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दमखम से सपनों को हकीकत बनाती कल्पना

07:05 AM May 11, 2024 IST
दमखम से सपनों को हकीकत बनाती कल्पना
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अरुण नैथानी

झारखंड की राजनीति में सक्रिय न होते हुए भी कल्पना सोरेन सदैव सुर्खियों में रही हैं। एक व्यावसायिक परिवार में जन्मी कल्पना एक शिक्षिका व सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। हालांकि, राजनीति में सक्रिय नहीं रहीं लेकिन राज्य की राजनीति में पैनी निगाह रखती रहीं। पिछले महीनों में जब प्रवर्तन निदेशालय ने उनके पति और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया तो उनका नाम नये मुख्यमंत्री के रूप में तेजी से उछला। दरअसल उन्हें झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक व ससुर शिबू सोरेन का आशीर्वाद मिलता रहा है। वे सामाजिक जीवन में सक्रिय रही हैं। उनके आत्मविश्वास को देखते हुए ऐसे कयास लगना स्वाभाविक था। लेकिन साथ ही पारिवार के कुछ सदस्यों के विरोध का भी सामना करना पड़ रहा था। फिलहाल झारखंड मुक्ति मोर्चा के वफादार रहे चंपाई सोरेन को राज्य की बागडोर सौंपी गई।
लेकिन अब कल्पना सोरेन ने गांडेय विधानसभा क्षेत्र से बीस मई को होने वाले उपचुनाव हेतु नामांकन दाखिल करके जता दिया है कि वे झारखंड की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने जा रही हैं। पिछले दिनों अपने जन्मदिन के बहाने आयोजित एक सियासी कार्यक्रम में कल्पना मुर्मू सोरेन ने माइक थाम कर अपने इरादे जाहिर कर दिये हैं। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, कई मंत्री तथा विधायकों समेत कार्यकर्ताओं की भीड़ भी शामिल थी। सधे राजनीतिज्ञ की तरह माइक पकड़ते ही उनकी आवाज भरभराई, वे चुप हुई, जुबान लड़खड़ाई और आंखों में आंसू नजर आए। तब कार्यकर्ताओं के नारे गूंजने लगे- ‘जेल का ताला टूटेगा, हेमंत सोरेन छूटेगा।’ वातावरण भावुक होते ही नारों का शोर तेज होता चला गया।
उल्लेखनीय है कि मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली कल्पना मुर्मू का जन्म वर्ष 1976 में रांची में हुआ। उनका परिवार ओडिशा में रहता है। उनकी स्नातक स्तर की पढ़ाई रांची में हुई। उन्होंने इंजीनियरिंग के बाद एमबीए की पढ़ाई की है। परिवारों की सहमति से उनका विवाह फरवरी, 2006 में हेमंत सोरेन से हुआ। उनके दो बेटे निखिल व अंश हैं। बिजनेसमैन पिता अम्पा मुर्मू की संतान कल्पना बिजनेस तथा ऑर्गेनिक फार्मिंग के साथ एक स्कूल चलाती हैं। चैरिटी के कार्यों में उनकी सक्रिय भूमिका रहती है।
दरअसल, कल्पना पति हेमंत सोरेन पर लगे आरोपों को खारिज करती हैं और उनके पक्ष में सहानुभूति जुटाने का काम करती हैं। आरोप लगाती हैं कि राज्य के वाजिब हक मांगने पर उन्हें दंडित किया गया है। वे दलील देती हैं कि लोककल्याण की योजनाओं के क्रियान्वयन से मिली लोकप्रियता से चिंतित विपक्ष ने उनके मुख्यमंत्री पति को मामले में फंसाया है। जिसमें सरना धर्म कोड व ओबीसी आरक्षण बढ़ाने के फैसले भी शामिल हैं। बहरहाल, उन्होंने इस भावनात्मक मुद्दे के जरिये कार्यकर्ताओं व जनता को जोड़ने का प्रयास किया।
कल्पना झारखंड की राजनीति में अपने पति को राजनीतिक दुराग्रह से पीड़ित बताकर भावनात्मक लाभ उठाने की कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। वे सोशल मीडिया पर खासी सक्रिय हैं। जन्मदिन पर सास-ससुर के पैर छूने और फिर पति से मिलने रांची जेल जाने के चित्र सोशल मीडिया पर खूब देखे गये। फिर गिरिडीह में झारखंड मुक्ति मोर्च के स्थापना दिवस समारोह में उनकी भागीदारी चर्चा में रही। बहरहाल, उनके उत्साह, मुद्दों के प्रति दृढ़ता तथा आत्मविश्वास दर्शाता है कि वे आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने वाली हैं। वे भीड़ में भावनाओं का उफान पैदा करने में सफल रही हैं। वे यह भी बता रही हैं कि झारखंड के आदिवासियों व आमजन की आवाज उठाने व विकास को धरातल पर उतारने पर हेमंत सोरेन को सजा मिली है।
बहरहाल, औपचारिक रूप से गांडेय विधानसभा के उपचुनाव के लिये पर्चा भर के कल्पना ने जता दिया है कि उनकी राजनीति में एंट्री अब पूरी तरह हो चुकी है। यह भी कि कालांतर वे हेमंत सोरेन की उत्तराधिकारी बन सकती हैं। हालांकि, उनके लिये चिंता की बात हो सकती है कि परिवार की बड़ी बहू सीता सोरेन उनके मुख्यमंत्री बनने का मुखर विरोध करें। वह दावा करती रही हैं कि बड़ी बहू होने के नाते वे मुख्यमंत्री पद हासिल करने की हकदार हैं। यही वजह है कि ईडी द्वारा गिरफ्तारी के बाद चंपाई सोरेन को राज्य की सत्ता की बागडोर सौंपी गई। कहा जा रहा है पति की गिरफ्तारी को वे भावनात्मक मुद्दे में बदलकर राजग को सबक सिखाने की कवायद कर रही हैं। कोशिश है कि हेमंत की गिरफ्तारी के बाद सोरेन परिवार के पक्ष में राज्य में सहानुभूति का वातावरण नजर आए। राज्य में राहुल गांधी व वाम नेता वृंदा करात समेत दिग्गज राजनेता कल्पना सोरेन को समर्थन देकर विपक्षी एकजुटता का दावा कर रहे हैं। दरअसल, राहुल गांधी अपनी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान जब झारखंड गए तो कल्पना से मिलने उनके आवास पर गये। वहीं चंपाई सोरेन मंत्रिमंडल के गठन से पूर्व कई मंत्री बनने वाले विधायकों ने उनसे घर जाकर मुलाकात की थी। कल्पना यह राज्य की जनता को बता रही हैं कि पहली बार देश में एक मुख्यमंत्री को ईडी ने गिरफ्तार किया क्योंकि वह एक आदिवासी था। वहीं दूसरी ओर रांची की सेंट्रल जेल में बंद हेमंत सोरेन की रिहाई के लिये राज्य में न्याय मार्च निकाला जा रहा है। दूसरी ओर विपक्ष सोरेन परिवार पर भ्रष्टाचार व परिवारवाद के आरोप लगातार लगाता रहा है।

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