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पुल ही तो गिरा आसमान तो नहीं

07:48 AM Jun 21, 2024 IST
पुल ही तो गिरा आसमान तो नहीं
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अशोक गौतम

जिसे देखो, उसे जल्दी मची है। जैसे आग लगी हो। जरा भी सब्र नहीं। सब भूल गए हैं कि सब्र का फल मीठा होता है। गिरने से पहले जरा कुछ देर तो खड़े होकर रुक लो। अच्छा लगेगा। गिरने को तो सारी उम्र पड़ी है भाई साहब!
पर नहीं भाई साहब! हम तो जितनी जल्दी हो सके, गिर के रहेंगे। अब शायद सबको पता चल चुका है कि गर्व से खड़ा आदमी खाक का होता है तो गिरा आदमी लाख का। उसके घर में नोट गिनने वाली मशीनें मशीनें होकर भी हांफ जाती हैं।
अब उनकी ईमानदारी के रेत-बजरी-सीमेंट सरिए से बनाए नालायक पुल को भी देख लीजिए! गिर गया। अरे भैया! तुम तो अपने उद्घाटन तक खड़े रहने का सब्र कर लेते जैसे-तैसे। क्या चला जाता तुम्हारा? घर में बीवी थोड़े ही इंतजार कर रही थी कि उद्घाटन होने से पहले ही खिसक लिए। पर नहीं भाई साहब! जब पुल बनाने वालों को ही सब्र नहीं तो पुल सब्र क्यों करे?
अरे भाई साहब! पुल ही तो गिरा है। इतना हो हल्ला क्यों? आसमान तो नहीं गिरा है न? तारे तो नहीं गिरे हैं न? चांद तो नहीं गिरा है न? गिरता यहां कौन नहीं? यहां पल-पल गिर कौन नहीं रहा? ऐसे में जो गिरा हुआ न देखा, उसे ही गर्व से सिर ऊंचा किए खड़ा हुआ माना जाए।
गिरना माननीय संस्कृति का अभिन्न अंग है। गिरना माननीय जीवन दर्शन का अद्भुत ढंग है। गिरकर जीने में जो उमंग है, वह खड़े होकर जीने में नहीं। हम सब कुछ किए बिना रह सकते हैं, पर गिरे बिना नहीं। जो सोचते हैं कि वे चरित्र के अडिग हैं, लालच की हर आंधी-तूफान में इज्जत के साथ खड़े रहेंगे, उन्हें दाएं-बाएं से गिरे हुए ऐसी टक्कर मार आगे हो लेते हैं कि वे पूरा जन्म लाख कोशिश करने के बाद दूसरों के सामने तो छोड़िए, अपने सामने भी खड़े नहीं हो पाते।
जब आदमी गिरता है तो उसकी बनाई चीज की क्या बिसात! ऐसा कैसे हो सकता है भाई साहब कि आदमी तो गिरे, पर उसकी बनाई चीज न गिरे? ऐसे में आदमी का बनाया पुल भी गिर गया तो गिर गया। वह खड़ा क्यों रहता? उद्घाटन से पहले नहीं तो उद्घाटन के बाद उसका गिरना तय था। अब उद्घाटन से पहले गिर गया तो वे क्या कर सकते हैं? जिसे जिस वक्त गिरना है, वह उसी वक्त ही गिरेगा। फिर क्या उद्घाटन से पहले, तो क्या उद्घाटन के बाद। जिसे जब गिरना हो उसे तब गिरने से कोई नहीं रोक सकता। लगा लें वे भी उतना जोर, जितना उनके पास हो। वे तो लोभ-लालच के इंजीनियर मात्र हैं। सबको बचाने वाला ऊपर वाला हो या न, पर सबको गिराने वाला ठेकेदार है। हम आप तो बस, निमित्त मात्र हैं जी!

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