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गर्मी और गर्मी में पानी पिलाने का धर्म

06:53 AM Jun 01, 2024 IST
गर्मी और गर्मी में पानी पिलाने का धर्म
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सहीराम

बहुत गर्मी है जी सचमुच! नहीं, वो वाली गर्मी नहीं जी, जिसको लेकर खम ठोके जाते हैं कि बहुत गर्मी है तो आ जा मैदान में! निकाल देंगे! वो तो चुनाव मैदान में हो ही रहा है। तो भैया वो वाली गर्मी खाने की तो ज्यादा जरूरत है नहीं, हम तो उस वाली गर्मी की बात कर रहे हैं जिसमें मैदान में जाने की मनाही होती है कि कहीं लू न लग जाए। सो बचके रहो। बल्कि हम तो इसीलिए चुनाव वाली गर्मी की भी बात नहीं कर रहे, क्योंकि वह भी उत्तरोत्तर बढ़ती ही चली गयी है, इस वाली गर्मी की तरह ही। बल्कि कइयों के तो दिमाग में ही गर्मी इतनी चढ़ गयी कि वे कुछ भी आंय-बांय-सांय बोलने लगे हैं वैसे ही जैसे आदमी अर्द्धमूर्च्छित अवस्था में कुछ भी बड़बड़ाने लगता है।
खैर, वह गर्मी तो अब थोड़े दिन में शांत हो ही जाएगी, वैसे ही जैसे आईपीएल की गर्मी शांत हो गयी। जलकुकड़े भुनते रहते हैं कि आईपीएल है तो सट्टा है, तो उम्मीद करनी चाहिए कि वह धंधा भी अब शांत हो गया होगा। अलबत्ता चुनाव का सट्टा बाजार अभी भी गर्म होगा, जबकि चुनावों के लक्षण देखकर लोगों को शेयर बाजार के ठंडा होने की चिंता ज्यादा सताने लगी है। खैर, जी गर्मी बहुत है सचमुच! और गर्मी है तो पानी की जरूरत भी बहुत है सचमुच। वैसे भी पानी पिलाना धर्म की बात मानी गयी है।
लेकिन चुनाव है तो पानी पिलाना भी देखो धूल चटाना टाइप का ही हो लिया है। यह ठीक है कि धूल चटाने की ही तरह पानी पिलाना भी एक मुहावरा है कि फलां ने फलां को पानी पिला दिया। नहीं हम न तो किसी टीवी डिबेट की बात कर रहे हैं, जहां लोग एक-दूसरे को पानी पिलाते ही रहते हैं। टीवी की डिबेट वैसे भी अब डिबेट की बजाय डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के रिंग में तब्दील हो चुके हैं। इधर कुछ टीवी वाले यह भ्रम पाले रहते हैं कि वे अपने इंटरव्यू में सामने वाले को पानी पिला देंगे। लेकिन देखने में तो यह आया है कि इधर प्रधानमंत्रीजी ने तो अपने सभी इंटरव्यूज में टीवी वालों को ही पानी पिला दिया। वे तृप्त भी काफी नजर आए। इतने कि जरूर बाद में दुआएं दी होंगी।
फिर भी इधर पानी पिलाना बड़ा चर्चा का विषय रहा। मसला ऐसा हो गया है जी कि कोई तो इसे पानी पी-पीकर कोस रहा है, तो कोई इस पर पानी फेर रहा है। वो क्या कहते हैं कि पानी रे पानी तेरा रंग कैसा, जिसमें मिला दो लगे उस जैसा। कोई पानी पिला रहा है धर्मादे के लिए, कोई पिला रहा है धूल चटाने के लिए। कोई किसी को पानी पी-पीकर कोस रहा है, कोई ठंडे पानी के छींटे मार रहा है गर्मी शांत करने के लिए। लेकिन गर्मी के इस मौसम में जब गर्मी सचमुच बहुत ज्यादा है पानी प्यास बुझाने के लिए ही पिलाया जाना चाहिए। धर्म की बात तो यही है। नहीं?

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