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ढींगरा आयोग जारी रख सकेगा जांच, तीसरे जज का फैसला

07:22 AM May 11, 2024 IST
ढींगरा आयोग जारी रख सकेगा जांच  तीसरे जज का फैसला
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सौरभ मलिक/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 10 मई
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा ढींगरा आयोग की रिपोर्ट को ‘नॉन एस्ट’ या अमान्य ठहराने और इसके प्रकाशन पर रोक लगाने के पांच साल से अधिक समय बाद, एक तीसरे न्यायाधीश ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार आयोग को जारी रखने का आदेश दे सकती है। मई 2015 में गुड़गांव भूमि सौदों की जांच के लिए आयोग का गठन किया गया था, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का नाम भी शामिल था।
डिवीजन बेंच में मतभेद के बाद जस्टिस अनिल खेत्रपाल के पास यह मामला भेजा गया था। अनिल खेत्रपाल ने कहा कि प्रक्रिया का पालन करने में विफलता के बाद तकनीकी आधार पर रिपोर्ट को आंशिक रूप से रद्द कर दिया गया था, लेकिन सरकार को इसे जारी रखने का आदेश देने से नहीं रोका जा सकता, क्योंकि इसके गठन का उद्देश्य पूरा नहीं हुआ है। डिवीजन बेंच में जनवरी 2019 में उसी या अलग आयोग से आगे की जांच करने के मुद्दे पर मतभेद था। जस्टिस एके मित्तल ने कहा था कि जांच आयोग अधिनियम की धारा 8-बी के तहत नोटिस देना जरूरी था, क्योंकि रिपोर्ट से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। जारी किया गया नोटिस आवश्यक शर्तों के अनुसार नहीं था। इसलिए, आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को ‘नॉन एस्ट’ माना गया। धारा 8-बी के लिए आयोग से अपेक्षा की जाती है कि वह किसी व्यक्ति को जांच के दौरान सुनवाई का उचित अवसर दे। फैसले में कहा गया कि आयोग नयी रिपोर्ट जमा करने से पहले धारा 8बी के तहत नोटिस जारी कर आगे बढ़ सकता है।
जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल ने आयोग द्वारा नोटिस जारी करने के मुद्दे पर असहमति जताते हुए कहा कि आयोग अब अस्तित्व में नहीं है और उसके लिए धारा 8-बी के तहत नया नोटिस जारी करना संभव नहीं होगा। इसकी शर्तों को 31 अगस्त, 2016 तक दो बार बढ़ाया गया और आयोग उसी तारीख को अपनी रिपोर्ट दी।
अब जस्टिस खेत्रपाल ने कहा कि सरकार ने कहीं भी आयोग की समाप्ति को अधिसूचित नहीं किया। यह तर्क कि आयोग का अस्तित्व समाप्त हो गया, गलत था, क्योंकि इसका अस्तित्व कभी समाप्त ही नहीं हुआ। चूंकि आयोग का अस्तित्व समाप्त नहीं हुआ था, इसलिए सरकार द्वारा इसे अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए जारी रखा जा सकता है। जस्टिस खेत्रपाल ने कहा कि सरकार आयोग को जारी रखने का निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है, जैसा वह उचित समझे।

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