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जलवायु परिवर्तन से बढ़ा एयर टर्बुलेंस का खतरा

06:51 AM Jun 06, 2024 IST
जलवायु परिवर्तन से बढ़ा एयर टर्बुलेंस का खतरा
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मुकुल व्यास

हाल ही में आकाश में दो विमानों को टर्बुलेंस (वायुमंडलीय अस्थिरता) का सामना करना पड़ा। लंदन से सिंगापुर जाने वाली सिंगापुर एयरलाइंस की फ्लाइट में तीव्र टर्बुलेंस से एक व्यक्ति की दिल का दौरा पड़ने से मृत्यु हो गई और कई अन्य बुरी तरह घायल हो गए। इस घटना के कुछ दिन बाद ही दोहा से डबलिन जा रहे कतर एयरवेज के विमान में टर्बुलेंस आने से 12 लोग घायल हो गए। सिंगापुर एयरलाइंस के विमान में आई भीषण टर्बुलेंस की शुरुआती जांच से पता चला है कि विमान 4.6 सेकंड में लगभग 54 मीटर नीचे गिर गया था। सिंगापुर के ट्रांसपोर्ट सेफ्टी इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के प्रारंभिक निष्कर्षों में गुरुत्वाकर्षण बल में तेजी से परिवर्तन और ऊंचाई में गिरावट पाई गई। यह दूरी इटली के पीसा की झुकी हुई मीनार की ऊंचाई के लगभग बराबर है। इस घटना में संभवतः वे लोग घायल हुए जिन्होंने सीट बेल्ट नहीं पहनी थी। हवाई यात्रियों के लिए थोड़ी बहुत टर्बुलेंस एक आम अनुभव है। लेकिन हालिया स्तर की गंभीर घटनाएं दुर्लभ हैं, जब वे घटती हैं तो घातक हो सकती हैं। टर्बुलेंस हवा के अनियमित प्रवाह के कारण होती है, जिससे यात्रियों और चालक दल को अचानक साइड में और ऊपर की तरफ तगड़े झटके लगते हैं।
एयर टर्बुलेंस की घटना कहीं भी हो सकती है, लेकिन कुछ मार्गों पर यह दूसरों की तुलना में कहीं अधिक आम है। जलवायु परिवर्तन से एयर टर्बुलेंस की संभावना बढ़ने और इसके और अधिक तीव्र होने की आशंका है। वास्तव में, कुछ शोध से संकेत मिलता है कि पिछले कुछ दशकों में टर्बुलेंस की स्थिति पहले से बदतर हो गई है। लगभग हर उड़ान किसी न किसी रूप में एयर टर्बुलेंस का अनुभव करती है। यदि कोई विमान दूसरे विमान के पीछे उड़ान भर रहा है या उतर रहा है तो पहले विमान के इंजन और पंखों के सिरों द्वारा उत्पन्न हवा पीछे वाले के लिए टर्बुलेंस का कारण बन सकती है।
हवाई अड्डे के पास के क्षेत्र से गुजरने वाली तेज हवाओं के कारण एयर टर्बुलेंस हो सकती है। अधिक ऊंचाई पर विमान यदि किसी अन्य विमान के करीब उड़ रहा हो या तूफान की चपेट में आया हो तो भी टर्बुलेंस की घटना घट सकती है। एक अन्य प्रकार की एयर टर्बुलेंस जो अधिक ऊंचाई पर होती है, उसका पूर्वानुमान लगाना कठिन होता है। इसे क्लियर एयर टर्बुलेंस कहते हैं। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह अदृश्य होती है। यह तूफान या बादलों जैसे किसी भी दृश्य संकेत से जुड़ी नहीं होती। नियमित टर्बुलेंस के विपरीत यह अचानक आती है और इससे बचना मुश्किल होता है। यह अक्सर गर्म हवा के ठंडी हवा की तरफ बढ़ने के कारण होता है। जलवायु परिवर्तन के कारण इसके बदतर होने की आशंका है।
