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केजरीवाल जेल से सशर्त बाहर

07:12 AM May 11, 2024 IST
केजरीवाल जेल से सशर्त बाहर
शुक्रवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल तिहाड़ से रिहा होने के बाद अपने निवास पर मीडिया से बात करते हुए। -मुकेश अग्रवाल/ट्रिन्यू
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नयी दिल्ली, 10 मई (एजेंसी)
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को उन्हें लोकसभा चुनाव के बीच में प्रचार के लिए धनशोधन के एक मामले में एक जून तक सशर्त अंतरिम जमानत दे दी, लेकिन उनके कार्यालय या दिल्ली सचिवालय जाने और तब तक सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर करने पर रोक लगा दी जब तक उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए ऐसा पूरी तरह जरूरी नहीं हो। कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में 50 दिन की हिरासत के बाद लोकसभा चुनाव के बाकी के चरण के लिए प्रचार के लिहाज से केजरीवाल को 21 दिन के लिए रिहा करते हुए न्यायालय ने कहा कि वह दो जून को आत्मसमर्पण करेंगे। एक जून को लोकसभा चुनाव के लिए सातवें और अंतिम चरण के तहत मतदान होगा। मतगणना चार जून को होगी।
जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने कहा, ‘अंतरिम जमानत/रिहाई देने के सवाल की जांच करते समय, अदालतें हमेशा संबंधित व्यक्ति से जुड़ी विशिष्टताओं और आसपास की परिस्थितियों को ध्यान में रखती हैं। वास्तव में, इसे नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण और गलत होगा।’ उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव इस साल की सबसे महत्वपूर्ण घटना है। पीठ ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन केजरीवाल को अभी तक दोषी नहीं ठहराया गया है, उनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वह ‘समाज के लिए खतरा नहीं हैं’। इसमें कहा गया है कि इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि उनकी गिरफ्तारी की वैधता को शीर्ष अदालत के समक्ष चुनौती दी गई थी, जिसने अभी तक इस पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। पीठ ने कहा, ‘तथ्यात्मक स्थिति की तुलना फसलों की कटाई या कारोबारी कामकाज देखले की दलील से नहीं की जा सकती। इस पृष्ठभूमि में, जब मामला अदालत में विचाराधीन है और गिरफ्तारी की वैधता से संबंधित प्रश्न विचाराधीन हैं, तो 18वीं लोकसभा के लिए आम चुनाव होने की पृष्ठभूमि में अधिक समग्र और उदारवादी दृष्टिकोण उचित है।’ पीठ ने कहा कि केजरीवाल का मामला असामान्य नहीं है। उसने कहा कि अंतरिम जमानत देने की शक्ति का प्रयोग आमतौर पर कई मामलों में किया जाता है और प्रत्येक मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अंतरिम जमानत दी जाती है।
हमें देश को तानाशाही से बचाना है : केजरीवाल
अरविंद केजरीवाल ने शुक्रवार को तिहाड़ जेल से बाहर आने पर भगवान हनुमान को धन्यवाद दिया और “तानाशाही के खिलाफ लड़ाई” में लोगों से समर्थन मांगा। आप के राष्ट्रीय संयोजक शाम को ढोल की थाप और आप कार्यकर्ताओं व नेताओं की नारेबाजी के बीच जेल से बाहर निकले। कार की ‘सनरूफ’ से खड़े होकर केजरीवाल ने ‘जेल के ताले टूट गए, केजरीवालजी छूट गए’ के नारों के बीच आप कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित किया। ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ के नारे के साथ संबोधन की शुरुआत करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं अपनी पूरी ताकत से तानाशाही के खिलाफ लड़ रहा हूं, लेकिन (देश के) 140 करोड़ लोगों को आना होगा मिलकर इसके खिलाफ लड़ना है।” उन्होंने कहा कि वह शनिवार सुबह 11 बजे कनॉट प्लेस स्थित हनुमान मंदिर जाएंगे और अपराह्न एक बजे आप कार्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करेंगे।
ईडी बोली-ऐसी कोई मिसाल नहीं
ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, ‘चुनाव में प्रचार के लिए किसी व्यक्ति को रिहा करने की कोई मिसाल नहीं है।’ केजरीवाल को अंतरिम जमानत देने का कड़ा विरोध किया और अमृतपाल सिंह के मामले का हवाला दिया, जिसे राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है और उसने खडूर साहिब निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ने को अपनी रिहाई के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख किया है।
कोर्ट ने किए सभी तर्क खारिज
जस्टिस संजीव खन्ना एवं जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच ने कहा कि लोकसभा चुनावों के अत्यधिक महत्व को देखते हुए हम अभियोजन पक्ष (ईडी) की ओर से उठाए गए तर्क को खारिज करते हैं कि इस मामले में अंतरिम जमानत देने से देश के सामान्य नागरिकों की तुलना में राजनेताओं को लाभकारी स्थिति में प्रमुखता से रखने जैसा होगा। जस्टिस खन्ना ने कहा, ‘आइए इसे इस तरह एक साधारण स्ट्रेटजैकेट में न डालें। इसके साथ ही जस्टिस खन्ना ने आदेश सुना दिया।
रिहाई के साथ 5 शर्तें
* मुख्यमंत्री कार्यालय और दिल्ली सचिवालय नहीं जा सकते ।
* तब तक सरकारी फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं कर सकेंगे जब तक उपराज्यपाल की मंजूरी के लिए ऐसा पूरी तरह जरूरी
नहीं हो।
* उनके खिलाफ चल रहे मनी लांडि्रंग मामले में उनकी भूमिका पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे ।
* गवाहों से बातचीत नहीं कर सकते और/या मामले से जुड़ी आधिकारिक फाइलों तक पहुंच नहीं सकते ।
* तिहाड़ जेल अधीक्षक की संतुष्टि के लिए 50,000 रुपये के जमानत बांड और इतनी ही जमानत राशि भरनी होगी।

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