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रिश्तों की हद और मायके जाने की ज़िद

07:34 AM Mar 07, 2024 IST
रिश्तों की हद और मायके जाने की ज़िद
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शमीम शर्मा

विवाहित लड़की अपने ससुराल वालों से तंग आकर यह बात सदियों से कहती आई है कि वह मायके चली जायेगी। ‘मायके चली जाऊंगी’ नामक धमकी की पड़ताल होनी चाहिए कि वह बार-बार मायके क्यूं जाना चाहती है। सब जानते हैं कि पीहर लौटने वाली लड़की अकेली नहीं आती। वह अपने साथ ससुरालियों के ताने-उलाहने, बदन पर नीले निशान, नोंकझोंक, आंसू, अंतहीन वेदना और ससुराल वालों के प्रति शिकायतों का पुलिंदा लेकर आती है। लेकिन ऐसी लड़की को अच्छा नहीं माना जाता। उसी के दोष निकालने की कवायद शुरू हो जाती है। एक बार उन कारणों को तलाशने की ईमानदार कोशिश की जानी चाहिए कि आखिर क्यों वह अपने विवाहित जीवन को तिलांजलि देकर पिता के घर लौट आना चाहती है।
आज अरेंज मैरिज करना बहुत महंगा प्रोजेक्ट हो गया है। दो-चार करोड़ पर बिन्दी जा टिकती है पर शादियां दो-चार महीने भी नहीं टिक रही हैं। हर चौथी शादी टूट रही है या टूटने की कगार पर है। दहेज तो बड़ा कारण है ही पर उससे भी बड़ा कारण है लड़के का नशेड़ी होना या गर्लफ्रेंड में उलझे होना। नशे के कारण दूल्हे पुरुषत्व पर संकट है और ये गर्लफ्रेंड सौतन का काम करती है। अब भला सौतन किसे सुहाने लगी? पढ़ी-लिखी लड़कियां अब आव देखती हैं न ताव और बैग उठाकर पीहर का रुख करने को बाध्य हो रही हैं। एक मनचले का कहना है कि बीवी अगर मायके चली जाये तो आदमी तब तक बर्तन साफ नहीं करता जब तक कि कढ़ाई में चाय बनाने की नौबत न आ जाये।
कानून की निगाह में शादी के बाद भरण-पोषण और सुरक्षा की जिम्मेदारी पति की होती है। पर पति ही हिंसक हो जाये तो कौन रखवाला? ससुराल में पति और उसके परिजनों द्वारा की गई क्रूरता और उत्पीड़न भी लड़कियों के पीहर जाने का मुख्य कारण है।
एक व्यक्ति मंदिर गया। मंदिर के बाहर बैठे एक भिखारी ने अपना पात्र उसके सामने करते हुए कहा- तेरी जोड़ी बनी रहे बेटा। वह आदमी बोला पर मेरी तो शादी ही नहीं हुई बाबा। भिखारी मुस्कुराते हुए बोला- बेटा! मैं तेरे जूतों की जोड़ी की बात कर रहा हूं।
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एक बर की बात है अक रामप्यारी मायके तैं वापिस आई तो नत्थू नैं हंसते होये दरवाज्जा खोल्या। रामप्यारी अपने घरवाले की या हरकत देखकै कसूत्ते छोह मैं बोल्ली- इसी भुंडी ढाल क्यूं दांत पाड़ै है? नत्थू होले सी बोल्या- गुरुजी नैं सत्संग मैं बताया था अक जद भी कोय मुसीबत है तो हंसकै सामना करना चहिय।

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