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अहंकार रहित सामर्थ्य के  प्रेरणा स्रोत मारुतिनंदन

09:58 AM Apr 22, 2024 IST
अहंकार रहित सामर्थ्य के  प्रेरणा स्रोत मारुतिनंदन
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डॉ. मोनिका शर्मा
पौराणिक चरित्रों से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। आध्यात्मिक भाव से जुड़े ऐसे चरित्र भक्ति ही जीवन शक्ति जुटाने का भी मार्ग सुझाते हैं। उनके विचार और व्यवहार परिस्थितियों से जूझने का बल देते हैं। आराध्य मानने के साथ ही उनके गुणों को अपने व्यक्तित्व में उतारने की सोच इंसान का जीवन बदल सकती है। यूं भी भक्ति भाव का अर्थ केवल पूजन-अर्चन तक सीमित नहीं होता। ईश्वरीय शक्ति से जुड़ी आस्था में समाहित संदेशों को व्यावहारिक धरातल पर भी जीना होता है। ऐसा हर संदेश हमारे जीवन को सही दिशा दे सकता है। ईश्वर के इन रूपों में भगवान हनुमान बेहद सहज और सरल लगते हैं। समर्पण के भाव और कार्यकुशलता की बात होते ही बजरंग बली का स्मरण हो आता है। उनसे जुड़ी बहुत-सी बातें आज के समय में भी प्रासंगिक तो हैं ही हमारे जीवन को सार्थकता देने वाली भी है।

सतत सीखते जाना

अतुलित बल और बुद्धि कौशल के धनी होने बावजूद भगवान हनुमान सदैव नया सीखने-समझने वाले रहे। सीखने का यही भाव गुणी बनाने के साथ ही हर परिस्थिति में विजय दिलाने वाला भी रहा। उनके चरित्र में न ज्ञान का दंभ है और न ही कुछ कर दिखाने की शीघ्रता का विचलन। जानने के समझने के भाव के विस्तार देने से ही यह ठहराव पाया जा सकता है। नम्र भाव से कुछ जानने की सोच रखना असल में जीवन का हर पक्ष संवार देता है। साहस और सदाचार को चरित्र में उतारता है। भगवान हनुमान के व्यक्तित्व का यह आयाम हमें भी सदैव अपनी सीखने की यात्रा जारी रखने का संदेश देता है। इसके लिए शांत भाव से दूसरों की बात सुनना आवश्यक है। हमेशा अपनी क्षमता और दक्षता का बखान करते रहने के बजाय वैचारिक स्थिरता का चुनाव आवश्यक है। बजरंग बली हनुमान का चरित्र हमें ऐसे गुणों की ओर मोड़ता है।

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विनम्रता भरपूर अहंकार से दूर

बल, बुद्धि और विद्या देने वाले भगवान हनुमान का चरित्र बहुत विनम्र है। शक्तिसम्पन्न होने के बावजूद अहंकार से पूरी तरह दूर। अपार शक्ति के स्वामी होने के बाद भी विध्वंस नहीं संवाद का मार्ग चुनते हैं। बजरंग बली का चरित्र सिखाता है कि बलवान होना हमें बड़ा नहीं बना सकता है। विनम्र बनकर तो अपने लक्ष्यों को हासिल करना और सरल हो जाता है। साथ नम्रता का यह भाव कभी अहंकारी भी नहीं बनने देता। ये दोनों ही मानवीय गुणों को बचाए रखती हैं। इस आदर्श व्यवहार के कारण ही हनुमान जी कई अवसरों पर चतुराई से काम लेते हैं पर चालाकी नहीं करते। असल में चतुराई खुद के लिए रास्ता बनाने वाली सोच से जोड़ती है जबकि चालाकी दूसरों के मार्ग में बाधा बनने की सोच लाती है। अहंकारी लोग आमतौर पर दूसरों का रास्ता रोकने का काम करते हैं। विनम्रता ही मन में समर्पण का भाव लाती है। असंख्य गुणों में प्रभु राम के प्रति समर्पित होना हनुमान जी के सर्वोत्तम गुण है। आज के समय में पद, पैसा और पहचान अधिकतर लोगों को अहंकार का शिकार बना रहा है। विनम्रता से दूर कर रहा है। दूसरों का अपमान करने की विस्तार पाती मानसिकता घर हो या बाहर हर जगह दिख जाती है। आज इस मोर्चे पर श्रीराम भक्त हनुमान जी का जीवन बहुत ही प्रेरणादायक है।

सहजता का भाव

भगवान हनुमान साहसी हैं पर बहुत सहज भी। माना तो यह भी जाता है कि आज के युग में हनुमान जी सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता है। संयम और संतुलन को जीने के बावजूद उनका चरित्र गंभीरता नहीं ओढ़ता। एक सहज भोलापन उनके चरित्र की खासियत है। बच्चे और बड़े सभी भगवान हनुमान से जुड़ाव महसूस कर पाते हैं। यही वजह है कि हिंदू पौराणिक चरित्रों में वायु पुत्र हनुमान सबसे लोकप्रिय और व्यापक रूप से पूजे जाने वाले देवताओं में से एक हैं। मौजूदा दौर में भी सहजता आम इंसान को भी अपने समाज और परिवार से जोड़ने वाला गुण है। दृढ़ता के साथ निश्छलता बनाए रखने का यह पावन भाव पवनपुत्र हनुमान जी के चरित्र से सीखा जा सकता है। नागरिकों के व्यवहार में साहस संग सहजता का गुण सामुदायिक जीवन में स्नेह और समरसता को पोस सकता है। एक-दूसरे प्रति किसी भी तरह के भय को बढ़ाने के बजाय एकसूत्र में बांधता है। ईश्वरीय आस्था का यह सबसे सच्चा रूप है।

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