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पशु पकड़ने में लाखों का फर्जीवाड़ा !

07:25 AM Feb 07, 2024 IST
पशु पकड़ने में लाखों का फर्जीवाड़ा
नगर परिषद कालका के चेयरमैन कृष्ण लांबा जांच रिपोर्ट दिखाते हुए। -निस
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पिंजौर, 6 फरवरी (निस)
नगर परिषद कालका में आवारा पशु पकड़ने, डीजल, पेट्रोल पर लगभग 70 लाख रुपए खर्च करने में फर्जीवाड़े की जांच कमेटी द्वारा नगर परिषद चेयरमैन को बंद लिफाफे में सौंपी रिपोर्ट चेयरमैन कृष्ण लांबा ने आज खोली जिसमें कई अनियमितताएं पाई गई हैं। कृष्ण लाल लांबा ने बताया कि रिपोर्ट में पशुओं को पकड़ने में कई खामियां पाई गई हैं। इसलिए उन्होंने शहरी स्थानीय निकाय मंत्री, निकाय निदेशक, निगम कमिश्नर को रिपोर्ट भेज जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, कर्मियों पर विभागीय कार्यवाही करने की सिफारिश की है।
गौरतलब है कि गत वर्ष बजट मीटिंग में पार्षद संजीव कौशल सहित अन्य पार्षदों ने लगभग 70 लाख रुपये के फर्जीवाड़े का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। तब चेयरमैन लांबा ने विनोद सावरणी, गुलशन ठाकुर, सुनील कुमार की 3 सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। लांबा ने बताया नगर परिषद अधिकारी, ठेकेदार व अन्य कर्मियों द्वारा की कई कमियां पकड़ी गई हैं। कुछ फर्जी रसीदें भी मिली हैं विशेषकर गाय, बंदर पकड़ने की जांच का रिपोर्ट में गहराई से खुलासा किया गया है कि उन्होंने गायों को पकड़ कर कालका, पंचकूला की गौशालाओं में भिजवाया है। दोनों गौशाला संचालकों, समाजसेवी संजय लोहाट के भी बयान लिए गए हैं। हालांकि चेयरमैन ने दोषी अधिकारियों के नामों का खुलासा करने से इनकार करते हुए कहा कि आला अधिकारी ही उनके बारे में कोई निर्णय ले सकते हैं। उन्होंने बताया डीजल, पेट्रोल पर खर्च राशि संबंधित कागजात अधिकारियों ने जांच कमेटी को उपलब्ध नहीं करवाए हैं। वेटरनरी डॉक्टर के बयान भी दर्ज हैं कि कर्मचारी बंदर पकड़ कर डाक्टर के पास लाए थे लेकिन उनको कहां छोड़ा गया, किसके हवाले किया गया इसका कोई जिक्र नहीं है जो संदेह पैदा करता है।

825 पशुओं को पकड़ने का खर्चा दिखाया 14,20500 रुपये

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जांच कमेटी सदस्य व पार्षद गुलशन ठाकुर ने बताया गत वर्ष 28 सितंबर से 31 अक्तूबर तक एक माह के दौरान पकड़े गए 389 पशुओं को गोशाला छोड़ने की भुगतान राशि 6,61300 रुपये, 1 से 30 नवंबर तक 825 पशुओं को पकड़ने का खर्चा 14,20500 रुपये दिखाया गया है। इन पशुओं को कौन से वार्ड से कब पकड़ा, क्या उस वार्ड के पार्षद को इसकी जानकारी दी गई थी, जानवरों को पकड़कर कौनसी गोशाला में छोड़ा गया, गोशाला में छोड़ते समय क्या वहां लिखवाया गया, कौनसी गाड़ी से इनको कब पकड़ा गया, इसकी पूरी जानकारी दस्तावेजों सहित उपलब्ध करवाई गई है।

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