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एकदा

08:35 AM May 24, 2024 IST
एकदा
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साधना से विकृति उन्मूलन

एक अनुयायी द्वारा बुद्ध से पूछा गया, ‘इतनी तपस्या के बाद आपने क्या पाया?’ बुद्ध बोले, ‘जो मुझे पाना था वह पहले से ही मेरे पास था। मैंने पाने के लिए नहीं खोने के लिए साधना की। मैंने क्रोध खोया, जो मेरे क्षमा भाव को प्रकट नहीं होने दे रही थी। मैंने अभिमान खोया, जो मेरी मृदुता को नष्ट किये बैठा था। मैंने माया खोई, जिसने सरलता को नष्ट किया था और लोभ खोया, जो मेरी पवित्रता को नष्ट कर देता था। जितना संतोष है उतनी पवित्रता है। धर्म की साधना का मतलब है, मैं अपने भीतर की विकृतियों को रोज-रोज हटाता जाऊं। यही तो मेरी साधना का मूल तत्व है।’ प्रस्तुति : मुग्धा पांडे

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