86 विद्यार्थियों ने लिया भाग, पक्ष-विपक्ष की तरह किया संवाद
सोमवार को हरियाणा विधानसभा में सदन का नजारा बदला हुआ था। विधानसभा ने ‘संसद’ की तरह काम किया। मौका था ‘यूथ पार्लियामेंट’ का। केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के नेहरू युवा केंद्र संगठन की ओर से विधानसभा सचिवालय के सहयोग से यूथ पार्लियामेंट का आयोजन किया गया। 28 मार्च को ही हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र सम्पन्न हुआ है। तीन दिन बाद सोमवार को फिर सदन में रौनक देखने को मिली।
स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने सदन को चलाया। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक राजनीति में भाग लेने का आह्वान किया। विद्यार्थियों के आपसी संवाद, कटाक्ष, राजनीतिक विषयों पर जानकारी और उनके बोलने के तौर-तरीकों को देखकर स्पीकर भी हैरान रह गए। युवा संसद में 86 युवाओं ने भाग लिया। चूंकि युवा संसद का आयोजन सदन में ही हुआ। इसलिए विद्यार्थियों को उन्हीं बेंच पर बैठाया गया, जिन पर मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, मंत्री और विधायक बैठते हैं।
हरविन्द्र कल्याण ने कहा कि युवाओं को विकसित भारत-2047 के लिए अपनी भूमिका तय करनी चाहिए। इसके लिए कड़ी मेहनत और दूरदर्शिता से आगे बढ़ने की जरूरत है। प्रत्येक प्रतिभागी ने विकसित भारत बनाने के उद्देश्य से 3 मिनट तक संवैधानिक मूल्यों पर अपने विचार रखे। विकसित भारत युवा संसद 2025 की राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिसार की निमिशा सूर्यवंशी प्रथम, रोहतक की भूमिका द्वितीय तथा झज्जर की दक्षिता गुलिया तृतीय स्थान पर रहीं।
विस अध्यक्ष ने इन सभी को सम्मानित कर सभी उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। विस अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय संविधान की 75 वर्ष की यात्रा के संबंध में आज युवाओं ने तय समय सीमा में अपनी बात रखी है। इससे उनका अध्ययन और विषय की समझ स्पष्ट रूप से प्रकट हुई है। उन्होंने कहा कि वे इन युवाओं को भविष्य के नेता के तौर पर देख रहे हैं।
विस अध्यक्ष ने संविधान निर्माताओं का संदेश देते हुए कहा कि अब समाज में राजनीति के प्रति अवधारणा बदल रही है। अच्छी और सकारात्मक सोच के साथ युवा जनसेवा की भावना से इस क्षेत्र में आने लगे हैं। वास्तव में आज राजनीति को बेस्ट ब्रेन की जरूरत है, जिसमें मेहनत और दूरदर्शिता के साथ अपने से पहले समाज के हित निहित हो। जनहित, राष्ट्रहित और राष्ट्रसेवा की भावना से काम करने वाले युवाओं को इस क्षेत्र में आगे आना चाहिए। उन्हें पुरुषार्थ के साथ आगे बढ़ते हुए संवैधानिक मूल्यों के संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।