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युद्ध से बेखौफ 1000 श्रमिक इस्राइल जाने को तैयार

08:51 AM Jan 18, 2024 IST
युद्ध से बेखौफ 1000 श्रमिक इस्राइल जाने को तैयार
रोहतक में बुधवार को कार्यशाला में कार्य कुशलता दिखाते श्रमिक। -हप्र
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हरीश भारद्वाज/हप्र
रोहतक, 17 जनवरी
इसे बेरोजगारी की मार कहें या विदेश जाने की चाहत! हमास और इस्राइल युद्ध के बावजूद इस्राइल जाकर नौकरी करने वाले युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। पिछले दो दिन से इस्राइल जाकर नौकरी करने के इच्छुक करीब 100 निर्माण श्रमिक महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में टेस्ट देने पहुंचे। अपने कार्य में दक्ष इन लोगों का कहना है कि वह सरकार की मध्यस्थता पर विदेश में नौकरी करने जा रहे हैं, इसमें डर की कोई बात नहीं है। विदेश में रोजगार मिल रहा है और अच्छी तनख्वाह मिल रही है, इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है। टेस्ट देने के लिए पहुंचने वालों में हरियाणा से ही नहीं राजस्थान, पंजाब व अन्य प्रदेशों से भी हैं। अन्य देशों में काम कर चुके श्रमिक भी अपना भाग्य आजमाने यहां पहुंच रहे हैं। इनमें युवाओं से लेकर करीब 50 वर्ष की उम्र तक के अधेड़ शामिल हैं। इस्राइल में मिलने वाली एक लाख 34 हजार रुपए की सैलरी इन लोगों को लुभा रही है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय में 21 जनवरी तक चलने वाले टैस्ट में प्रतिदिन 500 श्रमिकों को बुलाया जा रहा है। इस्राइली दल इन श्रमिकों का साक्षात्कार लेकर प्रैक्टिकल रूप से उनकी दक्षता जांच रहे हैं। कार्यशाला में इन दक्ष कारीगरों को टेस्ट में पास होने के बाद रोजगार के लिए इस्राइल भेजा जाएगा।
इस्राइल जाने वाले श्रमिकों को हर महीने 6100 एनआईएस (इस्राइली मुद्रा) मिलेंगी, जो भारतीय करेंसी में 1.34 लाख रुपये के बराबर है। पानीपत से आए रोहतास ने बताया कि उसने कारपेंटर के लिए अप्लाई किया हुआ था। यहां इंटरव्यू हुआ है और मुझे काम करवा कर देखा गया। उन्होंने कहा कि अगर मैं इंटरव्यू में पास हो जाता हूं तो मेरे लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी और मेरा विदेश जाने का सपना भी सरकार हो पाएगा।
जींद से आए सागर ने बताया कि मैं तो यहां चिन्नाई मिस्त्री का काम करता हूं। सरकार ने वैकेंसी निकाली, अच्छी तनख्वाह मिल रही है तो मैं भी अपना भाग्य आजमाने आ गया।
इंद्री, करनाल से सुमित कुमार ने कहा कि कम पढ़ा लिखा होने बावजूद वे विदेश जा पाएंगे। राजस्थान के चुरू जिला निवासी महेंद्र कुमार स्वामी ने बताया कि वह टाइल व प्लास्टर का काम जानता है। यहां लोकल काम नहीं है और सैलरी भी काफी कम है।
भिवानी निवासी संदीप कुमार ने बताया कि वे सेटरिंग का काम करते हैं। टेस्ट में उनसे सेटरिंग का काम करवाया गया था। इस्राइल में वेतन अधिक मिलेगा।
महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल निवासी नरेंद्र कुमार व विष्णु ने बताया कि वे भी इस्राइल में काम करना चाहते हैं, इसलिए टेस्ट देने आए हैं।
इस बारे मदवि पहुंचे मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सलाहकार पवन चौधरी ने बताया कि करीब 10 हजार वैकेंसी इस्राइल की तरफ से आई है। उन्होंने बताया की एमडीयू के इंजीनियरिंग कॉलेज के इस टेस्ट सेंटर को कंस्ट्रक्शन वर्क की दक्षता जांचने के लिए तैयार किया गया। इस्राइल की टीम टेस्ट ले रही है। टेस्ट में पास युवाओं की जानकारी हरियाणा कौशल रोजगार निगम की वेबसाइट पर डाल दी जाएगी।

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