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हरियाणा में किसानों को बंधक बनाने की हो रही तैयारी : सुशील गुप्ता

10:38 AM Feb 13, 2024 IST
हरियाणा में किसानों को बंधक बनाने की हो रही तैयारी   सुशील गुप्ता
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चंडीगढ़, 12 फरवरी (ट्रिन्यू)
आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ़ सुशील गुप्ता ने कहा हरियाणा में किसानों को पूरी तरह से बंधक बनाने की तैयारी की जा रही है। एक बार फिर भाजपा किसानों को कुचलने की तैयारी कर रही है। किसानों ने तीन कृषि कानूनों के खिलाफ लंबा संघर्ष किया। उस संघर्ष में मनोहरलाल खट्टर ने भी इनकी जड़ें चीन और पाकिस्तान में बताई। वे सोमवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी कार्यालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस मौके पर किसान विंग के प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप भांभू व उपाध्यक्ष प्रवीण घुसकानी भी मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने 2 साल पहले भी कंटीले तार बिछाए थे। लाठियां भांजी गई थी और उनके रास्ते में सीमेंट के बैरिकेड लगाए गए थे। दोबारा से फिर सरकार इसी तैयारी में हैं। उस समय 750 किसानों ने शहादत दी थी। तब प्रधानमंत्री मोदी ने तीन कृषि कानूनों को वापस लिया था और एमएसपी की गारंटी को लाने के लिए कानून बनाने का वादा किया था। उन्होंने कहा की देश के किसान प्रधानमंत्री मोदी को उनका वादा याद दिलाने दिल्ली जा रहे हैं।
उन्होंने कहाकि गांव में जाकर किसानों को धमकाया जा रहा है। कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की हरियाणा पुलिस धमकी दे रही है। अंबाला में किसानों से उनके बैंक डिटेल, प्रॉपर्टी डिटेल मांगी जा रही है। वहीं कोई भी नुकसान होने पर संपत्ति कुर्क करने की धमकी भी दी गई है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी को आठ दशक बीतने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की आय दुगनी करने का वादा किया था, लेकिन 10 साल में किसानों के कर्ज दुगना करने का काम किया। अब जब किसान प्रधानमंत्री मोदी को उनका वादा याद दिलाना चाहता है तो खट्टर सरकार किसानों के साथ दमनकारी नीति अपना रही है।

जनता के मौलिक अधिकार छीन रही मनोहर सरकार : अनुराग ढांडा

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष अनुराग ढांडा ने कहा कि आज के हालात को देखते हुए देश तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। संविधान में प्रत्येक भारतीय को छह मौलिक अधिकार दिए गए हैं। 19(1) बी हमें इस बात की गारंटी देता है कि हम अपनी बात रखने के लिए कहीं भी इकट्ठा हो सकते हैं। खट्टर सरकार के नुमाइंदे जिस तरीके से किसान आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों के खिलाफ गांव-गांव में जाकर चेतावनी दी है, वो तानाशाही के तरफ इशारा करती है। वे सोमवार को चंडीगढ़ स्थित आप कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस तरह के फैसले सीधे लोकतंत्र पर प्रहार है। 1972 में सुप्रीम कोर्ट ने हिम्मत लाल बनाम पुलिस कमिश्नर बॉम्बे के केस में साफ कहा था कि पब्लिक मीटिंग या विरोध प्रदर्शन पर पूर्ण रूप से बैन नहीं लगाया जा सकता। कोई भी सरकार ऐसा नहीं कर सकती। दूसरा हमारा मौलिक अधिकार स्वतंत्र रूप से घूमने का है। 19(1) डी हमें ये अधिकार देता है कि हम देश के किसी भी हिस्से में स्वंतत्र रूप से घूम फिर सकते हैं।

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