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लोकसभा के बहाने रोहतक में लड़ी जा रही प्रदेश में सरकार बनाने की लड़ाई!

10:46 AM May 21, 2024 IST
लोकसभा के बहाने रोहतक में लड़ी जा रही प्रदेश में सरकार बनाने की लड़ाई
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दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू
रोहतक, 20 मई
रोहतक लोकसभा सीट पर चुनाव के बड़े राजनीतिक मायने हैं। यहां अकेले लोकसभा नहीं बल्कि हरियाणा में अगली सरकार की भी ‘जंग’ भी लड़ी जा रही है। इतना ही नहीं, इस चुनाव में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा को सीएम के चेहरे के रूप में भी प्रोजेक्ट किया जा रहा है। टिकट आवंटन में पूर्व सीएम और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपना प्रभाव पहले ही दिखा चुके हैं। हरियाणा में लोकसभा की अधिकांश सीटों पर प्रत्याशियों का फैसला उनके हिसाब से हुआ है।
ऐसे में चुनाव प्रचार के दौरान भी यह बात खुलकर कही और लोगों को समझाई जा रही है कि लोकसभा के करीब चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी इन नतीजों का सीधा-सीधा असर पड़ेगा। भाजपा भी यह बात अच्छे से जानती है कि लोकसभा चुनाव के नतीजों का असर विधानसभा पर पड़ना स्वाभाविक है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में सभी दस सीटों पर जीत हासिल करने के बाद भी भाजपा चार महीने बाद हुए विधानसभा चुनावों में चालीस सीटों पर सिमट गई थी।
कांग्रेस ने जिस प्लािनंग और रणनीति के तहत इस बार टिकट आवंटन में सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले को अपनाया, उससे स्पष्ट है कि वे लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनावों की भी पिच तैयार कर चुकी है। यह सोशल इंजीनियरिंग का ही नतीजा है कि कांग्रेस ने इस बार केवल दो जाट नेताओं को टिकट दिया है। रोहतक से दीपेंद्र हुड्डा और हिसार से जयप्रकाश उर्फ जेपी चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं भिवानी-महेंद्रगढ़ में जाट की टिकट काटकर यादव कोटे से राव दान सिंह तथा सोनीपत में जाट की बजाय ब्राह्मण कोटे से सतपाल ब्रह्मचारी को टिकट दिया है। इसी तरह से पहली बार बीसीए यानी पिछड़ा वर्ग-ए कैटेगरी से राज बब्बर को गुरुग्राम से टिकट दिया है। करनाल में पंजाबी कोटे से दिव्यांशु बुद्धिराजा को टिकट दिया है। तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन के अलावा चालीस से अधिक पूर्व मंत्रियों-विधायकों को कांग्रेस ज्वाइन करवा कर हुड्डा विधानसभा के लिए साधे गए अपने निशाने को भी स्पष्ट कर चुके हैं। 2019 के विधानसभा चुनावों में उलट परिस्थितियों के बावजूद कांग्रेस ने 31 हलकों में जीत हासिल की थी। तीन निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापसी के बाद नायब सरकार के अल्पमत में आने को भी चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है।
वहीं पलटवार में कांग्रेस के दीपेंद्र सिंह हुड्डा यूपीए सरकार के समय उनके प्रयासों से रोहतक सीट पर मिले बड़े प्रोजेक्टस को गिनवाने से पीछे नहीं हट रहे। बाढ़सा में एम्स, कैंसर इंस्टीट्यूट, रोहतक-रेवाड़ी वाया झज्जर रेलवे लाइन, जींद-सोनीपत वाया गोहाना रेल लाइन, महम-हांसी-हिसार रेलवे लाइन के अलावा मेट्रो को बहादुरगढ़ तक लाने, जसौर खेड़ी में परमाणु रिसर्च इंस्टीट्यूट और रोहतक में आईआईएम व सुुपुवा यूनिवर्सिटी सहित कई बड़े मुद्दों के नाम पर दीपेंद्र वोट मांग रहे हैं। इन प्रोजेक्ट्स को लेकर दीपेंद्र कई बार संसद में भी सवाल उठाते रहे हैं।
सीट पर इन मुद्दों की चर्चा
रोहतक लोकसभा सीट पर हरियाणा में सरकार बनाने की लड़ाई के साथ-साथ विकास के मुद्दों पर भी खूब चर्चा हो रही है। भाजपा के नेताओं के अलावा यहां से प्रत्याशी व मौजूदा सांसद डॉ. अरविंद शर्मा मोदी व मनोहर सरकार के कार्यों को गिनवा रहे हैं। मैरिट पर नौकरियां, समान रूप से विकास कार्यों के अलावा कई बड़े प्रोजेक्ट्स का हवाला देकर वे लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि मोदी है तो मुमकिन है। आयुष्मान भारत योजना, बीपीएल कार्ड के अलावा गरीब परिवारों को हर महीने दिए जा रहे मुफ्त राशन को अरविंद शर्मा भुनाने में जुटे हैं।

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