बच्चों ने पढ़ाया, माता-पिता ने दी परीक्षा
सुरेंद्र मेहता/हप्र
यमुनानगर, 30 मार्च
हरियाणा के सैकड़ों परीक्षा केंद्रों पर रविवार को कुछ अलग ही नजारा देखने को मिला। जहां स्कूली बच्चों ने नहीं बल्कि उनके दादा, दादी नाना, नानी, माता-पिता ने परीक्षा दी। इन परीक्षार्थियों में 70 से 80 वर्ष तक के लोग शामिल हुए। केंद्र व हरियाणा सरकार की उल्लास योजना के तहत अब ऐसे अभिभावकों को साक्षर किया जा रहा है, जो कभी स्कूल नहीं गए। योजना के तहत आज हरियाणा के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर हजारों अभिभावकों ने परीक्षा दी। मजेदार बात ये है कि इसकी तैयारी इन अभिभावकों के बच्चों ने करवाई है। हरियाणा के अन्य जिलों की तरह यमुनानगर में भी उल्लास कार्यक्रम के तहत 15 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को साक्षर बनाने के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की गई। यमुनानगर में 127 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जिन में 70 से 80 वर्ष तक के अभिभावकों ने परीक्षा दी। कार्यक्रम के जिला समन्वयक संजय कंबोज ने बताया कि केंद्र सरकार की हरियाणा सरकार से मिलकर इस योजना के तहत अभिभावकों का सर्वे करने के बाद उन को रजिस्टर्ड किया गया है। जिसके तहत इन अभिभावकों की परीक्षा ली गई। यमुनानगर में 20000 अभिभावकों ने रजिस्ट्रेशन करवाया है। 127 परीक्षा केंद्रों पर अधिकांश अभिभावक 50 वर्ष से अधिक आयु के थे, जबकि ऐसे अभिभावक भी देखे गए जिनकी आयु 75 से 80 वर्ष के बीच में थी। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कैंप की प्रिंसिपल उषा नागी ने बताया कि इस परीक्षा में ऐसे अभिभावक बैठे हैं जो कभी स्कूल नहीं गए। परीक्षा को लेकर इनमें काफी उत्साह देखा गया। उन्होंने बताया कि उनके केंद्र में 350 अभिभावकों ने परीक्षा दी है।
75 वर्षीय दयालाराम व गीता देवी ने दी परीक्षा
एक अभिभावक मानकपुर निवासी दयालाराम थे, जो 75 वर्ष के हो चुके हैं, उनमें परीक्षा को लेकर काफी उत्साह देखा गया। वहीं 75 वर्षीय कलेसर वासी गीता देवी ने भी परीक्षा में बैठकर ये साबित करने की कोशिश की कि पढ़ने की कोई आयु सीमा नहीं होती। इसी तरह सीमा देवी, लक्ष्मी रानी, सुमन देवी 75 वर्ष की आयु से अधिक हो चुकी है और उन्होंने यहां के परीक्षा केंद्रों में आकर परीक्षा दी।