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सशक्त न्यायिक प्रणाली विकसित भारत का हिस्सा

06:26 AM Jan 29, 2024 IST
सशक्त न्यायिक प्रणाली विकसित भारत का हिस्सा
नयी दिल्ली में रविवार को सुप्रीम कोर्ट के 75वें वार्षिक समारोह के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी को स्मृति चिन्ह भेंट करते सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़। -प्रेट्र
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नयी दिल्ली, 28 जनवरी (एजेंसी)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि सरकार मौजूदा संदर्भ और सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप कानूनों का आधुनिकीकरण कर रही है। सुप्रीम कोर्ट की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तीन नये आपराधिक न्याय कानून बनने से भारत की कानूनी, पुलिस और जांच प्रणाली एक नये युग में प्रवेश कर गई है। उन्होंने कहा, ‘यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सैकड़ों साल पुराने कानूनों से नये कानूनों की ओर प्रवेश सुचारू हो। इस संबंध में, हमने सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्य पहले ही शुरू कर दिया है।’ मोदी ने सुप्रीम कोर्ट से अन्य हितधारकों की क्षमता निर्माण की दिशा में काम करने के लिए आगे आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘सशक्त न्यायिक प्रणाली विकसित भारत का हिस्सा है। सरकार लगातार काम कर रही है और भरोसेमंद न्यायिक प्रणाली बनाने के लिए कई फैसले ले रही है। जन विश्वास विधेयक इसी दिशा में उठाया गया कदम है। भविष्य में इससे न्यायिक प्रणाली पर अनावश्यक बोझ कम होगा।’

‘कठिन संवाद’ शुरू करने की जरूरत : सीजेआई

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने ‘स्थगन की संस्कृति’ और लंबी छुट्टियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक संस्था के रूप में प्रासंगिक बने रहने की न्यायपालिका की क्षमता के लिए जरूरी है कि वह चुनौतियों को पहचाने और ‘कठिन संवाद’शुरू करे। उन्होंने हाशिए पर मौजूद वर्गों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने और पहली पीढ़ी के वकीलों को समान अवसर प्रदान करने पर भी जोर दिया। उन्होंने भारत में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि कानूनी पेशे में पारंपरिक रूप से महिलाओं का प्रतिनिधित्व कम रहता था, लेकिन अब जिला न्यायपालिका के कार्यबल में उनकी हिस्सेदारी 36.3 प्रतिशत है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने समाज के विभिन्न वर्गों को कानूनी पेशे में शामिल करने का आह्वान किया। उन्होंने रेखांकित किया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति का प्रतिनिधित्व ‘बार और पीठ दोनों में काफी कम है।’ सीजेआई ने इसे देश के इतिहास में एक ‘महत्वपूर्ण अवसर’ करार देते हुए कहा कि अब भारत में महिलाओं को महत्वपूर्ण पदों पर देखा जा सकता है।

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