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डेढ़ घंटे में डोनेट अंग लेकर नयी दिल्ली पहुंची डॉक्टरों की टीम

06:39 AM Feb 07, 2024 IST
डेढ़ घंटे में डोनेट अंग लेकर नयी दिल्ली पहुंची डॉक्टरों की टीम
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अनिल शर्मा/निस
रोहतक, 6 फरवरी
रोहतक पीजीआई निदेशक डॉ. एसएस लोहचब ने बताया कि पीजीआई ने पहली बार अंगदान करवाया गया है। ऐसे में पीजीआईएमईआर चंडीगढ़, आर आर हॉस्पिटल नयी दिल्ली और आईएलबीएस नयी दिल्ली से टीमें अंग लेने के लिए पहुंची। जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन से संपर्क किया गया तो उन्होंने तुरंत प्रभाव से रोहतक से दिल्ली और रोहतक से चंडीगढ़ के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करवा दिया। डॉ. लोहचब ने बताया कि पीजीआई से दिल्ली तक पहुंचने में कई बार करीब 3 से 4 घंटे लग जाते हैं लेकिन रोहतक पुलिस की मदद से एम्बुलेंस लिवर को लेकर डेढ़ घंटे से भी कम समय में दिल्ली पहुंच गई।
डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि प्रशासन के सहयोग से तीन ग्रीन कॉरिडोर बनवाए गए थे लेकिन कुछ कारणों के चलते पीजीआई चंडीगढ़ को किडनी नहीं भेजी जा सकी और रोहतक के ही दो मरीजों को किडनी लगाई गई, दो मरीजों को कॉर्निया लगाया गया। वहीं दिल्ली में लिवर भेजा गया। इसके साथ ही हृदय को कुछ तकनीकी कारणों के चलते आर आर हॉस्पिटल दिल्ली की टीम नहीं लेकर जा सकी।
पीजीआई में पहले ऑर्गन डोनेशन व किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में कुलपति ने डॉक्टरों की टीम के साथ जानकारी साझा की और बताया कि स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन व मोहन फाउंडेशन की काउंसलिंग के बाद एक ब्रेन डेड महिला के परिजनों ने उनके ऑर्गन्स डोनेट किए हैं। एक लड़की ने ब्रेन डेड अपनी मां के अंगदान का फैसला लिया और तीन लोगों को जीवनदान के साथ दो लोगों के जीवन में रोशनी देकर पूरे प्रदेश में एक अंगदान की अलख जगा दी। ऐसा परिवार बहुत ही बधाई का पात्र हैं जिन्होंने तीन लोगों को नया जीवन दान दिया है। बताया जा रहा है कि करीब 43 वर्षीय महिला 30 जनवरी को ब्रेन हेमरेज होने के चलते पीजीआईएमएस के न्यूरो सर्जरी विभाग में डॉ. ईश्वर सिंह व डॉ. गोपाल की निगरानी में आईसीयू में भर्ती कराई गई।

सारी रात काम कर मरीज की कार्रवाई जांच
चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल ने बताया कि मरीज के अंग निकाल कर किसी अन्य मरीज में लगाने से पहले कुछ जांच करवानी आवश्यक होती हैं जिनके बिना किसी भी हाल में ट्रांसप्लांट नहीं हो सकता। ऐसे में संस्थान द्वारा सोटो की टीम के साथ मिलकर रात को ही गाड़ी दिल्ली भेज कर मरीज के टेस्ट करवाए गए और पीजीआईएमएस सिक्योरिटी व प्रशासन के सहयोग से शाम को ग्रीन कॉरिडोर बनवाकर कुछ ही 90 मिनटों से भी कम समय में महिला के लिवर को दिल्ली पहुंचवा कर ट्रांसप्लांट करवाया गया।

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