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कांग्रेस नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर

08:07 AM May 13, 2024 IST
कांग्रेस नेताओं की प्रतिष्ठा भी दांव पर
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सोलन, 12 मई (निस)
शिमला संसदीय सीट से लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए सांसद सुरेश कश्यप की नैया पार लगाना किसी चुनौती से कम नहीं है। शिमला संसदीय सीट इस बार प्रदेश में काबिज कांग्रेस सरकार का टेस्ट भी है। कांग्रेस ने शिमला संसदीय क्षेत्र पांच मंत्री, एक विधानसभा उपाध्यक्ष व तीन मुख्य संसदीय सचिव की ‘फील्डिंग’ पहले ही लगा दी है। इसमें शिमला जिला से शिक्षा मंत्री व कांग्रेस के संसदीय क्षेत्र के प्रभारी रोहित ठाकुर, लोकनिर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, पंचायती राज मंत्री अनिरूद्ध सिंह व मुख्य संसदीय सचिव मोहन लाल ब्रागटा, सोलन जिले से स्वास्थ्य मंत्री डॉ.धनीराम शांडिल, मुख्य संसदीय सचिव संजय अवस्थी और राम कुमार चौधरी शामिल है।
सिरमौर जिला से उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, विधानसभा उपाध्यक्ष विनय कुमार इसी संसदीय क्षेत्र से संबंध रखते हैं। इससे इन सभी की प्रतिष्ठा भी दाव पर हैं। ऐसे में इस बार शिमला संसदीय सीट सरकार का टेस्ट बन गई है। इसलिए सभी इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी विनोद सुल्तानपुरी के सर पर जीत का सेहरा बांधने के लिए कसरत कर रहे हैं।

तीन सीटों पर सिमट गई विस चुनाव में भाजपा
डेढ़ वर्ष पहले हुए विधानसभा चुनाव में इस संसदीय क्षेत्र में भाजपा महज तीन विधानसभा सीटों तक सिमट कर रह गई है। सोलन जिला में तो भाजपा की 30 वर्ष बाद ऐसी हार हुई कि खाता तक नहीं खोल पाई या यूं कहे कि इस सदी में भाजपा पहली बार जीरो पर सिमट कर रह गई है। सोलन के 5 में से नालागढ़ व अर्की निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा तीसरे स्थान पर रही है। भाजपा ने वर्ष 2007 में सभी पांच विधानसभा सीटें जीतने के बाद इस जिला को कभी गंभीरता से नहीं लिया। यही वजह रही है कि वर्ष 2012 में 3 सीट, वर्ष 2017 में दो व वर्ष 2022 में भाजपा जीरो पर पहुंच गई। वर्ष 2017 से वर्ष 2022 के बीच में भाजपा की सरकार थी।

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2009 में पहली बार मिली थी भाजपा को इस सीट पर जीत
शिमला संसदीय क्षेत्र में भाजपा पहली बार वर्ष 2009 में चुनाव जीतने में कामयाब रही थी। इसके बाद से पार्टी ने इस सीट पर जीत की हैट्रिक लगाई है और प्रश्न यह कि यह जीत का चौका लगा पाएगी या नहीं। भाजपा की ओर से वीरेन्द्र कश्यप ने वर्ष 2009 व 2014 में लगातार दो चुनाव जीते। वीरेन्द्र कश्यप अपने दस वर्ष के कार्यकाल में अपने संसदीय क्षेत्र में ही सक्रिय रहे। इसके बावजूद लगातार दो चुनाव जीतने के बाद वर्ष 2019 में उनके स्थान पर सुरेश कश्यप को टिकट दिया गया और वह बड़े अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। सुरेश कश्यप प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं और प्रदेश भाजपा में उनका कद भी अब बढ़ा है। अब देखना यह कि लोकसभा चुनाव का ऊंट किस करवट बैठता है।

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