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संयम के मौन से साधुता

06:31 AM Mar 21, 2024 IST
संयम के मौन से साधुता
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स्वामी स्वतंत्रतानंद के दर्शन हेतु जब एक युवक पहुंचा तो उसे ज्ञात हुआ कि महात्मा जी अभी मौन धारण किए हुए हैं। कुछ दिन पश्चात मौन खुलने पर युवक को महात्मा जी के दर्शनों का अवसर मिला। युवक ने प्रणाम करके आसन ग्रहण किया और पूछा, ‘गुरुदेव! आप समय-समय पर मौन व्रत क्यों धारण करते हैं?’ गुरुदेव बोले, ‘मौन से मानव की आत्मिक और मानसिक शक्तियां दृढ़ होती हैं। मौन रहने वाला व्यक्ति कई दोषों और प्रपंचों से मुक्त रहता है।’ युवक ने पुनः जिज्ञासावश पूछा, ‘गुरुदेव! जीवन में जब भी अकस्मात भयग्रस्त होने की स्थिति आती है, तब मेरी भी वाणी बंद हो जाती है और लंबे समय तक मैं अवाक-सा चुप खड़ा रह जाता हूं। मगर उस समय मुझे तो किसी शक्ति का अहसास नहीं होता, मैं तो मन ही मन कांपता, भयभीत ही रहता हूं।’ गुरुदेव ने स्नेहपूर्वक समझाते हुए कहा, ‘तुम्हारी अनुभूति बिल्कुल सही है क्योंकि भय से उत्पन्न मौन पशुता और संयम से उत्पन्न मौन साधुता है।’

प्रस्तुति : किरणपाल बुम्बक

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