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शूलिनी यूनिवर्सिटी के प्रो. लोकेंद्र का शोध ‘नेचर’ में प्रकाशित

10:44 AM Feb 09, 2024 IST
शूलिनी यूनिवर्सिटी के प्रो  लोकेंद्र का शोध ‘नेचर’ में प्रकाशित
चांसलर प्रोफेसर पीके खोसला के साथ डॉक्टर लोकेंद्र कुमार
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सोलन, 8 फरवरी (निस)
शूलिनी यूनिवर्सिटी ने दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल ‘नेचर’ में एक शोध पत्र के प्रकाशन के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान की दुनिया में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की। एप्लाइड साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी फैकल्टी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. लोकेंद्र कुमार, जो यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र भी हैं, ने प्रतिष्ठित इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अभूतपूर्व शोध पत्र लिखा है। यह प्रकाशन डॉ. कुमार और यूनिवर्सिटी दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ है, जो अनुसंधान और नवाचार में उत्कृष्टता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। नेचर, 64.8 के इम्पेक्ट फैक्टर और 20.957 की एससीआईमैगो जर्नल रैंक के साथ एक अग्रणी मल्टीडिससिप्लीनरी साइंटिफिक जर्नल, अपनी रिगोरोस पीर रिव्यू के लिए प्रसिद्ध है, जो प्रकाशन को किए गए शोध की गुणवत्ता और महत्व का प्रमाण बनाती है। पिछले पांच वर्षों में नेचर ने दुनियाभर से 14,900 पेपर प्रकाशित किए हैं, जिनमें से केवल 140 योगदान भारतीय लेखकों का है। डॉ. कुमार का पेपर विशेष रूप से इन प्रतिष्ठित प्रकाशनों में से एक है, जो भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के भीतर इस उपलब्धि की असाधारण प्रकृति पर जोर देता है।
डॉ. कुमार का शोध सेल डेथ नियामक के रूप में 7-डीहाइड्रोकोलेस्ट्रोल (7-डीएचसी) की भूमिका पर केंद्रित है, जो कई सेलुलर प्रोसेस और बीमारियों में महत्वपूर्ण है। यह खोज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फेरोप्टोसिस को नियंत्रित करने के लिए कोशिकाओं के अडॉप्टिव मैकेनिज्म पर प्रकाश डालती है और सेलुलर प्रक्रियाओं में 7-डीएचसी की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करती है। चांसलर प्रो. पीके खोसला ने डॉ. कुमार की सराहना की और कहा कि उन्हें इस तथ्य पर गर्व है कि वह एक पूर्व छात्र होने के साथ-साथ एक फैकल्टी मेंबर भी हैं। उन्होंने उन्हें पांच लाख रुपये का नकद पुरस्कार देने की घोषणा की और कहा कि यह पुरस्कार उन्हें आगामी प्रेरणा दिवस पर प्रदान किया जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि जो भी फैकल्टी मेंबर नेचर पर पेपर प्रकाशित करेगा, उसे पांच लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

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