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पशुओं को भी जीवन, सम्मान और गरिमा का अधिकार : हाईकोर्ट

07:27 AM Feb 13, 2024 IST
पशुओं को भी जीवन  सम्मान और गरिमा का अधिकार   हाईकोर्ट
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सौरभ मलिक/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 12 फरवरी
पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों से निपटने के तरीके को बदलने वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि पशुओं को भी जीवन, सम्मान, गरिमा और क्रूरता से सुरक्षा का अधिकार है। पीठ ने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि पशुओं को केवल संपत्ति नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई, जब पीठ ने एक भैंस की मौत के बाद बस ड्राइवर के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को इस आधार पर रद्द करने से इनकार कर दिया कि ड्राइवर का भैंस के मालिक के साथ समझौता हो गया है।
भावनाओं को अनुभव करने की पशुओं की क्षमता को पहचानते हुए और उनकी बुनियादी जरूरतों को इनसानों के बराबर बताते हुए जस्टिस हर्ष बंगर ने इस बात पर जोर दिया कि पशु मूक होते हुए भी सुरक्षा के हकदार हैं और उनकी ओर से आवाज उठाना समाज का नैतिक दायित्व है। हाईकोर्ट का यह फैसला उस याचिका पर आया है, जिसमें संगरूर जिले के दिड़बा पुलिस स्टेशन में लापरवाही से वाहन चलाने और एक अन्य अपराध के तहत 31 अक्तूबर, 2016 को दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई थी।
जस्टिस बंगर की पीठ को बताया गया कि याचिकाकर्ता कथित तौर पर तेज गति व लापरवाही से बस चला रहा था, जिससे बस ने सड़क के किनारे भैंसों को टक्कर मार दी। हादसे में एक भैंस की मौत हो गई और एक घायल हो गई। याचिकाकर्ता के वकील ने इस आधार पर एफआईआर को रद्द करने की दलील दी कि उसने भैंस के मालिक के साथ समझौता कर लिया है।
हालांकि, जस्टिस बंगर ने इस बात पर जोर दिया कि बड़ा मुद्दा पशुओं के अधिकार और कल्याण का है। जस्टिस बंगर ने कहा कि केवल समझौते के आधार पर एफआईआर को रद्द करने के लिए सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करना पीठ के लिए उचित नहीं होगा। उन्होंने याचिका को खारिज कर दिया। साथ ही, स्पष्ट किया कि इस मामले का फैसला विवाद के गुण-दोष के आधार पर नहीं किया जा रहा है। ये टिप्पणियां याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता के बीच समझौते के आधार पर एफआईआर को रद्द करने की प्रार्थना पर विचार करने के उद्देश्य तक सीमित हैं।

''मेरे विचार से, पशु मूक हो सकते हैं। लेकिन समाज के तौर पर हमें उनकी ओर से बोलना होगा। पशुओं को कोई दर्द या पीड़ा नहीं पहुंचानी चाहिए। जानवरों के प्रति क्रूरता उन्हें मानसिक पीड़ा भी पहुंचाती है। पशु इनसानों की तरह सांस लेते हैं और उनमें भावनाएं होती हैं। उन्हें भोजन, पानी, आश्रय, सामान्य व्यवहार, चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता
होती है।'' -जस्टिस हर्ष बंगर, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट

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