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जीवंत कहानी ही फिल्म की जान

07:47 AM Nov 04, 2023 IST
जीवंत कहानी ही फिल्म की जान
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असीम चक्रवर्ती

कंगना रनौत की दो फिल्में एक के बाद एक आई हैं। ओटीटी पर आई ‘चंद्रमुखी’ के ठीक बाद हाल ही में उनकी फिल्म ‘तेजस’ रिलीज हुई है। सच तो यह है कि 2006 की अपनी पहली फिल्म ‘गैंगस्टर’ के बाद से कंगना ने लगातार अपनी एक्टिंग रेंज में बड़ा विस्तार किया है। इसके साथ ही उनकी बेबाकी और बिंदासपन भी बढ़े हैं। उनके इसी बदलाव पर एक नजर :

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लेखन-निर्देशन के क्षेत्र में

कंगना ने न्यूयार्क से स्क्रिप्ट राइटिंग का कोर्स किया है। अपनी फिल्मों की स्क्रिप्ट पर वह नजर रखती हैं। वह अब निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रख रही हैं। उनके लेखन-निर्देशन की पहली फिल्म ‘इमरजेंसी’ अगले साल के शुरू में आएगी।

आत्मविश्वास

कई बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित अभिनेत्री कंगना ने कई सपने बुन रखे हैं। कभी क्वीन,तनु वेड्स मनु जैसी कुछ अलग टाइप की हिट फिल्मों ने उनके आत्मविश्वास को खूब बढ़ाया था। तब वह न सिर्फ अलग टाइप की फिल्में ही करना चाहती थीं,बल्कि अपनी आम जिंदगी को भी बहुत सहज रखना चाहती थीं। लेकिन वह बहुत कुछ नया करना चाहती थीं जिसके चलते उन्होंने कई नावों की सवारी की।

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फिल्मों के चयन का सवाल

असल में जब से कंगना को स्टारडम मिला है, वह फिल्म निर्माण के हर पक्ष में जरूरत से ज्यादा दखलअंदाजी करने लगी हैं। फिल्म ‘मणिकर्णिका’ को दर्शकों का कमजोर रिस्पांस मिलने से इसके दुष्परिणाम की शुरुआत हुई। वैसे देखा जाए तो इस संजीदा अभिनेत्री ने अपनी फिल्मों के चयन पर एक अरसे से आंखें बंद कर रखी हैं। एक दर्जन से ज्यादा फ्लाप फिल्मों के बाद भी वे सचेत नहीं हुईं।

अच्छे लेखक और स्क्रिप्ट

कई लेखकों-निर्देशकों ने बताया कि उनका कुछेक लेखकों से सरोकार है। जिसके चलते कोई अच्छी स्क्रिप्ट उन तक पहुंच नहीं पाती है।

शोहरत उम्दा फिल्मों से

एक अरसे से उन्होंने कोई हिट फिल्म नहीं दी। फिर भी उनकी प्रस्तुति की काफी तारीफ व स्टारडम की कद्र होती है। वह कहती हैं,‘ मेरे फीगर को देखकर सभी कहते हैं कि मैं खूब डाइट करती हूं जबकि ऐसा नहीं।’ ऐसा कहते हुए वह इस बात को भूल जाती हैं कि एक अभिनेत्री का संबल उसकी उम्दा फिल्में होती हैं।

नुक्ता चीनी के मायने

कंगना इस बात के लिए मशहूर हैं कि वह चूज़ी हैं। बेशक ऐसी सोच को सही नहीं माना जाता है। वह बताती हैं,‘ जी हां मैं चूजी हूं। मुझे लगता है कि कई मुद्दों पर स्वस्थ चर्चा जरूरी होती है। हाल ही में एक फिल्म की शूटिंग के दौरान मुझे एक सीन बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था। इसके बाद निर्देशक से लगभग दो घंटे तक चर्चा करने के बाद मैंने उसको बदलवाया।’

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