सबसे बुनियादी स्तर पर एयर टर्बुलेंस दो या दो से अधिक पवन संबंधित घटनाओं के टकराने का परिणाम है। ऐसा अक्सर पर्वत श्रृंखलाओं के पास होता है,क्योंकि भूभाग पर बहने वाली हवा ऊपर की ओर तेज हो जाती है। टर्बुलेंस की घटनाएं अक्सर जेट स्ट्रीम के किनारों पर भी होती हैं। जेट स्ट्रीम दरअसल दुनिया भर में ऊंचाई पर चक्कर लगाने वाली तेज हवाओं की पतली पट्टियां हैं। गति बढ़ाने के लिए विमान अक्सर जेट स्ट्रीम में यात्रा करते हैं लेकिन जेट स्ट्रीम में प्रवेश करते या छोड़ते समय कुछ टर्बुलेंस हो सकती है।
अमेरिका में हर साल लगभग 65,000 विमान मध्यम टर्बुलेंस और लगभग 5,500 गंभीर टर्बुलेंस का सामना करते हैं। हालांकि यह संख्या बढ़ने वाली है। ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग में वायुमंडलीय विज्ञान के प्रोफेसर पॉल विलियम्स का मानना है कि जलवायु परिवर्तन टर्बुलेंस को बदल रहा है। विलियम्स ने कहा, हमने कुछ कंप्यूटर सिमुलेशन चलाए और पाया कि आने वाले दशकों में गंभीर टर्बुलेंस दोगुनी या तिगुनी हो सकती है। संपूर्ण विश्व में टर्बुलेंस पैटर्न का मानचित्रण करना संभव है। वैकल्पिक हवाई अड्डों या आपात स्थितियों के लिए अग्रिम योजना बनाने के लिए एयरलाइंस इन मानचित्रों का उपयोग करती हैं। मौसम की स्थिति के साथ टर्बुलेंस बदलती है। कुछ क्षेत्रों और मार्गों पर दूसरों की तुलना में इसका खतरा अधिक होता है। टर्बुलेंस वाले अधिकांश मार्ग पहाड़ों के करीब से गुजरते हैं।
पिछले साल प्रकाशित एक अध्ययन में 1979 और 2020 के बीच क्लियर टर्बुलेंस में बड़ी वृद्धि का प्रमाण मिला। कुछ स्थानों पर गंभीर टर्बुलेंस में 55 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई।
वर्ष 2017 में एक अलग अध्ययन में जलवायु मॉडलिंग का उपयोग करके यह अनुमान लगाया गया कि कुछ जलवायु परिवर्तन परिदृश्यों के तहत, 2050 तक क्लीयर एयर टर्बुलेंस में चार गुना वृद्धि आम हो सकती है। टर्बुलेंस का पता लगाने की तकनीक अभी भी अनुसंधान और विकास के चरण में है। इसलिए पायलट अपने उड़ान पथ से ठीक पहले उच्च स्तर की नमी वाले मौसम से बचने की कोशिश करते हैं। इसके लिए वे सर्वोत्तम योजना निर्धारित करने के लिए मौसम राडार से प्राप्त ज्ञान का उपयोग करते हैं। जब उन्हें अत्यंत तीव्र टर्बुलेंस का सामना करना पड़ता है, तो वे तुरंत सीट बेल्ट बांधने के संकेत चालू कर देते हैं और विमान को धीमा करने के लिए इंजन का जोर कम कर देते हैं। भू-आधारित मौसम विज्ञान केंद्र उपग्रहों की सहायता से मौसम के मिजाज को विकसित होते हुए देख सकते हैं। वे वास्तविक समय में उड़ान कर्मियों को यह जानकारी दे सकते हैं कि उनकी उड़ान के दौरान मौसम कैसा रहेगा। यदि अपेक्षित उड़ान मार्ग पर तूफान विकसित होता है तो इसमें अपेक्षित टर्बुलेंस के क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं।
ऐसा लगता है कि दुनिया और अधिक टर्बुलेंस वाले समय की तरफ बढ़ रही है। एयरलाइंस विमानों और यात्रियों पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगी। लेकिन आम हवाई यात्री के लिए खास संदेश यह है कि वे सीट बेल्ट बांधने के निर्देश की अनदेखी न करें।

लेखक विज्ञान मामलों के जानकार हैं।

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