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पुस्तकें मिलीं

06:11 AM Nov 19, 2023 IST
पुस्तकें मिलीं
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अरुण नैथानी

पुस्तक : पहेलियों वाली कहानियां रचनाकार : डॉ. बानो सरताज प्रकाशक : अपोलो प्रकाशन, जयपुर पृष्ठ : 120 मूल्य : रु. 200.
मूलरूप से शिक्षिका और चार भाषाओं में सौ से अधिक पुस्तकें लिखने वाली बानो सरताज बाल साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर हैं। वे बहुत सहज ढंग से रचनाएं बाल पाठकों तक पहुंचाती हैं। समीक्ष्य कृति ‘पहेलियों वाली कहानियां’ भी बाल साहित्य में अभिनव प्रयोग है। बाल कहानियों की आधारभूमि जहां लोककथाएं हैं, वहीं पहेलियों के जरिये बच्चों को माथापच्ची का मौका भी दिया है। संकलन में ‘चार की चौदह कहानियां’ व ‘पांच की पंद्रह कहानियां’ संकलित हैं।

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महादान का अभियान

पुस्तक : महादान रचनाकार : डॉ. मधुकांत प्रकाशक : आनन्द कला मंच प्रकाशन, भिवानी पृष्ठ : 37 मूल्य : रु. 50.

कहना कठिन है 74 साल की उम्र में किशोरों सी ऊर्जा रखने वाले मधुकांत अच्छे शिक्षक थे, अच्छे साहित्यकार हैं या रक्तदान अभियानी। सौ से अधिक पुस्तकों के जरिये समाज में रचनात्मक पहल करने वाले मधुकांत रक्तदान अभियान के प्रबल समर्थक हैं। विभिन्न विधाओं की रचनाओं में उनके इस मिशन की झलक मिलती है। समीक्ष्य पुस्तक ‘महादान’ में रक्तदान व नेत्रदान शीर्षक से दो लघु नाटिकाएं संकलित हैं। जिसके जरिये इस महादान में समाज में जागरूकता लाने का प्रयास हुआ है।

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लोक विरासत का संवर्धन

पुस्तक : खेड्डा, खोड़िया अर लूर रचनाकार : सुनीता आनंद प्रकाशक : आनन्द कला मंच प्रकाशन, भिवानी पृष्ठ : 128 मूल्य : रु. 250.

काव्य विधा की पुस्तक ‘खेड्डा, खोड़िया अर लूर’ के जरिये रचनाकार सुनीता आनंद ने परंपरागत लोकनाट्य-लोकगीतों से नई पीढ़ी को अवगत कराने का सार्थक प्रयास किया है। दरअसल, खेड्डा महिलाओं द्वारा परिवार के ऐसे बुजुर्ग के भरपूर जीवन जीने के बाद जाने पर खेला जाने वाला लोकनाट्य है, जो दर्शाता है कि व्यक्ति ने सारे सुख व उम्र भोग के बाद विदाई ली है। खोड़िया बारात जाने के बाद घर के बचे परिजनों द्वारा खेला जाने वाला लोकनाट्य है। वहीं लूर फागुन के गीत हैं।

प्रेरणादायक महापुरुषों का स्मरण

पुस्तक : विद्यालय में दिवस और जयंतियां रचनाकार : विजयपाल सेहलंगिया प्रकाशक : अनिल प्रकाशन, नयी सड़क, दिल्ली पृष्ठ : 215 मूल्य : रु. 500.
मूलत: शिक्षक विजयपाल सेहलंगिया का लेखन एक आदर्श समाज की स्थापना और युवाओं को प्रेरित करना वाला रहा है। इससे पूर्व उन्होंने काव्य विधा में चार पुस्तकें लिखी हैं-चलो देश पुकारे, चलो पर्व पुकारे, यादों की पुकार तथा गीतों की पुकार। इस बार की पुकार देश के उन महापुरुषों की तरफ से है जो विभिन्न शिक्षण संस्थाओं में विशिष्ट दिवस व जयंतियों के अवसर पर याद किये जाते हैं। साथ ही विभिन्न राष्ट्रीय पर्व व विशेष दिनों की महत्वपूर्ण जानकारी का संकलन है।

सृजन समीक्षा और संकलन

पुस्तक : सृजन समीक्षा रचनाकार : चन्द्र भानु आर्य प्रकाशक : न्यामती शिक्षा कल्याण समिति, दिल्ली पृष्ठ : 504 मूल्य : रु. 250.

पुस्तक : सृजन समीक्षा रचनाकार : चन्द्र भानु आर्य प्रकाशक : न्यामती शिक्षा कल्याण समिति, दिल्ली पृष्ठ : 504 मूल्य : रु. 250.
एक व्यक्ति जीवन के व्यापक अनुभव व ज्ञान के जरिये, श्रमसाध्य प्रयासों से पुस्तक की रचना करता है। विषय विशेषज्ञ पुस्तक का मूल्यांकन करता है। सुधी पाठकों को इन समीक्षाओं के जरिये व्यापक ज्ञान-अनुभव मिलता है। यदि सैकड़ों पुस्तकों की समीक्षा का संकलन पाठक को एक पुस्तक के रूप में मिल जाए तो इसे मणिकांचन संयोग कहेंगे। इसका श्रेय सृजन समीक्षा के संपादक चंद्रभानु आर्य को है,जिन्होंने प्रकाशित करीब साढ़े तीन सौ समीक्षाओं का संकलन पाठकों को सौंपा है।

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