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अद्भुत स्मरण शक्ति

06:53 AM Feb 23, 2024 IST
अद्भुत स्मरण शक्ति
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बात उन दिनों की है जब स्वामी विवेकानंद मेरठ प्रवास पर थे। वे निरंतर अध्ययनशील रहते थे। उन्होंने प्रवास के दौरान मेरठ में एक बड़ी लाइब्रेरी का पता लगाया और संपर्क साधकर रोज पुस्तक लाने लगे। स्वामी जी सुबह पुस्तक मंगाते और शाम को पुस्तक लौटा देते। यह क्रम कई दिनों तक लगातार चलता रहा। लाइब्रेरियन को रोज रजिस्टर में दो एंट्री करनी पड़ती। यह देखकर लाइब्रेरियन क्षुब्ध हुआ कि रोज मुझे पुस्तक देने व जमा करने के लिये दो बार रजिस्टर में दर्ज करना पड़ता है। वह स्वामी जी की पुस्तक ले जाने वाले व्यक्ति पर बिफर पड़ा कि तुम मुझे परेशान करते हो, एक दिन में इतनी बड़ी पुस्तक भला कौन पढ़ सकता है? स्वामी जी के पास लौटकर उनके सहयोगी ने पूरा विवरण उन्हें बताया। अगले दिन स्वामी विवेकानंद ने लाइब्रेरियन से इस बाबत बात की। लाइब्रेरियन ने स्वामी जी द्वारा ली गई कुछ पुस्तकों के संदर्भ पूछे, जो उसने भी पढ़ी थी। स्वामी जी ने उस पुस्तक, पाठ का नाम व पेज संख्या तक लाइब्रेरियन को बता दिये। यह सुनकर लाइब्रेरियन शर्मिंदा हुआ और स्वामी जी से माफी मांगते हुए उनके पैरों पर गिर पड़ा। पुस्तकालय में मौजूद लोग भी स्वामी की प्रखर बुद्धि देखकर स्तब्ध रह गये।

प्रस्तुति : डॉ. मधुसूदन शर्मा

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