के अध्ययन के लिए भारतीय भूगर्भ विज्ञान मंत्रालय से भी संपर्क साधा है और अध्ययन के लिए एक टीम भेजने का जिला प्रशासन की ओर से आग्रह किया गया है।