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कविताओं में प्रकृति के सान्निध्य का अहसास

06:41 AM Oct 22, 2023 IST
कविताओं में प्रकृति के सान्निध्य का अहसास
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सुरजीत सिंह

लेखिका कमल कपूर ने लेखन के क्षेत्र में उपन्यास, कहानी, लघु कथा, बाल गीत और कविता में भी सृजन किया है। प्रस्तुत लघु कविता संग्रह ‘उदय से अस्त तक’ में एक सौ लघु कविताओं को संगृहीत किया है। लेखिका ने इन कविताओं को दस खंडों में विभाजित किया है। हर खंड में दस कविताएं हैं। लेखिका ने इस संग्रह को नए आयाम के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। सभी कविताओं में लेखिका प्रकृति का अवलोकन कराती हैं। प्रारंभिक ‘उदय राग’ में प्रकृति का लुभावना दिग्दर्शन कराया गया है :-
उसके आने से पूर्व/बिछा देती है उषा/ लाल-सुनहरा गलीचा/ फिर स्वर्ण मुकुट/ शीश पर सजाए। उतर आता है नभ के आंगन में।
लेखिका ने पहले खंड में सूरज-उदय के जरिये सूर्य की आभा का गुणगान किया है।
हे धूपेश्वर स्वीकारो/ लाखों-लाख प्रणाम
दरस दीजिए/तभी प्रफुल्लित होंगे मेरे प्राण।
खंड-2 की ‘मधुर यामिनी’ में रात का रमणीय दृश्य प्रस्तुत करती कविताएं हैं : टंका रेशमी अंबर पर/ शरद-पूर्णिमा का/ सजीला-चमकीला चांद/ रजत-कलश सा/ सुधा छलकाता।
खंड-3 में पुत्री के जन्म पर खुशी का इज़हार कविताओं में झलकता है।
रेशम की लच्छी-सी/ वह नवजात बच्ची/ नींद में भी हंस रही थी/ कच्ची गरी-सी हंस।
इसी तरह से पुत्रवधू के घर आने की खुशी को कविता के माध्यम से कुछ इस तरह से बयान करती हैं : दो पुत्रियों को विदा कर/ पाई मैंने सिर्फ एक पुत्री/ पुत्रवधू के रूप में/ गीतों की अंजलि-सी ...गीतांजलि।
वर्षभर में अलग-अलग ऋतुएं आने की प्रतीक्षा और हर ऋतु का आनंद लेना कवयित्री ने इस काव्य खंड में संजोया है। खंड ‘जल-तरंग’ में पानी को नदी, सागर, झरना और झील जैसे विभिन्न बिंबों में पेश किया है। इसी तरह से खंड ‘अढ़ाई आखर’ में चूड़ियां, इश्क का गुलाल, प्रेम और प्रेम की पराकाष्ठा को परिभाषित किया है। ‘टूटी चूड़ियां’ में लेखिका प्रेम कुछ इस तरह परिभाषित करती हैं :-मैंने पूछा ‘तुम रो क्यों रही हो?’/ तो वह बोली-‘देखो न मेरी चूड़ियां टूट गईं/ उसने दी थीं।’ टूटी चूड़ियां देख/ मेरी आंखें भी छलक आई।
इसी तरह से ‘रस-रूप-रस-गंध’ में ‘मेहंदी रचे हाथ’ और ‘महक मेहंदी की’ कविताओं में लेखिका की भावुकता झलकती है। ‘जिंदगी की रहगुजर’ कविता खंड में जिंदगी के प्रति उदार दृष्टिकोण दर्शाया है। इस संग्रह में कवयित्री सूर्य उदय से लेकर अस्त तक के अंतराल में व्यस्त रहीं। कविताओं को इतना लघु रूप दिया कि कहीं-कहीं तो लगता है कि एक ही कविता को कई भागों में बांट कर प्रस्तुत कर दिया गया है।
लेखिका ने पुस्तक के कवर पृष्ठ पर पुरस्कारों और सम्मानों की लंबी फेहरिस्त लिखी है जिससे लगता है कि लेखिका की साहित्य में गंभीर रुचि है।
पुस्तक : उदय से अस्त तक लेखिका : कमल कपूर प्रकाशक : अयन प्रकाशन, नयी दिल्ली पृष्ठ : 132 मूल्य : रु. 360.

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