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एकदा

07:47 AM Feb 21, 2024 IST
एकदा
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महर्षि देवेंद्रनाथ उन दिनों आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में थे। इसके बावजूद वे घर आए लोगों को खाली हाथ नहीं लौटने देते थे। एक दिन बंगाल में अनाथालयों का संचालन करने वाली संस्था के अधिकारी उनसे मिलने पहुंचे और बोले, ‘आपके स्वर्गीय पिता जी ने हमारी संस्था को 2 लाख रुपया देने का वचन दिया था। क्या आप उसे पूरा कर सकेंगे?’ महर्षि देवेंद्र ने उसको उत्तर दिया, ‘यदि पिता जी का वचन था तो मैं उसे पूर्ण अवश्य करूंगा, परंतु मु़झे कुछ समय की आवश्यकता है।’ कुछ दिनों में उन्होंने अपनी सारी जमीन बेचकर दो लाख रुपये संस्था को पहुंचा दिए। कालांतर में इस घटना का उद्धरण देते हुए उन्होंने पुत्र रवींद्रनाथ से कहा, ‘धर्मशास्त्रों में सच्चा पुत्र उसे कहा गया है जो पिता के मनोरथ को पूर्ण करे।’ रवींद्रनाथ टैगोर ने इस परंपरा का निर्वहन आजन्म किया।’ प्रस्तुति : मुकेश ऋषि

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