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लक्षित दिशा परिवर्तन से रचनात्मक विचार प्रवाह

06:39 AM Jan 15, 2024 IST
लक्षित दिशा परिवर्तन से रचनात्मक विचार प्रवाह
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रेनू सैनी

हम सभी ने बचपन से सदैव यह सुना है कि जितना अधिक हम काम पर फोकस करते हैं, उतना ही अधिक हम उसमें प्रवीण होते जाते हैं। लेकिन कई बार ध्यान को भटकाने से जीवन में अनेक उत्पादक एवं रोचक विचार मिलते हैं। यही उत्पादक एवं रोचक विचार नवप्रवर्तन की ओर मुड़ते हैं। ध्यान भटकाने के लिए स्कैटर फ़ोकस शब्द का प्रयोग किया जाता है। ‘स्कैटर फ़ोकस’ जान-बूझकर मस्तिष्क को भटकाने की प्रक्रिया है। क्रिस बेली ने ‘हाइपर फ़ोकस’ नामक एक पुस्तक लिखी है। ‘स्कैटर फ़ोकस’ के संदर्भ में उनका कहना है कि, ‘स्कैटर फ़ोकस का अभ्यास वास्तव में आपको अपना ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार करने में मदद कर सकता है।’ कई बार जब हम एक ही जगह पर ध्यान केंद्रित करते हैं तो हमें कोई नवीन मार्ग नहीं सुझाई देता। लेकिन जैसे ही हम अपना ध्यान वहां से हटाते हैं और उसे भटकाते हैं तो अचानक ही अनेक रचनात्मक प्रक्रियाएं मस्तिष्क में गूंजने लगती हैं।
गुजरात के अमित दोशी एक कॉर्पोरेट कम्पनी में अपशिष्ट प्रबंधन का कार्यभार संभालते थे। वे अपने कार्य में बहुत ही फोकस थे। कार्य में ध्यानमग्न होने के कारण उन्हें किसी और चीज का होश ही नहीं रहता था। एक दिन उन्होंने अपने कार्य से इतर कुछ देर के लिए आसपास भ्रमण करने का निर्णय लिया। मार्ग में उन्होंने देखा कि कहीं पर जल की अधिकता है तो कहीं पर जल व्यर्थ बह रहा है और कहीं पर लोग पानी के लिए लड़ रहे हैं। बस यही वह क्षण था जब स्कैटर फ़ोकस की स्थिति में उन्होंने एक आविष्कार का निर्णय लिया। यह आविष्कार था वर्षा जल संचयन फिल्टर।
अमित दोशी ने इस पर लगातार काम करना आरंभ किया और नीरेन नामक एक छत पर वर्षा जल संचयन फिल्टर का आविष्कार किया। इसकी रख-रखाव लागत बहुत न्यूनतम है। इसमें किसी मानवीय हस्तक्षेप की आवश्यकता भी नहीं है। अभी तक इस उपकरण ने 10 करोड़ लीटर पानी को बचाने में मदद की है। वर्ष 2017 में उन्होंने 17 साल के लंबे कार्यकाल के बाद अपनी नौकरी छोड़ दी थी।
जब उन्होंने वर्षा जल संचयन फिल्टर का आविष्कार करने का निर्णय लिया तो इसके लिए उन्होंने पर्यावरण के विभिन्न क्षेत्रों में शोध किए। कुछ महीनों के शोध के बाद उन्होंने वर्षा जल संचयन की दिशा में काम करने का निर्णय किया। उन्होंने यह निर्णय वर्षा जल संचयन प्रणालियों और उनकी कार्यक्षमता से संबंधित कई मुद्दों को समझने के बाद किया। उन्होंने पाया कि पारंपरिक प्रणालियां महंगी थीं और सेटअप के लिए जगह की आवश्यकता थी। इसके साथ ही इनमें उच्च रख-रखाव लागत खर्च आता था। कई बार इनमें खराबी होने पर प्लंबर या पेशेवर की आवश्यकता होती है। इन सभी मुद्दों के समाधान के लिए अमित ने नीरेन प्राइवेट लिमिटेड के तहत एक रखरखाव-मुक्त और लागत प्रभावी दो-चरणीय छत वर्षा जल संचयन प्रणाली, नीरेन का निर्माण किया। इस उपकरण को एक हजार से अधिक घरों में स्थापित किया जा चुका है। इसका निर्यात विदेशों में भी किया गया है। इस उपकरण की सहायता से अभी तक दस करोड़ लीटर पानी संचयन हो चुका है।
सवाल है कि आखिर स्कैटर फ़ोकस विधि के इतनी अधिक उत्पादक एवं रचनात्मक होने के क्या कारण हैं। दरअसल, जब हमारा मन भटकता है तो वह तीन मुख्य स्थानों की ओर प्रवाहित होता है। ये तीन स्थान हैं—अतीत, वर्तमान एवं भविष्य। अतीत, वर्तमान एवं भविष्य तीनों समय पर आधारित हैं। प्रत्येक समय की उपस्थिति हमें अनेक बातों से परिचित कराती है और इस दौरान हम कई अनुभवों से होकर गुजरते हैं। ये अनुभव कई बार इतने अधिक रचनात्मक होते हैं कि व्यक्ति को कुछ कर गुजरने के लिए प्रेरित कर देते हैं।
स्कैटर फ़ोकस दरअसल, आत्मजागरूकता उत्पन्न करता है। अधिक गहराई के साथ नई योजनाओं का सृजन करता है। योजनाओं और सार्थक अनुभवों को अधिक प्रभावशाली तरीके से याद रखने और उनमें उचित सुधार की गुंजाइश उत्पन्न करता है ।
दूसरों के प्रति समानुभूति और सहानुभूति दोनों ही भावों को उत्पन्न करने में सिद्ध होता है।
इस प्रकार स्कैटर फोकस मोड व्यक्ति के लिए कई मायनों में बेहद सहायक सिद्ध होता है। कोई भी व्यक्ति स्कैटर फ़ोकस को निम्न तीन चरणों में बांटकर अपनी समस्याएं सुलझा सकता है। पहला आत्मसात मोड : इसके अंतर्गत अपने मन को उन्मुक्त रूप से भटकने दें और जो भी विचार मन में आए, उसे तुरंत आत्मसात कर कहीं पर लिख लें।
समस्या चिंतन मोड : सब कार्यों को छोड़कर अपनी समस्याओं को ध्यान में रखें और फिर उनसे संबंधित विचारों को एक डायरी में लिख लें।
आदतन मोड : इस मोड को सबसे शक्तिशाली बताया गया है। इस मोड में व्यक्ति महत्वपूर्ण कार्यों पर फोकस करना छोड़ कर सरल कामों में जुट जाता है और कई बार बिल्कुल आरामदायक अवस्था में वह ऐसी चीजें खोज लेता है जो लाख एकाग्रता केंद्रित करने पर भी नहीं मिलतीं।

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