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गत्ता उद्योग पर पड़ी मार, 40 पर लगा ताला

08:06 AM Feb 10, 2024 IST
गत्ता उद्योग पर पड़ी मार  40 पर लगा ताला
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योगराज भाटिया/निस
बीबीएन, 9 फरवरी
प्रदेशभर में अब गत्ते के बॉक्स 20 फीसदी अधिक महंगे दामों पर उपलब्ध होंगे। इसके लिए हिमाचल प्रदेश सहित अन्य राज्यों में भी इसका एलान कर दिया गया है। शुक्रवार को प्रदेश गत्ता उद्योग संघ के अध्यक्ष आदित्य सूद व उपाध्यक्ष हेमराज चौधरी ने बीबीएनआईए हाल में बैठक उपरांत बताया कि उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल सहित अन्य संबंधित राज्यों की पेपर मिलों द्वारा 30 फीसदी तक कच्चे मेटेरियल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। यह बढ़ोतरी एक से 30 जनवरी तक की गई है। अचानक हुई इस बढ़ोरती से गत्ते के बॉक्स बनाने वाले उद्यमियों के सामने परेशानी खड़ी हो गई और अब उन्होंने भी दाम बढ़ाने का एलान कर दिया है। गत्ता उद्यमियों ने कहा है कि उन्होंने 10 फरवरी से बढ़ी हुई कीमतों के तहत ही बॉक्स कस्टमर को दिए जाएंगे।
ऐसे में यदि कोई कस्टमर दूसरे राज्यों से गत्ता मंगवाता है तो गत्ते के बॉक्स बनाने वाले सभी उद्यमी एकजुट होकर बाहर से आने वाले ट्रकों को रोकने के लिए मजबूर होंगे। अब तक हिमाचल प्रदेश के करीब 40 उद्योगों में ताला लग चुका है, जिसका कारण पेपर मिलों द्वारा अचानक की जाने वाली बढ़ोतरी ही है। गत्ता उद्योग प्रबंधक अशोक राणा ने कहा कि प्रदेश में लगभग 250 गत्ता उद्यमी हैं। पेपर मिलों द्वारा कच्चे मेटेरियल के दाम बढ़ाने से सभी उद्यमियों की नींद उड चुकी है। बाजार में आपूर्ति पूरी तरह से ठप होने वाली है। बाजार से अगर गत्ता उद्यमियों को नए दामों पर आर्डर नहीं मिला तो गत्ता बॉक्स तैयार करने वाले उद्योगों का उत्पादन बंद हो जाएगा। दामों में 20 फीसदी बढ़ोतरी करना गत्ता उद्यमियों की मजबूरी है।
सेब सीजन पर भी होगी महंगाई की मार : विशाल गोयल गत्ता उद्योग संघ के महासचिव विशाल गोयल ने कहा कि गत्ता उद्यमियों का कहना है कि इस वर्ष सरकार ने पहले हमारी 8 फीसदी तक इलेक्ट्रिसिटी डयूटी बढ़ा दी है। उसके बाद अब पेपर मिलों ने 30 फीसदी तक दाम कच्चे मेटेरियल के बढ़ा दिए हैं। इन दो बड़े बदलाव के चलते अब गत्ते की पेट्टियां पहले की तुलना में काफी महंगी कीमतों पर तैयार हो रही हैं। आने वाले सेब सीजन पर भी इस महंगाई की मार पड़ेगी।

गत्ता बॉक्स उत्पादन भी हुआ महंगा : जैन

बढ़ती महंगाई का असर अब गत्ता उत्पादन करने वाले उद्योगों पर भी लगातार बढ़ रहा है। पेपर मिलों द्वारा बढ़ाए गए दाम तो बड़ा कारण है ही, लेकिन इसके अलावा उन्हें स्टिच करना, रॉ मेटिरियल की आपूर्ति के परिवहन का खर्चा, श्रमिकों का खर्चा सहित अन्य ऐसे कई खर्चे हैं जो अब लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में अब दाम बढ़ोतरी के अलावा गत्ता उद्यमियों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

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