पुराने पेशे भी अब जॉब के नये ठिकाने
हिंदी भाषा या परफोर्मिंग आर्ट्स से एमए या बीए ऑनर्स करके भी अब बेहतर कैरियर के निर्माण की बात सोच सकते हैं। दरअसल, कई ऐसे परंपरागत क्षेत्रों का नये सिरे से विकास हुआ है जिनमें हिंदी भाषा, कला व संस्कृति से संबंधित काबिल पेशेवर की डिमांड है। इन क्षेत्रों में कार्यरत लोग अच्छी कमाई करने वाले प्रोफेशनल के तौर पर उभरे हैं।
नरेंद्र कुमार
एक लंबे समय तक हिंदी भाषा से बीए ऑनर्स और एमए आदि की डिग्री लेने वालों के कैरियर की कोई खास संभावनाएं नहीं होती थीं। कुछ लोग दबी जुबान यह भी कहते थे- ‘अरे हिंदी पढ़कर नौकरी कहां मिलेगी?’ लेकिन पिछले एक दशक से कला और संस्कृति के क्षेत्र में भारत के ताकत बनकर उभरने के कारण अब हिंदी भाषा से एमए या बीए ऑनर्स करने पर भी कैरियर की अनेक नई खिड़कियां खुल गयी हैं। वहीं सोशल मीडिया के विस्फोटक विकास और जीवनशैली में आये परिवर्तनों के कारण कैरियर के अनेक नये विकल्प उभरे हैं, जो डिग्री या स्थायित्व के लिहाज से भले अभी उतने महत्वपूर्ण न माने जाते हों, लेकिन इन क्षेत्रों में कार्यरत लोग अब धीरे-धीरे समाज के महत्वपूर्ण प्रोफेशनल बनकर उभर रहे हैं जैसे ब्लॉगर, सोशल मीडिया इंफ्ल्यूएंसर और यू-ट्यूबर। आज बड़ी संख्या में युवा इन क्षेत्रों से हर महीने अच्छी-खासी कमाई कर रहे हैं। बहरहाल अगर हाल के सालों में हिंदी भाषा से एमए, बीए ऑनर्स, परफोर्मिंग आर्ट्स में कोई डिग्री या डिप्लोमा आपके पास है, तो इस क्षेत्र में भरपूर कैरियर संभावनाएं उभरी हैं।
इन क्षेत्रों में बढ़ी पेशेवरों की मांग
साहित्य और लेखन - उपन्यास, कविता, पटकथा, लेखन, ब्लॉगिंग या अनुवाद के क्षेत्र में इन दिनों ठोस कैरियर बन रहे हैं। फिल्म और टेलिविजन- हाल के सालों में टेलिविजन क्षेत्र का जबर्दस्त विकास होने के कारण पटकथा लेखकों, संवाद लेखकों और कंटेंट क्रिएटरों की भारी मांग पैदा हुई है। पत्रकारिता- हिंदी मीडिया चैनल, समाचार पत्र तथा डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म भी हिंदी भाषी युवाओं के लिए महत्वपूर्ण कैरियर लेकर आये हैं। सांस्कृतिक प्रबंधन- सांस्कृतिक आयोजनों की योजना जैसे नाट्यकला महोत्सव, संगीत कार्यक्रम आदि। प्रदर्शन कला- रंगमंच, नृत्य, गायन और वादन भी बेहतर कैरियर विकल्प के रूप में उभरे हैं। डिजिटल कंटेंट और सोशल मीडिया- हिंदी में तेजी से पॉड कास्टिंग, यू-ट्यूब चैनल तथा इन्फ्लुएंसर मार्केट बन रही है, जो एक स्वतंत्र कैरियर के रूप में युवाओं को आकर्षित कर रही है। संस्कृति, पर्यटन और गाइड- विरासत स्थलों, ऐतिहासिक पर्यटन और संस्कृति आधारित टूअर्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं शिक्षा और अनुसंधान के मामले में भी अब भारतीय संस्कृति एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है, इस कारण इन सब क्षेत्रों में नये सिरे से कैरियर डिमांड बढ़ी है।
आवश्यक डिग्रियां
बीए/एमए हिंदी साहित्य, सांस्कृतिक अध्ययन या भारतीय इतिहास में, बीए/एमए परफोर्मिंग आर्ट्स में (थियेटर, म्यूजिक, डांस), मास कम्यूनिकेशन और पत्रकारिता में डिग्री, फिल्म और टेलिविजन से संबंधित कोर्स, संस्कृति प्रबंधन में विशेषज्ञता के अलावा डिजिटल मार्केटिंग और कंटेंट क्रिएशन में शॉर्ट टर्म कोर्स करके भी रोजगार की संभावना मजबूत है।
महत्वपूर्ण शैक्षिक संस्थान
इन क्षेत्रों में कैरियर बनाने के लिए महत्वपूर्ण शैक्षिक संस्थान इस प्रकार हैं- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) दिल्ली, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) वाराणसी, दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) दिल्ली, फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) पुणे, श्रीराम सेंटर फॉर परफोर्मिंग आर्ट दिल्ली, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स दिल्ली। इन संस्थानों के अलावा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स कोरसेरा, यूडेमी और ईडीएक्स पर भी भाषा और कंटेंट क्रिएशन के कोर्स हैं। वहीं इग्नू से ऑनलाइन संस्कृति प्रबंधन कोर्स कर सकते हैं।
सरकारी और निजी क्षेत्रों के जॉब
सरकारी क्षेत्र में संस्कृति मंत्रालय, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, दूरदर्शन, आकाशवाणी तथा विश्वविद्यालयों में हिंदी और संस्कृति के प्राध्यापकों की नौकरी मिल सकती है। वहीं निजी क्षेत्र में डिजिटल मीडिया हाउस, फिल्म प्रोडक्शन कंपनियों, विज्ञापन एजेंसियों, पब्लिसिंग हाउस और अनुवाद एजेसियों में जॉब हैं। वहीं फ्रीलांसिंग और स्टार्टअप्स में भी संभावनाएं हैं। मसलन स्वतंत्र लेखन, डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और पर्यटन गाइड के रूप में भी शानदार नौकरियां इन दिनों हिंदी भाषा से बीए/एमए करने वाले लोगों के लिए उपलब्ध हैं।
कुल मिलाकर बदलते हुए वक्त ने कला, संस्कृति और भाषा के क्षेत्र में कैरियर की नई खिड़कियां खोली हैं। आज के पहले इन रचनात्मक क्षेत्रों में कैरियर के इतने विकल्प कभी नहीं थे। ये ऐसे विकल्प भी हैं, जिनसे आजीविका के साथ साहित्यिक शौक भी पूरा होता है। मसलन हम अगर आकर्षक कहानी या कविताएं लिखते हैं तो विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म्स मौजूद हैं, जहां उन्हें पढ़ा जाता है। अनुवाद का भी इन दिनों काफी काम है। आप अच्छे अनुवादक हैं तो हर महीने 50 हजार रुपये कमा सकते हैं बशर्ते आपकी दो भाषाओं पर विशेषज्ञीय पकड़ हो। अगर आप बेहतर संपादक और प्रकाशक हैं तो इस रूप में भी कैरियर की कमी नहीं है।
-इ.रि.सें.