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आमजन के मनोभावों की नुमाइंदगी

06:21 AM Nov 12, 2023 IST
आमजन के मनोभावों की नुमाइंदगी
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सुशील ‘हसरत’ नरेलवी

शायर नरोत्तम शर्मा द्वारा लिखित ग़ज़ल-संग्रह ‘एहसासात’ के पहले खण्ड में 86 ग़ज़लें और दूसरे खण्ड में 301 फुटकर अश्आर हैं। कथ्य में मुफ़लिस, लाचार, हाशिये पर धकेले गए आमजन के लिए शायर का कलम पुरज़ोर तख्लीक करते हुए उसके दर्द को आवाज़ अता करता है। चन्द अश्आर :- ‘उसकी भलमनसाहत से तुम कब के मालिक बने हुए/ और बिचारा वो पीढ़ी-दर-पीढ़ी से कारिन्दा है।’ ‘तू क्या कर सकता है देख/ चुप मत खड़ा तमाशा देख।’ जि़न्दगी के झमेलों से दो-चार होते हुए शायर कहता है :- ‘जैसी भी गुजरी, गुजारी, और क्या/ तिनके तिनके से बुहारी, और क्या।’
संयम की डोर थामे शालीनता का परिचय देते हुए शायर कहता है :- ‘खुद पे काबू रखा, लाचार नहीं होने दिया/ अपने अल्फ़ाज़ को तलवार नहीं होने दिया।’ तो इस शे’र में खुद्दारी का आलम देखिएगा :- ‘तब न कोई ग़म होते थे/ अपने जैसे हम होते थे।’ दिल की ग़मगीं हालत को किस खूबसूरत अन्दाज़ में पेश करते हैं शायर साहिब :- ‘राख के ढेर में छुपा क्या है/ बुझ चुकी है तो फिर धुआं क्या है।’
जो औरों के दु:ख-दर्द से वाबस्ता रहकर इसके निवारण की कामना रखता है वही इंसान असल फ़क़ीरी में रमा है। इसी सोच को दर्शाता है शायर का कलाम :- ‘औरों का ही दर्द है बसता, दिल में सदा फ़क़ीरों के/ दिए जलाती इसीलिये दुनिया मज़ार पर पीरों के।’ ‘जो ज़माने के ज़ुल्म-ओ-सितम हंस के सहते हैं/ उन्हीं के दिल में मुहब्बत के खुदा रहते हैं।’ तरक्की की राह पर चलते-चलते इंसान कहां से कहां पहुंच गया और क्या से क्या हो गया, इसका सुन्दर चित्रण प्रस्तुत करता है ये शे’र :- ‘वक्त ने ढाया क्या कहर तो देखो/ क्या से क्या हो गया शहर तो देखो।’ दुनियावी पशो-पेश से जूझता शायर जि़न्दगी से ही सवाल करता हैं :- जि़न्दगी कौन है तू, क्या है बता/ उम्र गुजऱी मगर अता न पता।’
इस संग्रह में 301 फुटकर अश्आर का समावेश भी है, जिनमें आम आदमी के एहसासात की नुमाइन्दगी है। इनमें जि़न्दगी की ज़ेर-ओ-ज़बर से वाबस्ता फि़क्र अपनी परवाज़ पर है तो मनोवैज्ञानात्मक स्तर पर बहुत कुछ घटित भी होता है।
समीक्ष्य ग़ज़ल-संग्रह ‘एहसासात’ में ग़ज़लियात के विषयों का कथ्य-पक्ष पाठक-मन को कहीं द्रवित तो कहीं भाव-विभोर करने में सक्षम है, जिसमें सामाजिक दुर्भावनाओं, विद्रूपताओं और गिरते नैतिक मूल्यों की ओर भी इंगित किया गया है जो कि समाज के प्रति एक शायर के दायित्व को दर्शाता है।
पुस्तक : एहसासात शायर : नरोत्तम शर्मा प्रकाशक : आस्था प्रकाशन, जालन्धर पृष्ठ : 120 मूल्य : रु. 275.

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