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छल से युद्ध में बलि

06:47 AM Mar 08, 2024 IST
छल से युद्ध में बलि
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निश्चित रूप से यह तंत्र की विफलता व मानवीय मूल्यों का पराभव है कि कुछ एजेंट बेरोजगार भारतीय युवाओं को सब्जबाग दिखाकर यूक्रेन युद्ध के लिये रूसी सेना में व युद्धरत इस्राइल में तोपों का चारा बना रहे हैं। यूक्रेन युद्ध में कुछ भारतीयों के फंसने व इस्राइल में हिजबुल्लाह के हमले में केरल के एक युवक के मरने की खबर भी आई है। यह कैसी विडंबना है कि भारतीय एजेंट नौकरी के बहाने और अंधेरे में रखकर बेरोजगारों को रूसी सेना के लिये युद्ध में धकेल दें और हमारे नीति-नियंताओं को उसकी भनक भी न लगे। मानवीय मूल्यों के पतन की पराकाष्ठा देखिए, भारत के ही चंद एजेंट विदेशों में बैठे एजेंटों की मदद से चंद रुपयों के लिये भारतीय युवाओं को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। पिछले दिनों हैदराबाद के मोहम्मद असफान के यूक्रेन युद्ध में मरने की खबर आई। कुछ दिन पूर्व भारतीय अधिकारियों ने भी स्वीकार किया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे बीस भारतीय युवाओं को बचाने के प्रयास किये जा रहे हैं। कहा गया कि इस बाबत विदेश मंत्रालय उन्हें भारत लाने का प्रयास कर रहा है। फंसे युवकों ने मास्को स्थित भारतीय दूतावास से बचाने की गुहार लगाई है। इन युवाओं में कुछ युवक पंजाब व हरियाणा के भी हैं। बताया जाता है कि रूस भेजे युवकों को एजेंटों द्वारा अच्छी नौकरी का प्रलोभन दिया गया। लेकिन उन्हें नहीं बताया गया था कि वे सेना में भर्ती होने जा रहे हैं। बताया जाता है कि एक यूट्यूबर द्वारा लगातार दावा किया जा रहा था कि नौकरी में मोटी तनख्वाह दी जाएगी और एक साल बाद उन्हें रूस की नागरिकता दे दी जाएगी। कहा यह भी जा रहा है कि दो साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध में सैनिकों के संकटों से जूझ रहे रूस द्वारा कुछ भारतीय व विदेशी एजेंटों के मार्फत बेरोजगारों को झांसा देकर रूस ले जाने की योजना बनायी गई।
बताया जा रहा है कि बाबा ब्लॉग्स यूट्यूब चैनल ने तमाम ऐसे वीडियो डाले, जिनमें रूसी सेना में सहायक की नौकरी आकर्षक सुविधाओं के साथ देने की बात कही गई थी। यह भी कि एक खाड़ी देश के रास्ते रूस ले जाए गए इन युवाओं से रूसी भाषा में एक एग्रीमेंट पर साइन कराए गए जिसके बाद उन्हें यूक्रेन की सरहद पर भेज दिया गया। उसके बाद उनके घर वालों से भी उनका कोई संपर्क नहीं हो सका। बताते हैं कि पंजाब व हरियाणा के कई युवाओं ने वीडियो अपने रिश्तेदारों को भेजकर मदद की गुहार लगाई है। दरअसल, भारत, दुबई व रूस में बैठे एजेंटों के बीच मिलीभगत से युवा इस जाल में फंसे। खबरें ये भी हैं कि एजेंटों ने युवाओं से नौकरी देने के लिये कई लाख भी वसूले हैं। कुछ युवाओं का कहना था कि टूरिस्ट वीजा पर रूस जाने पर पुलिस ने बिना वीजा के प्रवेश के आरोप में पकड़ लिया और रूसी सेना को सौंप दिया। बताया जाता है कि आकर्षक नौकरी देने के बहाने रूस ले जाए गए युवकों को जब हथियार चलाने की ट्रेनिंग दी गई तो उन्होंने इसकी वजह पूछी। उन्हें बताया गया कि यह उनकी नौकरी का हिस्सा है। कुछ युवकों को सेना में सहायक की नौकरी बताकर गुमराह किया गया। बीच-बीच में ऐसी खबरें भी आती रही हैं कि युवकों को भारत लाने के लिये रूस सरकार से बातचीत की जा रही है। दरअसल, रूसी सेना में भाड़े के सैनिक भर्ती करने का पुराना इतिहास रहा है। बल्कि भाड़े के सैनिकों की एक प्रशिक्षित सेना वागनर ग्रुप पिछले दिनों खूब चर्चा में रहा। सवाल यह है कि हमारा तंत्र इस बात की निगरानी क्यों नहीं कर पाया कि बेरोजगार भारतीय युवाओं को बलि का बकरा बनाकर युद्धग्रस्त इलाकों में भेजा जा रहा है। क्यों सरकार बेईमान ट्रेवल एजेंटों पर नकेल नहीं कस पाती। दरअसल, आज जरूरत ऐसी फुलप्रूफ नीति बनाने की है जिसके उपरांत दुनिया के सशस्त्र संघर्षों में शामिल करने के लिये युवाओं को बरगलाया न जा सके। ऐसे ही वीजा की नीति को भी पारदर्शी व सख्त बनाया जाए।

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